नागालैंड: शवों की पहचान में जुटी पुलिस

  • 6 जनवरी 2014
नागालैंड
Image caption शव मिलने के बाद दीमापुर और असम के पड़ोसी जिले करबी आंगलोंग में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

भारत के पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में नौ व्यक्तियों की हत्या की जांच के लिए बनाए गए विशेष जांच दल (एसआईटी) ने रविवार से अपना काम करना शुरू कर दिया है लेकिन पुलिस अभी तक आठ शवों की पहचान नहीं कर पाई है.

दीमापुर पुलिस अधीक्षक वीज़ेड अंगामी ने बीबीसी को बताया कि पुलिस अभी तक सिर्फ़ एक ही शव की पहचान कर सकी है. उसकी पहचान असम के पड़ोसी जिले करबी आंगलोंग से लापता एक युवक के रूप में हुई है. शवों की हालत से लगता है कि इनकी हत्याएं एक सप्ताह पूर्व की गई होंगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दीमापुर के नजदीक मिले इन नौ शवों के हाथ बंधे हुए थे और उन्हें क़रीब से गोली मारी गई थी. इन शवों को पहली बार शुक्रवार को देखा गया था.

सभी शव एक के ऊपर एक करके एक गड्ढे में डाले गए थे. मृतकों की आँखों पर काली पट्टी भी बंधी थी.

पहचान

अंगामी ने कहा कि पुलिस बाकी शवों की पहचान में जुटी है. उम्र से सभी शव युवकों के लग रहे हैं. अंगामी के मुताबिक, दीमापुर में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस पूरी सतर्कता बरत रही है.

असम की सीमा से सटे दीमापुर में इन शवों के मिलने से भय का माहौल है.

पिछले एक हफ़्ते के दौरान करबी आंगलोंग के चोकीहोला और बोरपाथर थानों के इलाक़ों में नागालैंड मूल के रेंगमा और असम के करबी समुदायों के बीच में हिंसक झड़पे हुए हैं.

जातीय हिंसा

नागालैंड से सटे असम के करबी आंगलोंग जिले के पुलिस अधीक्षक मुग्धा ज्योती ने बीबीसी को बताया कि शनिवार रात भी गोलीबारी की घटना हुई जिसमें एक व्यक्ति को गोली मारी गई है.

हिंसक घटनाओं के मद्देनज़र असम और नागालैंड की पुलिस ने सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी है.

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने हत्याओं की जाँच के लिए चार सदस्यीय एक जाँच दल बनाने की घोषणा की थी.

रियो ने हत्याओं की आलोचना करते हुए लोगों से शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है.

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