कैसा है सोमनाथ भारती के काम करने का अंदाज़?

  • 30 जनवरी 2014
सोमनाथ भारती

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाक़े में एक धुंध भरी, कड़कड़ाती सुबह के साढ़े छह बजे मैं दूसरी मंज़िल के एक घर का दरवाज़ा खटखटाता हूँ. दरवाज़ा खोलने वाले हैं ख़ुद दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती.

लेकिन इस घर के बाहर वो सब तामझाम नहीं है जो आम तौर पर मंत्रियों के घरों में नज़र आता है. न कोई सुरक्षा गार्ड और न बंदूक़ें सँभाले पुलिस वाले. सड़क पर खड़ी दिल्ली सरकार की इनोवा कार से मुझे अहसास हुआ कि मैं सही पते पर पहुँचा हूँ.

दिल्ली आईआईटी से एमएससी के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री लेने वाले सोमनाथ भारती इस दफ़्तरनुमा घर में अपनी माँ के साथ रहते हैं.

अभी एक महीना पहले तक वह सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट के वकील थे, पर उन्होंने आम आदमी पार्टी के सदस्य के तौर पर मालवीय नगर से काँग्रेस की किरण वालिया को चुनाव में हराया और उन्हें राज्य का क़ानून मंत्री बनाया गया.

चंद दिनों बाद ही वह स्थानीय लोगों की शिकायत पर रात को अपने समर्थकों के साथ खिड़की गाँव पहुँच गए और वहाँ तैनात पुलिस वालों को कथित वेश्यावृत्ति और नशीली दवाओं के व्यापार को रोकने का आदेश दिया. इसके बाद खड़ा हुआ विवाद दिल्ली ही नहीं पूरे देश ने देखा.

वक़्त लगेगा

शुरुआती औपचारिकता के बाद सोमनाथ भारती अपना टैब बग़ल में दबाए टॉयलेट चले गए और मैं उनके क़ानून की किताबों से भरे कमरे में अकेला रह गया.

सामने दीवार पर मार्टिन लूथर किंग की बड़ी सी तस्वीर लगी है जिसमें वे लिंकन मेमोरियल पर अपना प्रसिद्ध भाषण "आई हैव अ ड्रीम" दे रहे हैं. तस्वीर पर भाषण के शब्द भी अंकित हैं.

कुछ समय बाद भारती लौटे तो उनके टैब की घंटी बजी. उन्होंने स्पीकर मोड पर फ़ोन उठाया. कोई महिला कथित अफ़्रीकी महिलाओं के वेश्यावृत्ति में लिप्त होने के बारे में किसी अफ़्रीकी देश के दूतावास में आई शिकायतों के बारे में जानकारी दे रही थी.

सात बजे भारती ने अपने साथ जुड़े आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जगाया और मॉर्निंग वॉक के लिए हौज़ ख़ास के पार्क के लिए रवाना हुए.

"आप सही लड़ रहे हैं लेकिन ये जो सिस्टम है ये बहुत मुश्किल बना हुआ है. ये हमारे ख़ून में बस गया है. बहुत वक़्त लगेगा बदलने में."

"बहुत ज़ोर लगाना पड़ेगा आपको, ये बात सही है कि थाने बिकते हैं. अच्छे अधिकारी को काम की पोस्टिंग नहीं मिलती और घूस देने वाले को अधिकारी बना देते हैं."

ये उन बुज़ुर्गों के शब्द हैं जो हौज़ ख़ास के डिस्ट्रिक्ट पार्क में सोमनाथ भारती को सबसे पहले मिले थे.

सोमनाथ भारती हर सुबह अपने विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग पार्क में टहलने जाते हैं. चुनाव जीतने के बाद जनता के संपर्क में रहने का उन्होंने यही तरीक़ा अपनाया है.

पार्क में टहलते मंत्री को देखते ही लोग दूर से क़रीब आने लगते हैं. मंत्री जी के सामने ज़्यादातर लोग उनकी कार्यशैली की तारीफ़ ही कर रहे थे.

मधुमक्खी का छत्ता

एक बुज़ुर्ग हाल-चाल पूछते हैं, "जिन विवादों में आप फँसे हैं उनसे निकल गए या नहीं." सोमनाथ जबाव देते हैं, "बस मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है." बुज़ुर्ग दिलासा देते हैं, "ये सब ग़लत हो रहा है. कोई कुछ करना चाह रहा है उसे करने नहीं दिया जा रहा और इसका सब पर असर हो रहा है."

पार्क में एक कश्मीरी महिला ने सोमनाथ को सलाह देते हुए कहा, "जिसका गुम हो जाता है वो खोजने निकलता है, जो पा लेता है सब उसके ख़िलाफ़ हो जाते हैं. इनकी कुर्सी गुम हो गई है, ये सब 'आप' के पीछे लगे हैं."

एक और बुज़ुर्ग की सलाह थी, "अपनी ऊर्जा लोकसभा चुनाव में बर्बाद मत कीजिए. जो वादे आपने दिल्ली में किए हैं पहले उन्हें पूरा करके दिखाइए. आपके साथ जनसमर्थन है लेकिन लालची मत बनिए."

बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर बात आई तो भारती ने कहा, "मोदी ज़ेड प्लस में रहते हैं. बहुत ऊँचाई पर बैठे हैं. आम आदमी की पहुँच से बाहर हैं. वे हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं. लेकिन हम हिंदू राष्ट्र नहीं, ह्यूमन राष्ट्र की बात करते हैं. ऐसी व्यवस्था की बात करते हैं जहाँ जनता मालिक हो और मंत्री नौकर."

क्या बाक़ी दल आम आदमी पार्टी की नक़ल कर रहे हैं? इस सवाल पर भारती कहते हैं, "नक़ल करने से अगर जनता का भला होता है तो अच्छी बात है. लेकिन बदलाव के लिए आत्मा से आवाज़ आनी ज़रूरी है."

ख़बरों से फ़र्क़ नहीं पड़ता

जान को ख़तरे के सवाल पर सोमनाथ कहते हैं, "हर किसी की मौत का दिन निश्चित है. जब आनी है तब आएगी. हमें मौत की चिंता नहीं बल्कि इस बात की चिंता है कि जब हम ज़िंदा थे तो क्या कर रहे थे. ज़िंदा होकर ज़िंदा थे या नहीं."

मैं सोमनाथ से सवाल करते हुए आगे बढ़ ही रहा था कि एक व्यक्ति ने पास आकर कहा कि अख़बार बता रहे हैं कि क़ानून मंत्री पर मामला दर्ज हुआ है.

भारती ने जबाव दिया, "सेक्स और ड्रग ट्रेड इतना गहरा और जटिल है कि इसमें हर वर्ग के लोग जुड़े हैं. पुलिस, नेताओं और समाज विरोधी लोगों का गठजोड़ इस व्यापार को चला रहा है. यहाँ तक हथियारों की डील में लड़कियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये देश की सुरक्षा के लिए चुनौती बन गया है. ऐसे में सभी लोग मेरे ख़िलाफ़ एक हो गए हैं. वे मेरा ख़ून चाहते हैं. लेकिन मेरे इलाक़े की जनता मेरे साथ है इसलिए कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. किसी हेडलाइन से मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."

भारती लौटकर घर पहुँचे तो बिहार से आए कुछ लोग मुलाक़ात करने के लिए और कुछ नागरिक अपने दस्तावेज़ प्रमाणित कराने के लिए बैठे हुए थे. वे तैयार होकर लौटे और अपने स्टाफ़ को दस्तावेज़ अटेस्ट करने के लिए कहा. बिहार से मिलने आए लोगों को वे समय नहीं दे सके.

हम उनकी गाड़ी से सचिवालय के लिए निकल पड़े. रास्ते में मेट्रो स्टेशन पर उतरकर भारती ने गाड़ी को सचिवालय भेज दिया और आगे का सफ़र मेट्रो से किया. मैंने सवाल किया जब गाड़ी फ़ाइलें लेकर सचिवालय जानी ही हैं तो आप ये मेट्रो से जाने का दिखावा क्यों कर रहे हैं?

उनका जबाव था, "भले ही यह लोगों को प्रतीकात्मक लगे लेकिन इससे भी हमें जनता से जुड़ने का मौक़ा मिलता है. हमारा मूल काम जनता के लिए सहज उपलब्ध होना और लोगों में यह भावना पैदा करना है कि हम उनकी पहुँच में हैं. हफ़्ते-पंद्रह दिन में एक बार मेट्रो में सफ़र करके हम यही संकेत देते हैं. लोगों को भी अच्छा लगता है कि सरकार का मंत्री हमारे बग़ल में खड़ा होकर सफ़र कर रहा है."

भारती की बात से अधिकतर यात्री भी सहमत दिखे. हाँ मंत्री को क़रीब पाकर सबने दिल्ली पुलिस के बारे में अपनी खीझ ज़रूर ज़ाहिर की. एक यात्री ने कहा, "मोबाइल खो जाने पर पुलिस एफ़आईआर दर्ज करने के बजाए खो जाने की शिकायत लेकर मुहर लगा देती है."

लोगों को दिक्क़त

क्या एक मंत्री को बिना सुरक्षा के जनता के बीच होना चाहिए? इस सवाल पर एक यात्री ने कहा, "कोई मंत्री सिर्फ़ रुतबा दिखाने के लिए लाल बत्ती और कमांडो का इस्तेमाल करे तो यह खटकता है लेकिन यदि किसी की भावना जनसेवा की हो और वह ज़रूरी सेवाएं ले तो जनता को अच्छा ही लगेगा. लाल बहादुर शास्त्री और गाँधी जी भी जनता के बीच में रहते थे. उनसे किसी को दिक्क़त नहीं हुई."

एक और यात्री ने कहा, "पद मिलने के बाद मंत्री इंसान को इंसान नहीं समझते थे. लेकिन आम आदमी पार्टी ने इंसान की अहमियत बढ़ा दी है. अब लगने लगा है कि मंत्री या मुख्यमंत्री भी हम जैसे ही इंसान हैं. उन्हें मेट्रो, बस, ऑटो में चलकर ही तो अहसास होगा कि हम रोज़ाना किस परिस्थिति से गुज़रते हैं.

राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर एक व्यक्ति ने शिकायती लहजे में कहा, "लोगों की परेशानियाँ भी देखिए, आपके धरने के कारण हम वक़्त पर दफ़्तर नहीं पहुँच पाए." सोमनाथ ने हँसकर कहा, "जी ये सब आपके लिए ही किया जा रहा है."

इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से सचिवालय जाने के लिए ऑटो वाले ने मना कर दिया. गुज़ारिश करने पर बैठा तो लिया लेकिन सचिवालय के बजाए आईटीओ मोड़ पर लगी बेरीकैडिंग पर ही छोड़ दिया.

सचिवालय पहुँचते ही सोमनाथ पार्टी की बैठक में चले गए और मैं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की निजी सहायक के कक्ष में बैठ गया. अन्ना आंदोलन के स्वयंसेवक दफ़्तर का कार्यभार संभाले नज़र आए.

दिल्ली पुलिस को लेकर हुए अरविंद केजरीवाल के धरने के बाद बीते दस दिनों में भी सोमनाथ भारती ने अपने नाम के साथ कुछ और विवाद जोड़ लिए हैं. विपक्षी नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों के इस्तेमाल के साथ-साथ उन्होंने मीडिया पर भी सवाल किए हैं. हालाँकि इसके लिए वे माफ़ी भी माँग चुके हैं.

आम आदमी पार्टी की सरकार को अभी एक महीने का ही वक़्त हुआ है. सरकार को कामयाब या नाकामयाब कहने के लिए यह बहुत कम समय है लेकिन इस दौरान पार्टी ने सबसे ज़्यादा ज़ोर जनता के बीच रहने पर ही दिया है.

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