'पहले लोकसभा चुनाव जीतकर दिखाएं केजरीवाल'

प्रवासी भारतीय सम्मेलन

दिल्ली में पिछले साल शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों और फिर दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विदेशों में रह रहे भारतीय भी अरविंद केजरीवाल को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाए हैं.

कुछ को लगता है कि अरविंद केजरीवाल बदलाव लाएंगे तो कुछ लोग 'ओल्ड को ही गोल्ड' मान रहे हैं.

प्रवासियों में से कुछ का यह भी मानना है कि लोकसभा चुनाव जीतना अरविंद केजरीवाल के लिए दूर की कौड़ी है.

प्रवासी भारतीयों में से ज़्यादातर दिल्ली में आम आदमी पार्टी नेता और उसके नेता अरविंद केजरीवाल को सोशल मीडिया के ज़रिए जानते हैं.

उनमें यह जानने की उत्सुकता थी कि 'आप' के लोग कैसे झाड़ू से भ्रष्टाचार साफ़ करेंगे ?

'लुभाना आसान'

मुकुल पॉल तनेजा लगभग 25 पच्चीस साल पहले ब्रिटेन गए थे. अब वह हाउस ऑफ़ लार्ड्स के सदस्य हैं. भारतीय राजनीति में उनकी ख़ासी रुचि है.

Image caption हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य मुकुल पॉल मानते हैं कि जनता से किए वादे पूरे करना आसान नहीं.

वह कहते हैं, "सत्ता में आना और उसके बाद सत्ता में आने से पहले किए गए गए वादे पूरे करना आसान नहीं है. लोगों को लुभाना आसान है. कुछ करके दिखाना बहुत मुश्किल."

सम्मेलन में अधिकतर सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के अध्यक्ष और सदस्य आए थे जो अपने लिए भारत में अवसर तलाश रहे थे.

वे भारतीय राजनीति में बन रहे नए समीकरणों और अवसरों के प्रभाव से अछूते कैसे रह पाते?

'ओल्ड ही गोल्ड'

दुबई से आए बुज़ुर्ग रमेश शुक्ला ने अपने म्यूज़ियम के बारे में गर्व से बताया और उनकी बातों से लगा कि वह भारतीय राजनीति के म्यूज़ियम में भी पुरानी चीज़ें ही संभालकर रखना चाहते थे.

दिल्ली में 'आप' की सरकार के बारे में उन्होंने कहा, "यह केजरीवाल की पहली सीढ़ी है. जब वह ऐसी दस सीढ़ी चढ़ जाएंगे, तब मैं उन्हें मानूंगा. पुराने राजनीतिक दल ही अभी ज़्यादा भरोसेमंद हैं. ओल्ड ही गोल्ड है. इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता."

इसी प्रवासी भारतीय सम्मेलन में मुझे डॉक्टर जगविंदर सिंह विर्क मिले. यूं तो वह दो दशकों से अधिक समय से ऑस्ट्रेलिया में हैं, लेकिन अपनी मिट्टी की यादों के साथ-साथ उनकी ख़ास पंजाबी अंदाज़ में दिल्लगी करने की आदत नहीं छूटी थी.

उन्होंने प्रधानमंत्री पद की तुलना ओलंपिक मैडल से की.

'लोकसभा चुनाव और ओलंपिक मैडल'

Image caption दुबई में रह रहे रमेश शुक्ल अब भी राजनीति के पुराने खिलाड़ियों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं.

जगविंदर सिंह का कहना था, "पंजाब में मैडल जीत लिया, तो ज़रूरी नहीं कि आप ओलंपिक में भी मैडल जीत लेंगे. लोकसभा चुनाव जीतना ओलंपिक में मैडल जीतने के बराबर है. वैसे केजरीवाल यदि दिल्ली के मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो भारत का प्रधानमंत्री कोई भी बन सकता है. मैं तो कहता हूँ आप भी चुनाव लड़ लो."

ख़ैर मैं उनकी सलाह के बाद भी चुनाव लड़ने के बारे में नहीं सोच पाई.

हालांकि प्रवासी भारतीयों के बीच केजरीवाल की छवि एक बदलाव चाहने वाले ईमानदार नेता के बतौर देखने में आई, जो मानते हैं कि वह देश की बेहतरी के लिए कुछ नया कर रहे हैं.

संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी पारस शहदाद पुरी केजरीवाल के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान और राजनीति में जनता की भागीदारी से फ़ैसले लेने की उनकी नीति के कायल हैं मगर राष्ट्रीय स्तर पर 'आप' को लेकर पूरी तरह विश्वस्त नहीं हैं.

'केजरीवाल राजनीतिक प्रबंधक'

शहदाद पुरी कहते हैं, "लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्हें भ्रष्टाचार के अलावा कई अन्य मुद्दों पर अपनी राय साफ़ करनी होगी जिनमें भारतीय विदेश नीति, भारत की सॉफ्ट पावर, विदेश मामले, बुनियादी ढाँचे का विकास और शिक्षा जैसे मुद्दे अहम हैं.

इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जिनका मानना था कि केजरीवाल को दिल्ली की सत्ता उनके 'प्रबंधन' के गुण की वजह से मिली.

सऊदी अरब में अपना व्यापार कर रहे कमाल कहते हैं, "केजरीवाल राजनीतिक प्रबंधक हैं, जो सूचना तकनीक का अच्छा प्रयोग कर के सत्ता में आए."

उनका कहना है, "सऊदी अरब में लोग केजरीवाल का समर्थन करते हैं, लेकिन कितने दिन तक वह अपना प्रभाव क़ायम रख पाएंगे, यह नहीं पता."

'भारत का भ्रष्टाचार'

मैंने पूछा कि क्या आपको लगता है केजरीवाल भ्रष्टाचार दूर कर पाएंगे?

Image caption ओमान में रह रहे शकील के मुताबिक़ केजरीवाल को विदेशों में रह रहे अधिकतर भारतीय जानते हैं.

कमाल ने कहा, "भगवान भी ज़मीन पर आ जाएं, तो भारत का भ्रष्टाचार दूर नहीं कर पाएंगे. हम बस उम्मीद कर सकते हैं कि केजरीवाल कुछ कर दिखाएं."

केजरीवाल खाड़ी देशों में रह रहे युवा भारतीय तकनीक विशेषज्ञों के बीच लोकप्रिय हैं.

ओमान में कपड़ों के व्यापारी शकील कहते हैं, "केजरीवाल को लोग पसंद करते हैं और अगर वह लोकसभा चुनाव में जीतते हैं, तो यह भारत और ग़रीबों के लिए अच्छा होगा."

आम आदमी पार्टी के लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर कुछ ऐसे ही स्वर सुनने को मिले जो इस दल के दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले सुनाई पड़ते थे.

लॉर्ड मुकुल पॉल तनेजा ने कहा, "आम आदमी पार्टी तो शायद चलने से पहले दौड़ना चाह रही है. मुझे नहीं लगता की लोकसभा चुनाव में वह उस स्तर का प्रभाव बना पाएंगे, जिस स्तर का वह सोच रहे हैं."

'साफ़ सुथरी सरकार'

फिलहाल प्रवासी भारतीयों से बात कर एक बात तो लगभग साफ़ हुई कि अधिकतर लोग भारत को भ्रष्टाचार मुक्त देखना चाहते हैं.

पुरी ने कहा, "हम तो बस यही चाहते हैं कि कोई भी सरकार आए, साफ़ सुथरी आए."

अमरीका से आए प्रवासी भारतीय शैंटी शौरी ने बताया, "विदेशों में रह रहे लोगों के लिए केजरीवाल नए भारत का चेहरा हैं. लेकिन यह उनकी शुरुआत है. इतने बड़े लोकतंत्र में हर एक पर निगरानी रखना संभव नहीं होगा."

उन्होंने कहा, "बेहतर यही होगा कि हम अपने बच्चों को सच्चाई पर चलना सिखा कर ही भविष्य में व्यवस्था परिवर्तन कर सकते हैं."

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