केजरीवाल का धरना: जोखिम या चुनावी रणनीति

इमेज कॉपीरइट Reuters

अरविंद केजरीवाल के धरने पर बैठने की आलोचना हो रही है. वे दिल्ली पुलिस के उन अधिकारियों को निलंबित करने की मांग के साथ धरने पर बैठे हैं जिन्होंने उनकी सरकार के कानून मंत्री के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था. दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने बीते बुधवार को कुछ यूगांडाई महिलाओं पर विवादास्पद रेड मारने के लिए कहा था.

केजरीवाल की इस बात के लिए भी आलोचना हो रही है कि उनके मंत्री ने कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने अपने मंत्री पर अंकुश नहीं लगाया.

कुछ लोगों का ये भी कहना है कि केजरीवाल शासन नहीं कर सकते लिहाजा वे वही कर रहे हैं जो उन्हें बखूबी करने आता है. कुछ ये भी कह रहे हैं कि वे लोगों को लुभाने की रणनीति के तहत धरने पर बैठे हैं.

धरने पर बैठना अगर अराजकता है तो केजरीवाल ने ख़ुद को अराजकतावादी भी ठहराया है. ऐसे में विवेकशील बातें कहीं दब जा रही हैं.

सड़क पर मुख्यमंत्री

यह सही है कि किसी मुख्यमंत्री का धरने पर बैठने का उदाहरण विरले ही देखने को मिलता है. लेकिन केजरीवाल के मामले में यह अचरज में डालने वाला नहीं है.

जब उन्होंने अल्पसंख्यक सरकार बनाई थी यह तभी स्पष्ट हो गया था कि वे सरकार के नेतृत्व के साथ साथ खुद ही विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार थे.

आम आदमी पार्टी के नेतृत्व का यह मानना है कि सत्ता में रहने के बाद भी उन्हें सत्ता से बाहर बने रहना है. वे राजनीतिक प्रतिष्ठान का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं, इसलिए वे मुख्य विपक्षी दल की भूमिका भी निभा रहे हैं.

वे लोग जो सरकार के रवैए से परेशान हैं, जो सरकार को नाकाम बता रहे हैं, वे एक तो उतावलापन दिखा रहे हैं और दूसरी बात यह है कि उन्हें आम आदमी पार्टी की विस्तृत राजनीतिक योजना की समझ नहीं है.

इमेज कॉपीरइट AP

दरअसल आम आदमी पार्टी दिल्ली के अपने सरकार की चिंता नहीं कर रही है. वास्तिवकता में केजरीवाल को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि उनकी सरकार बर्खास्त हो जाती है या फिर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाता है. उनका मानना है कि ये दोनों स्थिति उनके फायदे में होगी.

केजरीवाल और उनके सहयोगियों की नज़र राष्ट्रीय परिदृश्य पर है क्योंकि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन पूरे भारत में अभियान के तौर फैल सकता है. यही वजह है कि उनकी नज़रें आम चुनाव पर है जो है मई के अंत तक होने वाले हैं.

सत्ता प्रतिष्ठानों के विरोध की राजनीतिक के जरिए उन्हें उम्मीद है कि वे आम आदमी का दिल जीत पाएंगे.

कांग्रेस की ग़लती

सत्ता प्रतिष्ठानों ने दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान केजरीवाल को कमतर आंकने की ग़लती की थी. ऐसा लग रहा है कि वे लोग एक दूसरी ग़लती भी करने जा रहे हैं जब वे कथित तौर पर केजरीवाल के सरकार को कथित तौर पर निकम्मा ठहराने की कोशिश करते हैं.

कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी यह नहीं समझ पा रही है कि जब जब वह एक पापुलर सरकार को बाधा पहुंचाने की कोशिश करेंगे त्यों त्यों आम आदमी की नजर में पापुलर सरकार की लोकप्रियता बढ़ती जाएगी.

दिल्ली में उथलपुथल को लेकर जो लोग शिकायत कर रहे हैं और केजरीवाल को अराजकतावादी बता रहे हैं, वह उन लोगों का तबका है जो बिना अतिरिक्त दबाव झेले समाज में बदलाव चाहता है. सोमवार को एक हिंदी ख़बरिया चैनल पर दिखाए गए सर्वेक्षण के मुताबिक 82 फ़ीसदी लोग केजरीवाल के धरने का समर्थन कर रहे हैं. यह आम आदमी के मूड को दर्शाता है.

कांग्रेस के लिए यह स्थिति कांटों पर चलने जैसा है. कांग्रेस सरकार ना तो केजरीवाल सरकार से समर्थन ले रही है और ना ही मुख्यमंत्री को गिरफ़्तार करने की कोशिश कर सकती है. ये दोनों कार्रवाई कांग्रेस के लिए बूमरैंग साबित हो सकते हैं.

केजरीवाल का जोख़िम

इमेज कॉपीरइट AP

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की वजह से सरकार बनाने में नाकाम रही भारतीय जनता पार्टी भरोसा पाने की कोशिशों में जुटी थी. ऐसा लग रहा है कि उसने अभी केवल आम आदमी पार्टी से मुक़ाबला करने के लिए हथियार ही जुटा पाई है.

केजरीवाल की अराजक राजनीति के बावजूद भारतीय जनता पार्टी आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के लिए कांग्रेस को निशाना बना रही है.

बाहर से ऐसा लग रहा है कि धरने पर बैठने के साथ केजरीवाल बहुत बड़ा जोख़िम ले रहे हैं. लेकिन केजरीवाल की गतिविधियों से यह साफ़ है कि वही हो रहा है जो केजरीवाल चाहते हैं. अगर उनकी सरकार को बर्खास्त किया जाता है या फिर उन्हें और उनके मंत्रियों को गिरफ़्तार किया जाता है तब उनकी पार्टी दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हीरो बन कर उभरेगी.

केजरीवाल ने कांग्रेस और समूची राजनीतिक प्रतिष्ठान के सामने खुली चुनौती दे दी है. उनके समर्थकों का मानना है कि वे बदलाव लाने में सक्षम हैं. बदलाव की इस प्रक्रिया में केजरीवाल पूरी तरह से चूक (क्षमता का खत्म होना) भी सकते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार