राहुल गांधी के बयान पर भड़की भाजपा

  • 28 जनवरी 2014
राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी इमेज कॉपीरइट Getty

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साल 2002 में गुजरात में दंगे भड़काने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

राहुल ने अंग्रेजी समाचार चैनल 'टाइम्स नाउ' को दिए साक्षात्कार में कहा कि गुजरात और साल 1984 के सिख विरोधी दंगों में अंतर यह है कि 2002 के दंगों में गुजरात की सरकार शामिल थी.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि ये दोनों घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण थीं लेकिन राहुल गांधी को 2002 के गुजरात दंगों के बारे में सही जानकारी नहीं है.

उन्होंने कहा, "गुजरात दंगों में पुलिस ने दंगाइयों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की थी. क़रीब 300 दंगाई पुलिस गोलीबारी में मारे गए, 65000 को गिरफ़्तार किया गया, 4000 से अधिक चार्जशीट दायर की गई और सैकड़ों लोगों को सज़ा मिली."

जेटली ने कहा, "गुजरात में ख़ुद मुख्यमंत्री को कई तरह की जाँच से गुजरना पड़ा और अंत में उन्हें क्लीन चिट मिली. लेकिन 1984 के दंगों में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, न कोई एफ़आईआर दर्ज हुई. जाँच आयोग का गठन किया गया जिसने सबको क्लीन चिट दी और उस आयोग के अध्यक्ष को बाद में कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा में भेजा गया था."

उन्होंने कहा, "अगर राहुल गांधी गुजरात दंगों के लिए मोदी सरकार को दोष देते हैं तो यह एक ज़िम्मेदार बयान नहीं है. उन्हें इतिहास का बोध नहीं है."

बचाव

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Image caption जेटली ने कहा कि राहुल गांधी को इतिहास का ज्ञान नहीं है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "1984 के दंगों के बारे में राहुल के पिता ने टिप्पणी की थी कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है. इस तरह उन्होंने उन दंगों को उचित ठहराया था."

लेकिन कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने राहुल के बयान का बचाव करते हुए कहा, "1984 के मुद्दे पर प्रधानमंत्री संसद के दोनों सदनों में विस्तार से बयान दे चुके हैं लेकिन गुजरात मामले में हमेशा मोदी को बचाने की कोशिश की गई."

भाजपा की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के नेता नरेश गुजराल ने कहा, "गुजरात में दंगे हुए थे जबकि दिल्ली में कत्लेआम हुआ था. प्रधानमंत्री के आदेश पर तीन दिन तक सेना तैनात नहीं की गई. राहुल को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए."

राहुल ने साक्षात्कार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन को सही ठहराया था.

इस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "कांग्रेस और राजद का मेल तो स्वाभाविक है. भ्रष्टाचार को लेकर दोनों की विचारधारा एक है. अगर उनका गठबंधन नहीं होता तो मुझे थोड़ा आश्चर्य होता."

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