पीएम लेने आए थे, गए तीन सिलेंडर लेकर: मोदी

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दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने केंद्र की यूपीए सरकार को घेरने की कोशिश की.

नरेंद्र मोदी ने कहा, "आगामी लोकसभा चुनाव हर प्रकार से भिन्न है. इससे पहले देश की ऐसी दुर्दशा कभी नहीं देखी गई है. विश्व का इतना बड़ा लोकतांत्रिक देश नेता विहीन हो, नीति विहीन हो और नीयत भी शक के घेरे में हो, ऐसा वक़्त इस देश ने कभी नहीं देखा था."

उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार का इतना विकराल रूप इस दशक में जो देखा है देश ने कभी नहीं देखा था. आत्महत्या करते किसान, रोज़गार के लिए भटकता नौजवान, इज़्ज़त बचाने के लिए परेशान मां और बहनें, महंगाई की मार से तड़पते भूखे बच्चे."

नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति के राष्ट्रीय अधिवेशन से भाजपा कार्यकारिणी की बैठक की तुलना भी की.

उन्होंने कहा, "उनका दल कैसे बचे, कांग्रेस को कैसे बचाएं, बिखरती हुई पार्टी को कैसे एक रखें ये उनकी जद्दोजहद का विषय था. वहां पर दल बचाने की कोशिश हो रही थी यहां पर देश बचाने की जद्दोजहद है."

मोदी ने कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार न घोषित करने पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, "देश के कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी आशा के साथ दिल्ली आए थे. उनको बताया गया था कि 17 तारीख को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी. वे आए थे प्रधानमंत्री लेने के लिए और वापस गए गैस के तीन सिलेंडर लेकर."

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'मां बेटे की बलि नहीं देगी'

मोदी ने भाषण का इस्तेमाल भविष्य की योजना बताने में भी किया. उन्होंने कहा, "सामान्य आदमी को महंगाई की मार झेलनी न पड़े, किसानों का शोषण न हो इसके लिए देश में प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड की रचना होनी चाहिए. देश में नया एग्रीकल्चर मार्केट खड़ा हो."

उन्होंने ये भी कहा कि भारत को शहरीकरण को एक अवसर मानना चाहिए. "देश में 100 नए शहर बनने चाहिए. प्राथमिक शिक्षा पर और ध्यान देने की ज़रूरत है लेकिन हर राज्य में आईआईटी, आईआईएम और एम्स हो."

उन्होंने कहा, "रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाया जाए. वाजपेयी जी ने स्वर्णिम चतुष्क का निर्माण किया था, समय की मांग है कि हम अटल जी की सोच को नया रूप देते हुए बुलेट ट्रेन का नया चतुष्क तैयार करें."

मोदी ने यह भी कहा कि सोनिया गाँधी अपने बेटे की बलि चढ़ाने से डरी हुई हैं.

मोदी ने कहा, "कांग्रेस के डरने का एक मानवीय कारण भी है. वो मानवीय कारण है जब पराजय बिलकुल निश्चित दिख रही है. विनाश सामने नज़र आ रहा है तो क्या कोई माँ अपने बेटे की बलि चढ़ाने के लिए तैयार होती है? कौन माँ अपने बेटे की बलि चढ़ाएगी राजनीति की राह पर? एक माँ का मन आखिरकर यही निर्णय कर गया, नहीं मेरे बेटे को बचाओ."

'चाय वालों की चर्चा'

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नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में चाय वालों का भी ज़िक्र किया.

मोदी ने कहा, "इन दिनों चाय वालों की बड़ी चर्चा है. ख़ातिरदारी हो रही है. देश का हर चाय वाला सीना तान कर घूम रहा है."

मोदी ने कहा, "उच्चकुल में पैदा हुए लोगों के लिए यह भी चिंता का विषय होता है कि हम जिस कुल में पैदा हुए उसकी इज़्ज़त होती रही है और सामने एक पिछड़ी जाति में पैदा हुआ एक ऐसा व्यक्ति है जिसकी माँ अड़ोस-पड़ोस के घरों में पानी भरती थी, बर्तन साफ़ करती थी. एक ऐसा व्यक्ति जो रेल के डिब्बे में चाय बेचता था, ऐसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ मैं लड़ूं."

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि कांग्रेस चुनावों को लेकर डरी हुई है.

सुषमा ने कहा, "सच्चाई यह है कि कांग्रेस डर गई है और हार के भय से उन्होंने अपना नेतृत्व घोषित करने से इनकार कर दिया है. "

इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए सुषमा ने कहा, "विदाई की घोषणा करते समय ये कहते हैं कि अगली बार के लिए मैं तो उपलब्ध नहीं रहूंगा लेकिन ये ज़िम्मेदारी राहुल गांधी संभालें तो बेहतर होगा. ये ऐसा ही नाटक है जैसा अंतरात्मा की आवाज़ के वक़्त हुआ था. कांग्रेस को अंतरात्मा की आवाज़ भी देर से आती है और परंपरा का बोध भी देर से होता है."

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के नरेंद्र मोदी से चाय बिकवाने के बयान पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता वैंकेया नायडू ने कहा, "हम लोग चाय बेचने वाले हैं, आप लोग देश बेचने वाले हैं. देशवासियों से पूछो कि चाय बेचना पाप है क्या?"

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