जब महिलाएं असुरक्षित, तो कैसा गणतंत्र दिवस: अरविंद केजरीवाल

  • 20 जनवरी 2014
केजरीवाल इमेज कॉपीरइट AFP

दिल्ली पुलिस के पांच अधिकारियो के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार से धरने पर बैठे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि पुलिस की मिलिभगत के बग़ैर दिल्ली शहर में कोई भी अपराध नहीं हो सकता.

आइए जानते हैं कि केजरीवाल ने इस मौक़े पर और क्या-क्या ख़ास बातें कहीं.

दिल्ली में बलात्कार की घटनाएं जारी हैं और दिल्ली पुलिस केवल जांच कर रही है.

धरने को लेकर कैसे बदले केजरीवाल के सुर!

किसी सिपाही या किसी अधिकारी को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.

युगांडा उच्चायोग की एक महिला ने क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती के रेड की सराहना की है. उन्होंने कहा है कि बहुत सारी महिलाएं नौकरी की लालच के बहाने यहां लाईं जाती हैं और फिर उन्हें देह व्यापार में ढकेल दिया जाता है.

पुलिस की मिलिभगत के बग़ैर दिल्ली शहर में कोई अपराध नहीं हो सकता.

हमलोग यहां उन तमाम महिलाओं के लिए इंसाफ़ मांगने के लिए जमा हुए हैं जिनके साथ बलात्कार हुए हैं या उनको जलाया गया है.

लोगों को सोचना चाहिए कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को धरने पर बैठने की ज़रूरत क्यों पड़ी.

एक पूर्व गृहसचिव ने कहा है कि थाना प्रभारी अपनी पोस्टिंग के लिए गृहमंत्री शिंद को पैसे देते हैं लेकिन गृहमंत्री ने उन तमाम आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.

हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस कैसे मना सकते हैं, जब महिलाएं असुरक्षित हैं. हमारे लिए आज गणतंत्र दिवस है जब हम यहां इंसाफ़ के लिए जमा हुए हैं.

कुछ लोग कहत हैं कि मैं अराजक हूँ, हाँ मैं अराजक हूँ. शहर के हर घर में अराजकता है. आज मैं गृहमंत्री के घर में अफ़रा-तफ़री फैला दूंगा.

अगर कोई संवैधानिक संकट पैदा हुआ है, तो इसके लिए केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ज़िम्मेदार हैं, हमलोग नहीं.

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