उत्पादों का पेटेंट: पांच आसान क़दम

  • 10 फरवरी 2014
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अगर आप इंजीनियर या वैज्ञानिक हैं, या अपने नए बिज़नेस आइडिया पर काम कर रहे हैं, तो अपने उत्पादों और सेवाओं की सुरक्षा को लेकर आपके मन में सवाल उठना लाज़मी है.

बिज़नेस या आइडिया कॉपी किए जाने का डर भी वाजिब होता है.

ऐसे में पेटेंट एक अच्छा उपाय हो सकता है. इसे लेकर आपके मन में कई सवाल भी हो सकते हैं, जैसे कि क्या आपके उत्पाद का पेटेंट हो सकता है कि नहीं या आप ख़ुद किसी उत्पाद का पेटेंट करा सकते हैं या नहीं?

सबसे पहले तो ये समझने की ज़रूरत है कि पेटेंट एक अधिकार है जो उस व्यक्ति या संस्था को किसी बिल्कुल नई सेवा, प्रक्रिया, उत्पाद या डिज़ाइन के लिए प्रदान की जा सकती है ताकि कोई उनकी नक़ल नहीं तैयार कर सके.

पेटेंट की अवधि 20 साल तक के लिए होती है और हर देश के लिए अलग से प्रविष्टि देनी होती है. जैसे कि भारत में पेटेंट रजिस्ट्रेशन होने पर उसका दायरा भारत भर में होगा. लेकिन अगर अमरीका या किसी और देश में कोई व्यक्ति भारत में पेटेंट किए उत्पाद या सेवा की नकल बनाएगा तो उसे उलंघन नहीं माना जाता.

प्रत्येक देश में पेटेंट के लिए अलग से आवेदन करना होता है. इसलिए ये ज़रूरी है कि आवेदक ये जांच लें कि उनका उत्पाद को किन देशों में प्रयोग किया जा सकता है ताकि उन्ही देशों में आवेदन किए जाए.

पेटेंट की प्रक्रिया को आसानी से समझने के लिए और सुविधाजनक तरीक़े से इसकी तैयारी के लिए पेश हैं पांच आसान क़दम जिनके ज़रिए पेटेंट का सफलतापूर्वक आवेदन किया जा सकता है:

1. व्यक्तिगत तौर पर मार्केट रिसर्च करें

अगर आप अपने किसी उत्पाद, सेवा, प्रक्रिया या नई टेक्नोलॉजी को प्रतिद्वंद्विंयों द्वारा कॉपी किए जाने से बचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपनी खोज के व्यापारिक पहलुओं की जांच करनी चाहिए.

पेटेंट की प्रक्रिया खर्चीली होती है, इसलिए ज़रूरी है कि आप ये पहले से पता कर लें कि जिस उत्पाद का आप पेटेंट कराना चाहते हैं उसकी बाज़ार में मांग है या नहीं.

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अगर आवेदन करने वाले या बिज़नेस रिसर्च कंपनी को लगता है कि पेटेंट के लिए चुने गए उत्पाद या सेवा की बाज़ार में मांग हो सकती है, तो आवेदक को ‘डिस्क्लोज़र डॉक्यूमेंट’ तैयार करना चाहिए.

डिस्क्लोज़र डॉक्यूमेंट में जिस तरह की जानकारी देनी होती है वो इस प्रकार से है:

- आविष्कार किस तरह की उत्पाद श्रेणी में आता है?

- जिस क्षेत्र का आविष्कार है उस क्षेत्र की संक्षिप्त जानकारी, समस्याएं और वो खास बिंदु जो नए उत्पाद या आविष्कार से प्रभावित होंगे.

- उपरोक्त क्षेत्र में मौजूद समस्याओं के हल के लिए किस तरह के तकनीक उपलब्ध है.

- नए आविष्कार के फ़ायदे, इत्यादि.

पेटेंट के आवेदन से पहले आविष्कार के बारे में जानकारियां सार्वजनिक करने में सतर्कता बरतनी चाहिए.

2. ऑनलाइन कीजिए पूरी दुनिया में पेटेंट सर्च

पेटेंट का आवेदन करने से पहले किसी पेटेंट विशेषज्ञ से अपने उत्पाद या सेवा का मूल्यांकन करवा लेना अच्छा होता है. ऐसा करने से इस बात का पता चल जाता है कि उत्पाद या सेवा पेटेंट नियमों की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं.

पेटेंट आवेदक के वकील दुनिया के अलग-अलग पेटेंट डेटाबेस में सर्च करके ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि आवेदक के उत्पाद जैसी किसी वस्तु या सेवा को दुनिया के किसी हिस्से में पेटेंट हासिल है या नहीं.

किसी वकील या लीगल फ़र्म को अपने आइडिया या आविष्कार के बारे में बताने से पहले “नॉन डिसक्लोज़र” समझौते पर दस्तख़त ज़रूर करवा लेना चाहिए.

3. अस्थायी (प्रोविज़नल) पेटेंट के लिए आवेदन

भारतीय पेटेंट क़ानून ‘पहले आने वाले को पहले अधिकार’ की नीति पर आधारित है. अस्थायी पेटेंट का आवेदन आविष्कार या आइडिया के प्रारंभिक दौर में किया जाता है, ताकि जब वो उत्पाद तैयार हो जाए तो पेटेंट का सबसे पहले अधिकार अस्थायी पेटेंट लेनेवाले को मिले.

अस्थायी पेटेंट के आवेदन के 12 महीनों के भीतर आविष्कार के बारे में पूरी जानकारी फ़ाइल करनी होती है.

4. स्थाई पेटेंट के लिए आवेदन

स्थाई या पूर्ण पेटेंट ब्यौरे में कई सेकशन होते हैं. हालांकि पेटेंट की सीमाएं, पेटेंट के दावे पर निर्धारित होता है. इसलिए पेटेंट आवेदन में किए गए दावों की शब्दावली पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.

कई लोग पेटेंट आवेदन में दावे लिखने की जगह आविष्कार या सेवा के फ़ायदें लिखते हैं, ऐसा करने से हर हाल में बचना चाहिए. फ़ायदों के बारे में अलग से दिए गए जगह पर लिख सकते हैं.

5. पेटेंट की तिथियों का पालन कीजिए

पेटेंट के आवेदन के 18 महीने बाद ही उसे पब्लिश किया जाता है. अगर आप चाहते हैं कि पेटेंट प्रक्रिया शीघ्र की जाए तो इसके लिए अलग से आवेदन किया जा सकता है और पेटेंट आवेदन फ़ाइल किए जाने के एक महीने के भीतर इसे पब्लिश कर दिया जाता है.

पेटेंट आवेदन के बाद इस पर स्वत: कार्रवाई नहीं होती, इसके लिए आवेदक को जांच करवाने के लिए अलग से आवेदन करनी होती है. अगर आवेदन में किसी तरह की जानकारी की कमी हो तो उसकी मांग की जाती है और सभी शंकाओं के निपटारे के बाद पेटेंट जर्नल में उसे छपने के लिए भेजा जाता है. इसके बाद ही आगे की कार्यवाही होती है और पेटेंट जारी किया जाता है. आम तौर पर किसी पेटेंट को जारी करने में तीन से चार साल का समय लग जाता है.

(पेटेंट संबंधी और भी जानकारियां इस वेबसाइट पर: www.ipindia.nic.in)

(लेखिका पेटेंट कानून के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी टेक-कॉर्प लीगल से जुड़ी हैं. बीबीसी संवाददाता तुषार बनर्जी से बातचीत पर आधारित)

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