'मुआवज़ा भी लिया और पुलिस भी बुलाई'

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Image caption 18 वर्षीय नीडो तनियम की गुरूवार को उनके घर में मौत हो गई थी.

अरुणाचल प्रदेश के नीडो तनियम की नई दिल्ली में दुकानदारों के साथ कथित झड़प के बाद मौत की ख़बर से उनके दोस्त और परिजन सदमे में हैं.

दिल्ली में मौजूद पूर्वोत्तर राज्यों के लोग 'नीडो के लिए इंसाफ़ की मांग' के साथ सड़कों पर आ चुके हैं जबकि तनियम के पिता नीडो पवित्रा और उनकी पत्नी की तबियत बेटे की मौत की ख़बर के बाद से ही ख़राब है.

दिल्ली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दिल्ली की सरकार ने भी मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं. दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी पी करुणाकरन ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "इस मामले में दफ़ा 302 के तहत एफ़आईआर लिख ली गई है. पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है."

नीडो की मौत से उनके बचपन के सबसे ख़ास दोस्त लोकम लूलू को काफ़ी धक्का पहुंचा है. वो इस मामले के चश्मदीद भी होने का दावा करते हैं.

लूलू के अनुसार बुधवार को जब तनियम और वो अपने घरों से लाजपत नगर बाज़ार की तरफ़ गए थे तो शायद उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि अगले कुछ घंटों में उनके साथ क्या होने वाला है.

'शांत प्रवृति का लड़का था नीडो'

बीबीसी के साथ बातचीत करते हुए लूलू कई बार भावुक हुए और कहते रहे, “नीडो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था और वो अब नहीं रहा... वो हमेशा मेरा सबसे अच्छा दोस्त रहेगा.”

लूलू कहते हैं, “नीडो को मैं बचपन से जानता था, वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था. शुरू से ही वो काफ़ी शांत था. अब वो चला गया है, मैं उसके बारे में क्या कह सकता हूं.”

उनके मुताबिक़ 18 वर्षीय नीडो तनियम जालंधर के एक निजी कॉलेज में बीए-सोशल के प्रथम वर्ष के छात्र थे और वो दिल्ली में छुट्टियों पर अपनी दीदी के घर घूमने आए थे.

लूलू का कहना है कि बुधवार को नीडो, वो ख़ुद और दो अन्य दोस्त लाजपत नगर में किसी दोस्त से मिलने के लिए गए थे.

लूलू के अनुसार, निडो एक दुकान पर पता पूछने के लिए रूके और इसी दौरान वहां खड़े लोगों ने उनके रंगे हुए बालों का मज़ाक़ उड़ाया, जिसका निडो और साथियों ने विरोध किया.

क्या हुआ था उस दिन?

उस दिन को याद करते हुए लूलू बताते हैं, “नीडो ने दुकान पर खड़े लोगों से कहा कि वो मज़ाक न उड़ाए और पता बताकर उसकी मदद करें. इसी बीच बातचीत बहस में बदल गई और नीडो ने दुकान के काउंटर का शीशा घूंसा मारकर तोड़ दिया.”

लूलू आगे बताते हैं, “शीशा टूटते ही दुकान के पांच-छह लोगों ने हम पर हमला कर दिया. हम दोनों को चोटें लगीं लेकिन नीडो को ज़्यादा मारा गया. हमसे क़रीब दस हज़ार रुपए मुआवज़ा भी लिया गया. इसके बाद पुलिस बुलाई गई और वो नीडो को लेकर चले गए. मुझे घर जाने को कहा गया.”

लोकस लूलू के अनुसार थोड़ी देर बाद उन्हें फ़ोन करके नीडो को ले जाने के लिए लाजपत नगर थाने बुलाया गया.

लूलू कहते हैं, “मैं और नीडो दिल्ली के ग्रीन पार्क में उसकी दीदी के घर चले गए. वो असहज महसूस कर रहा था और हम लोग रातभर जागते-सोते रहे. सुबह काफ़ी देर तक नीडो नहीं उठा तब हमें पता चला कि उसकी मौत हो गई है.”

पुलिस ने दर्ज किया मामला

नीडो तनियम की मौत के बाद पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली है और मामले की छानबीन कर रही है. दिल्ली सरकार ने भी इस मामले में मजिस्ट्रेट से जांच कराने के आदेश दिए हैं.

शुक्रवार को जारी की गई शुरूआती पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट में नीडो की मौत का कोई सीधा कारण नहीं मिल पाया था, लेकिन उनका विसरा सुरक्षित रख लिया गया. सूत्रों के अनुसार सोमवार को नीडो की विस्तृत पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट जारी की जा सकती है.

पूर्वोत्तर राज्यों के लोग शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर उतरे और लाजपत नगर के उसी बाज़ार में पैदल विरोध मार्च किया जिसमें वो कथित जानलेवा झड़प हुई थी.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने भी शुक्रवार रात दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी पी करुणाकरण की गाड़ी रोककर अपना विरोध जताया.

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