अंदरूनी चुनाव से तय होंगे कांग्रेस उम्मीदवार

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बीते दिनों कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की थी कि आगामी आम चुनाव में 15 लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवारों का फ़ैसला अंदरूनी चुनाव के ज़रिए किया जाएगा.

यह विचार कांग्रेस की चुनावी मुहिम का ज़िम्मा संभाल रहे राहुल गांधी के दिमाग की उपज है.

कांग्रेस ने इस बार केवल 15 लोकसभा क्षेत्रों में इस नये विचार को अमल में लाने का फ़ैसला किया है जिसे पार्टी 'पायलट प्रोजेक्ट' की तरह आगे बढ़ा रही है.

यह प्रयोग यदि सफल रहा तो इसके बाद के चुनाव में सभी क्षेत्रों में पार्टी अपने उम्मीदवार इसी प्रक्रिया से चुनेगी.

लेकिन सवाल है कि यह प्रक्रिया आख़िर कैसे लागू होगी?

कांग्रेस का कहना है कि किसी लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की तहसील से लेकर ज़िला शाखाओं तक 1,000 लोगों का एक 'इलेक्टोरल कॉलेज़ियम' होगा जो उस क्षेत्र से चुनाव में कांग्रेस का प्रत्याशी चुनेगा.

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव

यह ठीक उसी तरह से होगा जैसा अमरीका में होता है. यदि आप अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर ध्यान दें तो इसे समझना आसान होगा.

अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार पहले पार्टी के भीतर अंदरूनी चुनाव से चुने जाते हैं और बाद में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर खड़े होते हैं.

भारत में कांग्रेस पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि किसी भी क्षेत्र से सही उम्मीदवार चुनाव लड़े ताकि उसके जीतने की संभावना बढ़ सके.

इस पूरी क़वायद का दूसरा फ़ायदा यह होगा कि टिकट के बंटवारे को लेकर किसी तरह की धांधली या भ्रष्टाचार नहीं होगा.

कांग्रेस के कुछ नेताओं की मानें तो राहुल गांधी यह भी उम्मीद करते हैं कि इससे पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र को बढ़ावा मिलेगा.

दिलचस्प बात यह है कि अंदरूनी चुनाव के लिए उन 15 चुनावी क्षेत्रों को चुना गया है, जिनमें से लगभग सभी सीटों पर साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा था.

गढ़ों में सेंध

इस पूरी प्रक्रिया में पार्टी की चुनावी रणनीति के संकेत भी नज़र आते हैं. कांग्रेस इसके ज़रिए अपने विरोधी दलों के गढ़ों में सेंध लगाने की भी कोशिश करेगी.

दूसरे शब्दों में कहें तो जहां हार की संभावना अधिक है, वहां इस योजना को आज़माया जाएगा.

जिन 15 सीटों को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है, वह सभी किसी न किसी वजह से दिलचस्प हैं.

हरियाणा में गुड़गांव से तीन बार जीतने वाले राव इंदरजीत सिंह कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में चले गए हैं.

राजस्थान में झुंझुनू सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ उम्मीदवार और पांच बार सांसद रहे सीस राम ओला का देहांत हो गया है.

इसी तरह वाराणसी चुनाव क्षेत्र भी इस नई योजना का हिस्सा है जहां से भारतीय जनता पार्टी के मुरली मनोहर जोशी सांसद हैं.

पायलट प्रोजेक्ट

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अटकलें यहां तक लगाई जा रही हैं कि वहाँ से नरेंद्र मोदी को खड़ा किया जा सकता है. दोनों हालत में कांग्रेस के लिए वाराणसी से जीतना कठिन होगा और यही वजह है कि इस सीट को पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया है.

कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर सही उम्मीदवार चुना गया तो संभव है कि वहाँ उसकी विजय हो जैसा कि साल 2004 में हुआ था.

गुजरात में इस योजना के अंतर्गत वडोदरा और भावनगर चुनावी क्षेत्र आते हैं. ये स्पष्ट है कि अगर नरेंद्र मोदी ने वडोदरा से चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया तो उन्हें चुनावी मुहिम चलाने की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी, जबकि भावनगर पिछले आम चुनाव से पहले तक कांग्रेस के नेता शक्तिसिंह गोहिल का गढ़ माना जाता था.

राजनीतिक हलकों में इस नये प्रयोग के एलान के बाद कोई ख़ास उत्साह देखने को नहीं मिला. खुद कांग्रेस पार्टी के पुराने नेता इस प्रयोग से उत्साहित नज़र नहीं आते. लेकिन अगर ये प्रयोग सफल रहा तो हो सकता है कि दूसरी पार्टियां भी इस प्रक्रिया को आरंभ करने पर विवश हो जाएं.

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