बंगाल में चार लोग 'ज़िंदा जलाए गए'

  • 2 फरवरी 2014
पशुओं की तस्करी इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption इस मामले को पशुओं की तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले में पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बांग्लादेश की सीमा के पास एक गांव में गांववालों ने चार लोगों के हाथ-पैर बांध कर उन्हें जिंदा जला दिया.

जलपाईगुड़ी ज़िले के पुलिस अधीक्षक कुणाल अग्रवाल ने बताया, "इस मामले में अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. चारों लोगों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है."

पुलिस ने बताया कि यह घटना रविवार को तड़के तीन से चार बजे के बीच हुई.

इससे पहले जलपाईगुड़ी से सटे इलाके के सबसे बड़े शहर सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त जगमोहन ने कहा, "हो सकता है ये मौतें पशु तस्करों के दो गिरोहों की आपसी भिड़ंत का नतीजा हो. पूरी जांच के बाद ही हकीकत सामने आएगी."

लोगों को संदेह था कि यह चारों लोग गांव में पशुओं को चुराने आए हैं. सीमावर्ती इलाके में पशुओं की तस्करी एक गंभीर समस्या है.

समय-समय पर भारी तादाद में पशुओं को चुरा कर सीमा पार भेजने के मामले सामने आते रहते हैं. आमबाड़ी के जिस बलरामपुर गांव में यह वारदात हुई, वहां भी पशुओं की चोरी के मामले बढ़ रहे हैं. गांव वालों ने पुलिस से कई बार इसकी शिकायत की थी.

गांव वाले फरार

पुलिस ने बताया कि एक गांव वाले ने जब चारों लोगों को संदिग्ध हालत में गांव में घूमते देखा तो उसको लगा कि यह पशु चोरों का गिरोह है और पशुओं को चुराने के लिए गांव में घूम रहा है. उसने बाकी गांव वालों को जगाया और चारों लोगों को घेर कर पकड़ लिया गया.

बतााया जाता है कि पहले उनकी बुरी तरह पिटाई की गई और फिर हाथ-पैर बांध कर उनके शरीर में आग लगा दी गई. बुरी तरह जलने की वजह से उन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

सुबह मामले की जानकारी मिलने पर कुछ अधिकारियों के साथ पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी मौके पर भेज दी गई है.

पुलिस का कहना है कि चारों लोगों के शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी शिनाख्त संभव नहीं है. इस घटना के बाद गिरफ्तारी के डर से गांव के ज्यादातर लोग फरार हो गए हैं.

पश्चिम बंगाल से लगी बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में पशुओं की तस्करी के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं. इस धंधे में सक्रिय लोग कभी खरीद कर तो कभी चुरा कर पशुओं को सीमा पार करा देते हैं.

बांग्लादेश में इन पशुओं की तीन से चार गुनी कीमत मिल जाती है. सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का काम पूरा नहीं होने की वजह से इन तस्करों को अपने काम में काफ़ी सहूलियत होती है.

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