तेलंगाना बिल फिर संसद में पेश

  • 18 फरवरी 2014
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आंध्र प्रदेश का विभाजन करके अलग तेलंगाना राज्य बनाने को लेकर खींचतान के बीच मंगलवार को केंद्र सरकार इससे जुड़े बिल को संसद में पेश कर दिया.

हालांकि इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया.

बिल के विरोध में वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगनमोहन रेड्डी सोमवार को गिरफ़्तारी दे चुके हैं, वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी बिल के विरोध में इस्तीफ़ा दे सकते हैं.

वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी जैसे दल जहां इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वहीं तेलंगाना राष्ट्र समिति और भारतीय जनता पार्टी इस बिल के समर्थन में हैं.

संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिन्हें बिल का विरोध करना है वो संसदीय ढंग से विरोध कर सकते हैं.

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निलंबन के बाद

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कमल नाथ ने कहा, "हम इसे चर्चा के लिए लाएंगे, जो इसका विरोध करना चाहें वे संसदीय तरीके से विरोध कर सकते हैं. सांसदों के निलंबन पर फ़ैसला स्पीकर को लेना है, सरकार को नहीं."

उन्होंने कहा, "13 फ़रवरी को इस बिल को जब लोकसभा में पेश किया गया था, तब संसद में भारी हंगामा हुआ था. विजयवाड़ा से कांग्रेस सांसद एल राजगोपाल ने बिल के विरोध में पेपर स्प्रे छिड़क दिया था. कई सांसदों की तबीयत बिगड़ गई थी और हंगामे से नाराज़ स्पीकर मीरा कुमार ने 16 सांसदों को निलंबित कर दिया था."

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16 सांसदों के निलंबन के बाद ऐसा लगता ज़रूर है कि लोकसभा में अब बिल का ज़्यादा विरोध नहीं होगा लेकिन सरकार के लिए असली मुसीबत और शर्मिंदगी तब हो सकती है अगर कोई केंद्रीय मंत्री ही बिल का विरोध कर दे.

तेलंगाना बिल को लेकर सीमांध्र क्षेत्र से संबंध रखने वाले कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मुलाकात की थी.

भारतीय जनता पार्टी वैसे तो तेलंगाना के गठन का समर्थन कर रही है लेकिन साथ में यह भी लगातार कह रही है कि सीमांध्र के लोगों की समस्याओं को भी सुने जाने की जरूरत है.

समस्या की अनदेखी

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लालकृष्ण आडवाणी ने केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद कहा, "भाजपा तेलंगाना के गठन के पक्ष में हैं मगर हम उन समस्याओं को अनदेखा नहीं कर सकते जो सीमांध्र से उठ रही हैं या भविष्य में उठेंगी. इसलिए जब राज्य का विभाजन हो तो ये देखना बहुत जरूरी है कि दोनों प्रदेशों की जनता इससे पूरी तरह से संतुष्ट हो."

आडवाणी के अनुसार, "जहां भाजपा को ये उम्मीद है कि अलग राज्य बनने पर वो तेलंगाना में लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है वहीं कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि सीमांध्र में होने वाले नुकसान की भरपाई वो तेलंगाना में बेहतर प्रदर्शन से कर पाएगी."

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तेलंगाना बिल के विरोध में आज भी सीमांध्र राजनीतिक दल और कर्मचारी संगठन दिल्ली में प्रदर्शन कर सकते हैं.

वहीं टीआरएस और तेलंगाना समर्थक दूसरे संगठनों के कार्यकर्ता भी दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं.

संसद का ये सत्र 15वीं लोकसभा का आखिरी सत्र है. और ये सत्र भी 21 फ़रवरी को ख़त्म हो जाएगा. ऐसे में अगर तेलंगाना बिल को संसद की मंज़ूरी नहीं मिल पाई तो अलग तेलंगाना का मसला कम से कम अगली सरकार बनने तक अधर में लटक जाएगा.

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