चुनाव से पहले फिर खड़ा होगा तीसरा मोर्चा?

आम चुनाव के नज़दीक आते आते राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है. कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के आमने सामने की लड़ाई को अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने तिकोना रूप दे दिया है.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस चुनाव में तीसरा मोर्चा जैसा कोई धड़ा बन पाएगा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और जयललिता के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के बीच समझौते ने तीसरे मोर्चे की संभावना को बढ़ाया है.

बुधवार को नई दिल्ली में 11 ग़ैर-कांग्रेसी और ग़ैर-भाजपाई राजनीतिक दलों के लोकसभा और राज्यसभा के नेताओं की बैठक हो रही है, जिसमें तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को अंतिम रूप दिया जा सकता है.

इस बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी, अन्नाद्रमुक, बीजू जनता दल, जनता दल (सेक्युलर), झारखंड विकास मोर्चा, फ़ॉरवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और असम गण परिषद के नेता शामिल हो रहे हैं.

बैठक में तीन ऐसी पार्टियां भी शामिल होंगी जिनके प्रतिनिधि न तो राज्यसभा में है न ही लोकसभा में.

दूसरे चरण की बैठक

इस बैठक में फ़ौरी तौर पर केंद्र सरकार के उन फ़ैसलों का विरोध किया जाएगा जो चुनाव से ठीक पहले जनता को लुभाने के लिए किए जा रहे हैं.

लेकिन इस बैठक का सबसे अहम उद्देश्य तीसरे मोर्चे की संभावना को तलाशना और उस दिशा में सहमति बनाना होगा.

बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद नौ फ़रवरी को दिल्ली में इन राजनीतिक दलों की दूसरे चरण की बैठक होगी जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, बीजू जनता दल के नवीन पटनायक, जनता दल सेक्यूलर के एचडी देवगौड़ा और वामपंथी दलों के प्रमुख नेता भी शामिल होंगे.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस को भी संभावित मोर्चे में शामिल करने के पक्ष में बताए जा रहे हैं.

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