झामुमो विधायक सीता सोरेन की संपत्ति कुर्क

सीता सोरेने के घर से सामान की कुर्की

वर्ष 2012 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों की कथित ख़रीद-फ़रोख़्त मामले में अभियुक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन के संपत्ति कुर्क की गई है.

सीबीआई रांची में अधिकारी एके झा ने बीबीसी को बताया है कि अभियुक्त ने अदालती आदेश का पालन नहीं किया जिसकी वजह से उनकी संपत्ति ज़ब्त की गई है.

नियमानुसार विशेष अदालत से उनके खिलाफ पहले समन और फिर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था.

सीता सोरेन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और दुमका ज़िले के जामा विधानसभा क्षेत्र से झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक हैं.

इस मामले में विधायक ने निचली अदालत के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी जिसे 17 फरवरी को ख़ारिज़ कर दिया था.

सीबीआई अधिकारी के मुताबिक इस मामले में कुल छह अभियुक्त हैं. इनमें विधायक के पिता बीएन मांझी, निजी सचिव राजेंद्र मंडल के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी आरके अग्रवाल, पवन धूत और एक अन्य व्यक्ति सुनील माहेश्वरी शामिल हैं.

आरके अग्रवाल जेल में हैं जबकि पवन धूत और सुनील माहेश्वरी ज़मानत पर हैं. इस मामले में चार जून 2013 को आरोपपत्र दायर किया गया था.

विधायक का सरकारी आवास

झारखंड की राजधानी रांची में धुर्वा स्थित फ्लैट संख्या एफ- 34 पर सीबीआई के अधिकारी स्थानीय पुलिस के साथ कुर्की की कार्रवाई करने पहुंचे थे.

उस वक्त विधायक के आवास पर ताला लगा था.

तब मजिस्ट्रेट उमेशचंद्र दास की मौजूदगी में संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की गई.

धुर्वा थाना के प्रभारी इंद्रमुनी चौधरी ने बीबीसी को बताया है कि विधायक के आवास से ज़ब्त किए गए सामान की सूची तैयार की जा रही है.

इनमें फ्रीज़, ड्रेसिंग टेबल, पलंग समेत 75 से अधिक सामान हो सकते हैं. सीबीआई से ज़ब्ती सूची हासिल करने के बाद पुलिस ये सारा सामान थाना में ले जाएगी.

साल 2012 में दर्ज हुआ था मामला

झारखंड में 30 मार्च 2012 को राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हुआ था. उसी दिन आयकर के अधिकारियों ने राजधानी के नामकुम थाना क्षेत्र में एक इनोवा गाड़ी से 2.15 करोड़ रुपए ज़ब्त किए थे.

इसके बाद नामकुम थाने में मामला दर्ज कराया गया था. तब चुनाव आयोग ने वोटों की गिनती पर रोक लगाते हुए चुनाव रद्द करने की अनुशंसा की थी.

दो अप्रैल 2012 को कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप बलमुचू ने वोटों की गिनती की मांग को लेकर हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. एक अन्य व्यक्ति जयशंकर पाठक ने चुनाव आयोग की अनुशंसा के ख़िलाफ़ जनहित याचिका दायर की थी.

सीबीआई जांच

पांच अप्रैल 2012 को हाइकोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. इसके साथ ही जयशंकर पाठक पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था.

सीबीआई ने उसी साल 19 अप्रैल को इस मामले पर जांच-पड़ताल आरंभ कर दी थी.

जांच के दौरान सीबीआई ने 17 मई और 13 जून 2012 को झारखंड के कई विधायकों, उनके रिश्तेदारों के अलावा पवन धूत, आरके अग्रवाल से जुड़े लोगों के विभिन्न ठिकानों पर छापा भी मारा था.

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