रायपुरः दो साल की बच्ची को 'कुत्तों ने मार डाला'

  • 14 फरवरी 2014
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Image caption मारी गई बच्ची के माता-पिता मज़दूर हैं और वह उनके साथ एक निर्माणाधीन इमारत में रह रही थी. (फ़ाइल फ़ोटो)

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दो साल की एक बच्ची को कथित तौर पर कुत्तों ने मार डाला.

बच्ची के माता-पिता मज़दूरी करते हैं और अपना घर नहीं होने के कारण वे एक अर्द्धनिर्मित दुकान में रह रहे थे.

दिल दहला देने वाली इस घटना के बाद फिर से राज्य भर में बेघर लोगों की बढ़ती आबादी को लेकर सवाल शुरू हो गए हैं.

रायपुर के आईजी जीपी सिंह ने घटना पर दुख जताया है.

पुलिस के अनुसार, ''देवेंद्र नगर इलाक़े में एक मॉल के पीछे निर्माणाधीन कॉम्पलेक्स की दुकान में राजमिस्त्री राजेश विश्वकर्मा अपने परिवार के साथ रह रहे थे.''

मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह ज़िले कबीरधाम के देवसरा गांव के राजेश सात महीने पहले ही अपने परिवार के साथ गुजरात से लौटे थे.

मजदूर हैं मां-बाप

राजेश और उसकी पत्नी रेशमा, दोनों मज़दूरी करते हैं. राजेश रात में कॉंम्पलेक्स की चौकीदारी का भी काम करते हैं.

बुधवार की रात राजेश की पत्नी रेशमा अपनी दो साल की बेटी राजनंदिनी और चार महीने की छोटी बेटी के साथ सोई थीं.

रेशमा ने कहा, “रात दो-ढाई बजे के क़रीब जब मेरी नींद खुली तो राजनंदिनी बिस्तर पर नहीं थी. मैंने कमरे से बाहर निकल कर देखा, वहां भी वह नहीं थी. इसके बाद मैंने तुरंत अपने पति को बताया.”

साथी मज़दूरों के साथ घंटों तलाश करने के बाद राजेश ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

सुबह सात बजे के आसपास राह चलते लोगों ने राजेश को एक बच्ची के शव के बारे में ख़बर दी. कॉंम्पलेक्स से यह जगह डेढ़ सौ मीटर दूर है.

बेघरों की समस्या

पोस्टमार्टम की आरंभिक रिपोर्ट में कुत्तों के काटने की बात सामने आई है.

पुलिस का अनुमान है कि बच्ची को या तो कुत्ते कमरे के भीतर घुस कर उठा कर ले गए या नींद में बच्ची ख़ुद उठ कर कमरे से बाहर आ गई होगी.

सामाजिक कार्यकर्ता गौतम बंदोपाध्याय इस पूरी घटना को बेघर लोगों की समस्या से जोड़ते हैं.

उनका कहना है कि देश के जिन सात राज्यों में सर्वाधिक बेघर लोग हैं, उनमें छत्तीसगढ़ भी एक है. पिछले एक दशक में देश भर में शहरी बेघर लोगों की संख्या में 21 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.

गौतम कहते हैं, “अगर इस परिवार के पास घर होता और घर में दरवाज़ा होता तो ऐसी घटना नहीं होती."

"इस घटना ने राज्य और केंद्र सरकार के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें हरेक परिवार के सर पर छत होने की बात कही जाती है. यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का भी खुला उल्लंघन है.”

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