राजीव हत्याकांड: केंद्र फाँसी की सज़ा कम करने के विरोध में

भारती की सुप्रीम कोर्ट इमेज कॉपीरइट Reuters

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों की सज़ा कम करने संबंधी याचिका पर फ़ैसला मंगलवार को सुरक्षित रख लिया.

राजीव गाँधी की हत्या के दोषियों ने इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है कि राष्ट्रपति के पास लंबित उनकी दया याचिका पर 11 साल से कोई फ़ैसला नहीं हो पाया है, इसलिए उनकी मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया जाए.

केंद्र सरकार ने इस याचिका का ये कहते हुए विरोध किया है कि दया याचिका लंबित रहने के दौरान इन दोषियों को किसी तरह की प्रताड़ना या अमानवीय बर्ताव का सामना नहीं करना पड़ा

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका मुरुगन, सांथन और पेरारिवलन ने दायर की है. इन लोगों ने अपनी दया याचिकाओं पर फ़ैसला न होने को संविधान की धारा-21 के तहत मिले जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है.

स्पष्टीकरण

अटॉर्नी जनरल जी वाहनवती ने कहा कि 11 साल की देरी के दौरान एनडीए की सरकार ने चार साल तक इस मसले में कोई फ़ैसला नहीं किया और फ़ाइल राष्ट्रपति को नहीं भेजी.

केंद्र ने कहा कि यूपीए सरकार ने दया याचिका राष्ट्रपति को 2005 में भेजी थी मगर नए गृह मंत्री ने 2011 में फ़ाइल वापस ले ली. कुछ ही समय में गृह मंत्री ने नई सिफ़ारिशें राष्ट्रपति को भेज दीं.

राजीव गांधी की हत्या के आरोप में फांसी की सज़ा पाने वालों ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 21 जनवरी के उस फैसले के बाद दायर की जिसमें सर्वोच्च अदालत ने दया याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी के आधार पर 15 दोषियों की मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदलने का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों को राहत मिली थी. अदालत का कहना था कि याचिकाओं के निपटारे में हुई लंबी देरी उन्हें राहत दिए जाने का पर्याप्त आधार है.

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