आईपीएल स्पॉट फ़िक्सिंग: मुदगल समिति रिपोर्ट

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इंडियन प्रीमियर लीग(आईपीएल) में स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट की समिति ने स्पष्ट किया है कि बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मेय्यपन ने आईपीएल के ऑपरेशनल, भ्रष्टाचार संबंधी और टीम अधिकारियों की आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन किया है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चेन्नई सुपरकिंग्स के टीम अधिकारी के रूप में गुरुनाथ मेय्यपन की भूमिका साबित हुई है. साथ ही उन पर सट्टेबाज़ी और सूचना देने के आरोप भी सही पाए गए हैं. हालांकि फ]fक्सिंग के आरोपों की और जाँच करने की ज़रूरत है.

समिति का मानना है कि उपलब्ध साक्ष्यों से साफ़ संकेत मिले हैं कि मेय्यपन चेन्नई सुपरकिंग्स का चेहरा थे और टीम अधिकारी थे. हालाँकि, उनके वॉयस सैंपल (आवाज़ के नमूने) औपचारिक तौर पर कोई फ़ॉरेंसिक टेस्ट नहीं हुए हैं लेकिन समिति का कहना है कि वह ये मान के चल रही है कि दिल्ली, चेन्नई और मुंबई पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट और फ़ोन रिकॉर्डिंग में मेय्यपन की ही आवाज़ है.

समिति का मानना है कि स्पॉट और मैच फ़िक्सिंग की समस्या से निपटने के लिए सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरभ गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, वेंकटेश प्रसाद और अनिल कुंबले जैसे खिलाड़ियों को नए खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करना चाहिए. समिति को लगता है कि यह बेहद कारगर क़दम होगा.

विंदू दारा सिंह के ज़रिए सट्टेबाज़ी

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Image caption मेयप्पन, विंदू दारा सिंह के माध्यम से सट्टेबाज़ी करते थे.

समिति के मुताबिक़ दिल्ली और चेन्नई पुलिस की सूचना तथा मुंबई पुलिस की एफ़आईआर और आरोप पत्र से स्पष्ट है कि मेयप्पन विंदू दारा सिंह के माध्यम से सट्टेबाज़ी करते थे. विंदू दारा सिंह, विक्रम अग्रवाल जैसे सटोरियों के सीधे संपर्क में थे.

मेय्यपन न केवल अपनी टीम की जीत पर सट्टा लगाते थे बल्कि उसकी हार पर भी सट्टा लगाते थे. समिति ने जाँच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है.

मेय्यपन के मैच फ़िक्संग और स्पॉट फ़िक्सिंग में संलिप्तता के बारे में आईसीसी-एसीएसयू, बीसीसीआई की एसीयू और चेन्नई पुलिस की सीबी-सीआईडी ने गहन जाँच नहीं की है जबकि इस तरह की जाँच के लिए सूचना उपलब्ध थी.

राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा के ख़िलाफ़ सट्टेबाज़ी और स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोपों की और जाँच की ज़रूरत है.

‘राजकुंद्रा और शिल्पा की भूमिका’

उमेश गोयनका के मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान के मुताबिक़ कुंद्रा उनके माध्यम से सट्टा लगाते थे. गोयनका ने कहा कि जब भी वह कुंद्रा से किसी टीम या मैच के बारे में कुछ पूछते थे तो वह उन्हें सीधे खिलाड़ियों से बात करने के लिए कहते थे.

कुंद्रा जानते थे कि गोयनका की कुछ खिलाड़ियों से दोस्ती है. सिद्धार्थ त्रिवेदी के अदालत में दर्ज कराए गए बयान से इसकी पुष्टि होती है. त्रिवेदी के मुताबिक़ गोयनका उनसे पिच की परिस्थितियों और खिलाड़ियों के बारे में पूछते थे.

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Image caption राज कुंद्रा का नाम भी सट्टा लगाने वालों में शामिल है.

समिति का मानना है कि गोयनका के बयान के आधार पर इस मामले की गहराई से जाँच होनी चाहिए क्योंकि राज कुंद्रा और उनकी पत्नी शिल्पा शेट्टी राजस्थान रॉयल्स के मालिकों में शामिल हैं.

खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ मैच फ़िक्सिंग और स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोपों के बारे में समिति का मानना है कि ये अभी महज़ आरोप हैं और जाँच पूरी होने तक किसी को बदनाम करना ठीक नहीं है. ऐसे लोगों के नाम और उनके ख़िलाफ़ आरोपों को अलग से सीलबंद लिफ़ाफ़े में दिया जा रहा है क्योंकि इस सूचना की प्रकृति संवेदनशील है.

बीसीसीआई के बाहर के कई लोगों ने समिति के सामने यह मुद्दा उठाया था कि एन श्रीनिवासन बीसीसीआई का अध्यक्ष होने के साथ ही चेन्नई सुपरकिंग्स का मालिकाना हक़ रखने वाली कंपनी इंडिया सीमेंट के सीईओ भी हैं और यह हितों के टकराव का मामला है.

समिति को लगता है कि यह एक गंभीर मसला है और इसका क्रिकेट के कामकाज पर गहरा असर हो सकता है.

लेकिन समिति को लगता है कि उसे इस मुद्दे पर अपनी राय नहीं रखनी चाहिए क्योंकि यह उसके कार्यक्षेत्र से बाहर का मामला है. चूंकि कई लोगों ने इस मुद्दे पर ज़ोर दिया है इसलिए समिति ने सोचा कि इसे न्यायालय के ध्यान में लाना चाहिए.

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