केजरीवाल का जनता दरबार पहले 'स्थगित' अब बंद

  • 13 जनवरी 2014

अपने पहले जनता दरबार में उमड़ी भीड़ के बाद अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जनता दरबार नहीं लगाएँगे.

उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि वो सप्ताह में एक बार लोगों से मिलेंगे, लेकिन औपचारिक रूप से जनता दरबार अब नहीं लगाया जाएगा.

साथ ही उन्होंने बताया कि लोगों की शिकायतें लेने के लिए ऑनलाइन सिस्टम और एक कॉल सेंटर की स्थापना भी की जाएगी.

केजरीवाल ने कहा, "अब हम तकनीक का इस्तेमाल करेंगे. अब जनता दरबार नहीं लगेगा और उसकी जगह कॉल सेंटर की स्थापना की जाएगी. शिकायतों को डाक से या ऑनलाइन भेजा जा सकेगा."

इसके अलावा उन्होंने एक बार फिर दोहराया है कि उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की ज़रूरत नहीं है, हालांकि गाज़ियाबाद पुलिस ने उन्हें ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा, "मुझे सुरक्षा की ज़रूरत नहीं है. मेरी जान को कोई ख़तरा नहीं है. आम आदमी को सुरक्षा मिलनी चाहिए."

बेकाबू हुआ आम आदमी

इससे पहले शनिवार को आम लोगों की शिकायतें सुनने और उन्हें दूर करने के इरादे से अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्रियों के साथ पहला जनता दरबार लगाया था.

भारी भीड़ की वजह से वहां भगदड़ होते-होते बची. केजरीवाल से मिलने की उम्मीद लिए लोगों ने बैरीकेड्स तोड़ दिए.

इन हालात में मुख्यमंत्री केजरीवाल को दरबार बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा.

हालांकि बाद में उन्होंने माना था कि सरकारी व्यवस्थाओं में कहीं न कहीं कमी रही, जिसे आगे ठीक से करना होगा.

उन्होंने कहा था कि जल्द ही अधिक इंतजाम के साथ किसी बड़े स्थान पर जनता दरबार लगाया जाएगा.

हालांकि अब मुख्यमंत्री का कहना है कि जनता दरबार नहीं लगाया जाएगा.

जल्दबाजी का आरोप

भगदड़ जैसे हालात के बाद विपक्षी दलों ने केजरीवाल पर जल्दबाज़ी का आरोप लगाया. इसके जवाब में केजरीवाल ने कहा था, "मैं हमेशा कहता रहा हूँ कि हम जल्दबाज़ी में हैं. अगर हम सबने मिलकर जल्दबाज़ी न की तो यह देश नहीं बचेगा."

जनता दरबार में ज़्यादा भीड़ पहुँचने के सवाल पर उन्होंने कहा था, "जो लोग आए थे उन्हें विश्वास था कि उनका काम होगा. जनता की उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं. जनता का विश्वास बहुत ज़्यादा है. हमें और मेहनत करनी होगी."

जनता दरबार में पहुंचे ज़्यादातर लोगों में वो थे, जो या तो दिल्ली सरकार के कर्मचारी हैं या फिर वहां से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. मुख्यमंत्री केजरीवाल ने माना है कि सरकारी कर्मचारी सबसे ज़्यादा परेशान दिखे.

इनके अलावा बहुत से लोग जो जनता दरबार में पहुंचे थे, वे सरकारी दफ़्तरों में अस्थायी कर्मचारी के बतौर काम कर रहे हैं. केजरीवाल का कहना था कि उनकी समस्याएं एक दिन में हल नहीं हो सकतीं, लेकिन सरकार उन्हें प्राथमिकता के आधार पर देख रही है.

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