पूर्व जज के ख़िलाफ़ आरोपों की रिपोर्टिंग पर रोक

  • 16 जनवरी 2014
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Image caption सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पर लॉ इंटर्न ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार पर लगे यौन शोषण के आरोपों के मीडिया में प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगा दी है.

स्वतंत्र कुमार ने एक राष्ट्रीय समाचारपत्र, दो चैनलों और आरोप लगाने वाली लॉ इंटर्न के ख़िलाफ़ मानहानि का मामला दायर किया है.

स्वंतत्र कुमार पर एक लॉ इंटर्न ने यौन शोषण का आरोप लगाया है. घटना के वक़्त कुमार सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनमोहन सिंह ने अपने फ़ैसले में कहा है कि मीडिया स्वतंत्र कुमार से संबंधित कथित अपमानजनक ख़बरों और उनकी तस्वीरों को 24 घंटे के अंदर हटाए. न्यायाधीश ने अपने अंतरिम फ़ैसले में कहा कि मीडिया इस मामले की रिपोर्ट करते समय भविष्य में स्वतंत्र कुमार की तस्वीर का प्रयोग न करे.

स्वतंत्र कुमार इस समय नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं.

मीडिया संस्थानों को केवल न्यायालय के आदेशों की रिपोर्टिंग तक सीमित रहने का निर्देश दिया गया. उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह रोक 24 फ़रवरी तक के लिए है. 24 फ़रवरी को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है.

दूसरा मामला

जब लॉ इंटर्न ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया तो मीडिया ने आरोपों को प्रकाशित कर दिया था.

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की सुनवाई करने की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर यौन शोषण के आरोप का यह दूसरा मामला है.

इससे पहले लॉ इंटर्न के यौन शोषण के आरोप में घिरे जस्टिस अशोक कुमार गांगुली ने पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उन पर इस्तीफ़ा देने के लिए भारी दबाव था.

हालांकि जस्टिस गांगुली अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं.

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