नौसैनिक विवादः इटली ने राजदूत वापस बुलाया

  • 18 फरवरी 2014
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दो भारतीय मछुआरों की हत्या के अभियुक्त इतावली नौसैनिकों के मुकदमे की सुनवाई में और देरी होने के विरोध में इटली ने भारत से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

इटली के विदेश मंत्रालय ने रोम में एक बयान जारी कर भारतीय न्यायपालिका पर इस मामले में जानबूझकर देरी का आरोप लगाया.

बयान में कहा गया है, "नौसैनिकों मासिमिलियानो लाटोरे और सल्वाटोरे गिरोने की निगरानी कर रहे भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने आज सुबह अभूतपूर्व और जानबूझकर देरी का एक और उदाहरण पेश किया है."

बयान के अनुसार, "इस मामले को संभालने में भारत की अक्षमता को देखते हुए इटली एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार अपने अधिकारों के प्रयोग करेगा. इटली का मुख्य उद्देश्य उसके दो नौसैनिकों की स्वदेश वापसी है."

इसमें कहा गया है, "इटली की सरकार ने दिल्ली में इटली के राजदूत डेनियल मैंचिनी को सलाह के लिए तुरंत रोम बुलाने का फ़ैसला किया है."

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कूटनीतिक विवाद

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Image caption इतावली नौसैनिकों का कहना था कि उन्होंने भारतीय मछुआरों को समुद्री डाकू समझकर गोली चलाई थी.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार मंगलवार को भारतीय अधिकारियों के यह कहने के बाद कि वह अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि नौसैनिकों पर किस कानून के तहत मुकदमा चलाया जाए, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन फ़रवरी को सुनवाई में भारत सरकार को कहा था कि वह इतालवी नौसैनिकों पर समुद्री डकैती विरोधी कानून लागू करने के मामले में उठे सभी विवादों को एक हफ़्ते के अंदर हल करे.

सुप्रीम कोर्ट इटली सरकार के आतंकवाद विरोधी कानून को चुनौती देते हुए एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

इटली सरकार का तर्क है कि आंतकवादी विरोधी-कानून के तहत कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के ख़िलाफ़ है जिसके अनुसार सिर्फ़ मैरीटाइम ज़ोन ऐक्ट, आईपीसी, सीआरपीसी और अनक्लॉज़ (यूएनसीएलओएस- समुद्र के कानूनों पर सयुंक्त राष्ट्र संधि) के तहत ही कार्रवाई की जा सकती है.

इन इतालवी नौसैनिकों पर फरवरी 2012 में केरल के नजदीक समुद्र में दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है. वहीं नौसैनिकों का कहना है कि उन्होंने मछुआरों को गलती से समुद्री डाकू समझकर गोली चलाई थी.

पिछली सुनवाई में इटली के राजदूत डैनियल मंचिनी और इतालवी नौसैनिकों की ओर से संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया था कि वह केंद्र सरकार और एनआईए को निर्देश दे कि या तो कानूनी प्रक्रिया में तेज़ी लाएँ या फिर नौसैनिकों को मुक्त करें.

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