तेलंगाना को हरी झंडी, सीधा प्रसारण नहीं हुआ

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आंध्र प्रदेश का विभाजन करके अलग तेलंगाना राज्य बनाने से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है.

इस दौरान लोकसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं हो सका.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि तकनीकी कारणों से ऐसा हुआ लेकिन लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज इससे सहमत नहीं हैं.

उन्होंने ट्वीट करके कहा, "वह कहते हैं कि यह तकनीकी (टेक्निकल) कारणों से हुआ लेकिन दरअसल यह रणनीतिक (टैक्टिकल) कारणों से हुआ."

इससे पहले भारी विरोध और हंगामे के बीच सरकार की तरफ से विवादास्पद बिल को लोकसभा में चर्चा और पारित किए जाने के लिए पेश किया गया.

शोर-शराबा

राज्य के बंटवारे पर सीमांध्र क्षेत्र के सांसदों और मंत्रियों की ओर से किेए जा रहे भारी विरोध को नजरअंदाज करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2014' लोकसभा में पेश किया.

13 फ़रवरी को इस बिल को जब लोकसभा में पेश किया गया था, तब संसद में काफी शोर-शराबा हुआ था. विजयवाड़ा से कांग्रेस सांसद एल राजगोपाल ने बिल के विरोध में पेपर स्प्रे (काली मिर्च का स्प्रे) छिड़क दिया था जिससे कई सांसदों की तबीयत बिगड़ गई थी.

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हंगामे से नाराज़ अध्यक्ष मीरा कुमार ने कांग्रेस, टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस सहित सीमांध्र क्षेत्र के 16 सांसदों को को 20 फरवरी तक निलंबित कर दिया था.

पहली बार, तेलंगाना के गठन के विरोध में सीपीआई (एम) के सांसदों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. वे हाथों में राज्य के बंटवारे के विरोध में तख्तियां उठाए हुए मांग कर रहे थे कि बिना किसी बहस के कोई कार्यवाही नहीं होनी चाहिए.

तीन बार सदन स्थगित

तेलंगाना क्षेत्र के सांसदों ने भी लोकसभा अध्यक्ष के आसन (वेल) के सामने आकर अलग राज्य के जल्दी निर्माण के लिए आवाज उठाई. सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के दौरान हो रहे शोरगुल के बीच गृह मंत्री ने सदन में बिल को पेश किया.

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Image caption बीजेपी ने कहा कि वह तेलंगाना निर्माण के पक्ष में है लेकिन सीमांध्र का ख़्याल रखा जाना चाहिए.

हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही पहली बार दोपहर पौने एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी. फिर कार्यवाही जैसे ही फिर से शुरू हुई तेलंगाना के गठन के मुद्दे पर सदन के सदस्यों में दोबारा शोरगुल होने लगा. मजबूरन लोकसभा अध्यक्ष को तीन बजे तक सदन स्थगित करना पड़ा.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा शुरू से ही पृथक तेलंगाना राज्य के पक्ष में रही है.

उन्होंने कहा, "मैं तेलंगाना बिल के पारित होने की आलोचना भी करती हूं, और स्वागत भी. आलोचना उस तरीके की कर रही हूं जिस तरीके से बिल को सदन में पेश किया गया. और समर्थन कर रही हूं बिल का."

घाटे की भरपाई

भाजपा की नेता सुषमा स्वराज ने कहा "मैं इस बिल को असंवैधानिक भी मानती हूं क्योंकि इस बिल की एक धारा ऐसी है जिसके अंतगर्त राज्यपाल को कानून और व्यवस्था की शक्तियां दी जा रही हैं. मेरा कहना है कि ये प्रावधान संविधान का संशोधन चाहता है. इस मायने में यह एक दोषपूर्ण कानून है."

उन्होंने कहा कि हैदराबाद की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह तेलंगाना को मिलना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि सीमांध्र के लोगों के अनुसार हैदराबाद के पास 15 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय है और तेलंगाना का घाटा 7 हजार करोड़ रुपये का है. यह घाटा हैदाराबाद की अतिरिक्त आय से पूरा हो जाएगा.

विपक्ष की नेता ने कहा, "लेकिन सवाल है कि सीमांत आंध्र और रॉयलसीमा का घाटा कौन पूरा करेगा? हमारी मांग थी कि केंद्र सरकार कोरा आश्वासन न दे बल्कि घाटे की भरपाई के लिए राशि का प्रावधान भी करे."

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मीडिया की ख़बरों के अनुसार वे निलंबित सांसद सदन में न जा पाएँ इसलिए मार्शल तैनात रखे गए थे.

तेलंगाना बिल को लेकर सीमांध्र क्षेत्र से संबंध रखने वाले कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से सोमवार को मुलाकात की थी.

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