मेधा पाटकर: सड़क से उठकर संसद का रुख़!

  • 17 फरवरी 2014
इमेज कॉपीरइट PTI

आम आदमी पार्टी ने आगामी लोक सभा चुनाव के लिए 20 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की है. इस उम्मीदवारों में मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर का नाम भी शामिल है.

मेधा पाटकर उत्तर पूर्व मुंबई सीट से आप के लिए चुनाव लड़ेंगी.

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी मेधा पाटकर का नाम सामाजिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है. वे पहली बार सक्रिय राजनीति में उतरेंगी.

मेधा पाटकर का सक्रिय राजनीति में आने का क्या मकसद है? अरविंद केजरीवाल के इस्तीफ़े के बाद आलोचना का शिकार हो रही 'आप' पर मेधा के भरोसा करने की क्या वजह है? बीबीसी ने मेधा पाटकर से यही जानने की कोशिश की.

मकसद

मेधा पाटकर मानती हैं कि जनांदोलनों की राजनीति करना सक्रिय राजनीति का ही हिस्सा है, बस अंतर ये है कि चुनावी राजनीति में वे अब हिस्सा लेने जा रही हैं.

उन्होंने देश के मौजूदा हालात पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा, "जनता की काफी अवहेलना हो रही है. चाहे वो घर का अधिकार हो, या दाम का आधिकार हो. सक्रिय आंदोलनों के जरिए कानून बनाने में तो हम सफल हुए मगर वे कानून अमल में नहीं लाए जा रहे हैं."

वे कहती हैं, "इन परिस्थितियों में आप ने जनता की अगुवाई की, उनके महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए. क्योंकि देश का राजनीतिक चरित्र बदलना भी जरूरी है. हम ऐसी पार्टी को विफल नहीं होने देंगे."

पाटकर ने कहा, "इसीलिए जनांदोलनों के हमारे अनुभवी साथियों ने आप से जुड़ना और उन्हें समर्थन देना तथा संसद में हस्तक्षेप करना तय किया है."

मेधा पाटकर आप की ओर से उत्तर पूर्वी मुंबई की सीट से उम्मीदवार घोषित की गई हैं. यह सीट उनकी अपनी पसंद थी या पार्टी ने उनसे यहां से चुनाव लड़ने का अनुरोध किया?

उत्तर-पूर्व मुंबई सीट

लोकसभा सीट को चुनने के सवाल पर मेधा ने कहा कि उत्तर-पूर्व मुंबई सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा उन्होंने ही जताई थी.

इमेज कॉपीरइट Reuters

वे कहती हैं, "उत्तर पूर्वी मुंबई के लोगों से हमारा पुराना जुड़ाव है." पाटकर ने बताया कि उन्होंने साल 1976 से 1979 तक उस क्षेत्र में एक हिस्से में 80 हज़ार परिवारों के बीच काम किया. फिर 1979 से 1983 तक गोअंडी में काम किया.

' घर बचाओ, घर बनाओ आंदोलन' से जुड़ी मेधा का कहना है कि इसी क्षेत्र में वे सालों से अपने आंदोलन को लेकर सक्रिय हैं.

वे बताती हैं, "यहां अधिकांश बस्तियां गरीबों की हैं. इसके अलावा यहां मध्यम वर्ग के वैसे लोग भी रहते हैं जो जमीन और घर के मामले में फंसाए गए हैं. हम इस इलाके में दलितों का सवाल, मध्य वर्गीय लोगों के पानी और बिजली के सवाल जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं."

'आप' पर भरोसा

केजरीवाल के इस्तीफ़े पर विश्लेषकों और आलोचकों का कहना है कि राजनीति के पिच पर टिके रहने का माद्दा अरविंद केजरीवाल में कम नजर आता है. ऐसे में मेधा ने आप पर क्यों भरोसा किया?

आप पर भरोसा करने वाली मेधा का कहना है कि हमारी राजनीति में ज़्यादातर वैसे लोग हैं जो सत्ता में टिके रहना चाहते हैं, जरूरी हो तो भी सत्ता को त्यागने वाले लोग कम हैं.

उनका मानना है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने रहते, यदि उनको इस्तीफ़ा देने को मजबूर नहीं किया जाता.

सक्रिय राजनीति

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा, "लोकसभा और विधानसभा में आजकल जो हो रहा है वह जनतंत्र को शर्मसार कर देने वाला है. पहली बार पुलिस पर नियंत्रण और जन लोकपाल कानून पारित करने जैसे दिल्ली की जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दे उठाए गए. यह बहुत जरूरी था."

उन्होंने कहा, "जनलोकपाल बिल आंदोलनों का एक अहम मुद्दा रहा है, आप का और हमारा सबका."

मेधा पाटेकर ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि वे अरविंद केजरीवाल के पार्टी का सहयोग करेंगी और राजनीति में इस तरह से सक्रिय भागीदारी के साथ नहीं आएंगी.

मेधा कहती हैं, "मैंने ये कहा था कि हमारा अगला कदम क्या होगा ये सबके साथ बातचीत के बाद तय होगा. पहले हमने सर्मथन जाहिर किया. फिर चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर की. फिर क्षेत्र तय किया. अंत में ये चुनाव निष्पक्ष या निर्दलीय या पार्टी के साथ लड़ेंगे, ये तय किया."

उन्होंने चुनाव लड़ने का फ़ैसला अपने आंदोलन के कई साथियों और आप के आंदोलनों के कुछ प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करने के बाद लिया.

केजरीवाल का कद

मगर देश और संसद में आए दिन जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं, उसमें आम आदमी पार्टी या मेधा पाटकर जैसे लोग यदि चुन कर आते हैं तो क्या कुछ बदलाव कर पाएंगे?

इमेज कॉपीरइट AP

मेधा पाटकर का मानना है कि देश के हालात बदलने के लिए सत्ता के विकेंद्रीकरण की जरूरत है. देश में, शहरों में जमीन का बंटवारा अन्यायपूर्ण है. इसके अलावा जल-जंगल-ज़मीन जैसे संसाधनों पर जनता का हक़ महत्वपूर्ण है.

देश में आदर्श घोटाले सहित सभी तरह के घोटालों से यदि छुटकारा चाहिए तो केवल कानून ही नहीं कानून बनाने वाली प्रक्रिया भी सही होनी चाहिए.

अरविंद केजरीवाल का कद भारतीय राजनीति में तेजी से बढ़ा है. तो क्या केजरीवाल अपने इस कद का इस्तेमाल मोदी जैसे किसी कद्दावर नेता के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने में करेंगे? इस सवाल को मेधा पाटकर टाल गईं.

(सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर से संदीप सोनी की बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार