राजगोपालः आमरण अनशन से हो गए थे लापता

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संसद में पेपर स्प्रे छिड़कने वाले कांग्रेस के सांसद एल राजगोपाल अलग तेलंगाना राज्य बनाए जाने के विरोधी शुरू से ही रहे हैं.

वह 2009 में पृथक तेलंगाना राज्य बनाए जाने के विरोध में आमरण अनशन कर चुके हैं.

अनशन के दौरान उन्हें विजयवाड़ा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह वहां से अचानक लापता हो गए थे.

क़रीब 14 घंटे बाद वह हैदराबाद में पाए गए. वह हैदराबाद में बस से पहुंचे थे.

जब गुरुवार को संसद में तेलंगाना विधेयक पेश किया जा रहा था तभी इसके विरोध में हंगामा शुरू हो गया और उसी दौरान राजगोपाल ने पेपर स्प्रे छिड़क दिया.

हालांकि आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के सांसद का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में पेपर स्प्रे किया था.

नाटकीय ढंग से 'लापता' सांसद मिले

कई समितियों के सदस्य

लोकसभा वेबसाइट के अनुसार, राजगोपाल का जन्म आंध्र के नेल्लूर में 16 फ़रवरी 1964 को हुआ था.

उन्होंने विजयवाड़ा के ही एक इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल में बीटेक किया है.

2004 में वह 14वीं लोकसभा के चुन कर आए और इस कार्यकाल के दौरान कई समितियों के सदस्य भी रहे.

2009 में 15वीं लोकसभा के लिए वह दोबारा चुन कर आए और इस दौरान घरेलू और विदेश संबंधी कई समितियों के सदस्य रहे.

लोकसभा वेबसाइट पर दिए गए उनके परिचय के अनुसार, अशक्त लोगों की मदद के लिए स्थापित लांको फ़ाउंडेशन के वह चेयरमैन हैं.

उन्होंने कृष्णा ज़िले में आग और सूखे से प्रभावित लोगों की मदद और ग़रीब प्रतिभावान बच्चों को छात्रवृत्ति देने के लिए राजगोपाल फ़ाउंडेशन की भी स्थापना की.

इसके अलावा कई सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में उनकी भूमिका का ज़िक्र है.

उनके परिचय में दावा किया गया है कि वह 5,000 किमी तक की यात्रा कर चुके हैं और विजयवाड़ा के लगभग सभी घरों तक दो-दो बार पहुंच चुके हैं.

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