नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगी अमरीकी राजदूत

  • 11 फरवरी 2014
नरेंद्र मोदी इमेज कॉपीरइट PTI

भारत में अमरीका की राजदूत नैंसी पॉवेल भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगी. अमरीका लंबे समय से नरेंद्र मोदी को वीज़ा देने से मना करता रहा है.

वॉशिंगटन में विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की और कहा कि मुलाक़ात के लिए समय तय किया जा रहा है.

अधिकारी ने कहा, "यह अमरीका-भारत के रिश्तों को लेकर वरिष्ठ राजनेताओं और कारोबारियों से मिलने की हमारी मुहिम का हिस्सा है जो पिछले साल नवंबर में शुरू हुआ था."

अमरीकी प्रशासन ने साल 2005 में नरेंद्र मोदी के वीज़ा का आवेदन रद्द कर दिया था. पिछले साल अमरीकी विश्वविद्यालय में भाषण देने जाने के लिए उन्हें वीज़ा देने से मना कर दिया था.

अमरीका के अलावा मोदी को लेकर यूरोपीय संघ का रुख़ भी कड़ा रहा था. हालांकि उनके रुख़ में हाल में लचीलापन आया है और ब्रितानी और यूरोप के दूसरे राजनयिकों ने गुजरात के मुख्यमंत्री से मेलजोल बढ़ाया है.

आरोप

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि मोदी ने गुजरात में साल 2002 के हुए दंगों में उदासीन रवैया अपनाया था.

मोदी ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहते रहे हैं कि जाँच में भी उनके ख़िलाफ़ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है.

शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद से भारत और अमरीका के रिश्ते लगातार मज़बूत हो रहे हैं और इसे अधिकांश अमरीकी सांसदों का समर्थन हासिल है.

लेकिन कुछ अमरीकी मानवधिकार संस्थाएं और सांसद नरेंद्र मोदी के साथ नज़दीकियों के ख़िलाफ़ हैं.

जानकारों का मानना है कि पॉवेल की मोदी के साथ मुलाक़ात से यह संदेश जाएगा कि अमरीका उन्हें वीज़ा जारी करने को तैयार है.

ब्रिटेन का रुख़

पिछले साल भारत की यात्रा पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी कहा था कि वे भविष्य में ज़रूर मोदी से मिलना चाहेंगे.

कैमरन ने कहा था, ''हमने गुजरात सरकार और गुजरात के मुख्यमंत्री के साथ संबंध शुरू किए हैं. हमारे विदेश मंत्री ने उनसे मुलाक़ात की है. हमारे बीच में संपर्क हैं, संबंध हैं. मुझे लगता है कि यह संबंध जारी रहने चाहिए.''

जब कैमरन से पूछा गया था कि क्या वे मोदी से मुलाक़ात करेंगे तो उन्होंने कहा था, "भविष्य में ज़रूर, मिलना अच्छा होता है. हम सभी राजनेताओं और नेताओं से मिलना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "आख़िर ये भारत के लोगों को तय करना है कि वे किसे चुनते हैं. मैं किसी भी चुने हुए नेता से मिलने के लिए तैयार हूँ."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार