कांग्रेस और नेशनल कांफ़्रेंस के बीच दरार?

  • 30 जनवरी 2014
भारत प्रशासित जम्मू और कश्मीर के मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला इमेज कॉपीरइट AFP

जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पार्टी के बीच पांच वर्ष पुराना गठजोड़ टूटने के कगार पर बताया जा रहा है.

इसकी वजह राज्य सरकार का वो प्रस्ताव है जिसके तहत राज्य में नई प्रशासनिक इकाइयों का निर्माण किया जाना है. कांग्रेस इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है. इस कारण दोनों पार्टियों में ठन गई है.

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह इस प्रस्ताव को मंज़ूर कराने पर अड़े हुए हैं.

कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस इस प्रस्ताव का विरोध जारी रखती है तो वह कांग्रेस से गठजोड़ ख़त्म भी कर सकते हैं.

उनके राजनीतिक सलाहकार सादिक़ तनवीर कहते हैं कि इस सिलसिले में राज्य सरकार की कैबिनेट एक फरवरी को बैठेगी. इस बैठक के बाद पार्टी फैसला सुनाएगी.

मगर सादिक़ तनवीर इस बात से इनकार करते हैं कि सहयोगी दल अलग हो रहे हैं.

सरकार गिरने का ख़तरा

सादिक तनवीर कहते हैं, "हम इस योजना को लागू करना चाहते हैं. जहाँ तक हमारा दृष्टिकोण है हम कोई विवाद नहीं चाहते. ये प्रस्ताव लोगों के अनुकूल है. इसीलिए हम केवल इतना चाहते हैं कि हमारी योजना स्वीकार की जाए."

इस मसले पर दोनों पार्टियों के बीच कुछ बैठकें भी हुई हैं ताकि इस विवाद को जल्द दूर किया जाए.

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खबर ये है कि उमर अब्दुल्लाह अपने रुख़ पर अड़े हुए हैं और अगर इस मुद्दे पर सरकार गिरा भी दी जाए तो वह इसके लिए भी तैयार हैं.

गठबंधन टूटने के ख़तरे की ख़बर पर सादिक़ तनवीर ने दावा किया कि ये अफ़वाह है.

पिछले विधान सभा चुनाव में 28 सीटों के साथ नेशनल कांफ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी और सरकार बनाने के लिए इसके साथ कांग्रेस भी शामिल हुई थी.

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