राहुल या विश्वास, अमेठी अभी तौल रही है

राहुल गाँधी, कुमार विश्वास इमेज कॉपीरइट AFP

अमेठी में आजकल आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास की हाल में हुई चुनावी सभा के बाद की सरगर्मी देखी जा सकती है. इस सभा में करीब छह हज़ार लोग शामिल हुए थे.

लेकिन चर्चा इसकी नहीं थी कि उस सभा के माध्यम से आम आदमी पार्टी ने राहुल के खिलाफ एक ज़ोरदार युद्ध का ऐलान किया या नहीं.

अमेठी में इन दिनों बात यह हो रही है कि उस रैली में कितने लोग थे और यह कि उसमें अधिकांश लोग बाहर के थे.

'अभी देखते हैं'

अमेठी यात्रा के दौरान हुई लोगों से मुलाकात और माहौल का जायज़ा लेते हुए ऐसा लगा कि कुमार विश्वास को अमेठी की जनता फ़िलहाल गंभीरता से नहीं ले रही है. लोगों के बीच 'अभी देखते हैं' का आम जुमला सुनाई दे रहा था.

पहली प्रभावशाली रैली के बाद अमेठी से थोड़ा पहले जगदीशपुर इलाक़े के एक इंटर कॉलेज में कुमार विश्वास की सभा में केवल 70-80 लोग उपस्थित हुए. कालेज के समीप ही बाज़ार लगा था, दुकानें खुली हुई थीं और अच्छी खासी चहल-पहल थी. लेकिन आम आदमी पार्टी की चुनावी सभा को लेकर वहाँ के आम लोगों में कोई जिज्ञासा या उत्साह नज़र नहीं आया.

अमेठी में 'आप' के प्रभारी हनुमान सिंह से जब भीड़ कम होने की वज़ह पूछी तो वे बोले कि आज त्यौहार हैं जिनके कारण प्रशासन ने रामलीला मैदान में सभा करने की इजाज़त नहीं दी. लेकिन बाद में हुई सुकुल बाज़ार की मीटिंग में ज़बरदस्त भीड़ थी.

उस छोटी सी भीड़ में बिना 'आप' की टोपी लगाए एक बुज़ुर्ग से जब सवाल किया कि क्या वे इस बार आम आदमी को वोट देंगे तो उन्होंने जवाब दिया, "अभी तो देख रहे हैं." यह पूछने पर कि क्या इस बार राहुल को वोट नहीं देंगे, वो बुज़ुर्ग बोले कि अभी ऐसा कुछ नहीं सोचा है.

दिल्ली पर नज़र

इसमें कोई शक नहीं कि 'आप' की लहर ने अमेठी जैसे किले में भी कुछ सुगबुगाहट पैदा कर दी है.

कुमार विश्वास के साथ मंच पर उनके कुछ मुस्लिम साथी भी मौजूद थे. उनमे से एक रउफ ज़ैदी ने बताया कि वे और कुमार सहपाठी रहे हैं और वे दावे के साथ कह सकते हैं कि कुमार इस्लाम और मुसलामानों की इज्जत करते हैं. रउफ को यह सफ़ाई इसलिए देनी पड़ी क्योंकि कुमार के ऊपर इस्लाम की कुछ आला हस्तियों के बारे में कुछ आपत्तिजनक बात कहने का आरोप है.

अमेठी के मुस्लिम समुदाय में आप के लिए बढ़ता आग्रह दिख रहा था. पर यह भी साफ़ है कि लोग पहले अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार का आकलन करना चाहते हैं.

गौरीगंज में सिम कार्ड विक्रेता पंकज कुमार श्रीवास्तव जोश से कहते हैं, "पहले अरविन्द केजरीवाल दिल्ली चला कर दिखा दें फिर अमेठी की सोचें तो ठीक होगा. बाहरी लोगों की भीड़ जमा कर लेने से वो यहाँ चुनाव नहीं जीत पाएंगे."

भरोसे का सवाल

Image caption स्थानीय लोगों का कहना है कि कुमार विश्वास की रैली में आने वाले अधिकांश लोग बाहर के थे.

पंकज यह ज़रूर कहते हैं कि कुमार विश्वास भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के वोट काटेंगे जिससे राहुल गांधी की जीत शायद दो लाख वोट से ना होकर एक लाख या डेढ़ लाख वोट से हो.

'आप' के प्रभारी हनुमान सिंह खुद अमेठी के ठंडे रवैये से थोड़ा चिंतित नज़र आए लेकिन बोले कि बहुत जल्द 'आप' के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ेगा. लेकिन "राहुल की हार निश्चित है", वे आश्वस्त होकर बोले.

कुमार विश्वास ने अपने एक वक्तव्य में चुनौती दी थी कि यदि राहुल गांधी अमेठी छोड़ किसी अन्य क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं तो वे वहाँ से भी उनके खिलाफ लड़ेंगे. लेकिन कुमार विश्वास का व्यवहार और उनका गाज़ियाबाद छोड़ अमेठी आना उनके विरुद्ध जा सकता है.

अमेठी का इतिहास है कि वहाँ की जनता ने हमेशा गांधी परिवार या अमेठी के ही किसी व्यक्ति को चुना है, बाहरी को नहीं. इसलिए देखना होगा कि कुमार विश्वास का इतना विश्वास कितने दिन टिकेगा?

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