सुप्रीम कोर्ट: मुसलमान भी ले सकेंगे बच्चा गोद

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2006 में किशोरों के लिए बने क़ानून के तहत मुसलमान भी चाहें तो बच्चा गोद ले सकते हैं.

भारत में मुसलमानों से जुड़े धार्मिक मामलों की संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार मुसलमानों को बच्चा गोद लेने की मनाही है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, "2006 के किशोर एवं बाल क़ानून(जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट) के तहत यह फैसला दिया जाता है कि इस कानून के प्रावधान सभी धर्म और समुदाय पर लागू होंगे. इसमें व्यक्तिगत धार्मिक भावनाओं की कोई दखलअंदाजी नहीं हो सकती."

अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी की ओर से दायर की गई याचिका पर यह फैसला दिया.

शबनम हाशमी ने अदालत में अर्जी देते हुए मांग की थी कि सर्वोच्च न्यायालय सभी धर्म और समुदाय के लोगों को बच्चा गोद लेने के बारे में दिशा-निर्देश जारी करे.

धार्मिक अल्पसंख्यक

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याचिकाकर्ता शबनम हाशमी के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पहले 'हिन्दू एडॉप्शन एंड मेनटेनेंस ऐक्ट' के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन को गोद लेने का अधिकार था. इस कानून में मुसलमानों और ईसाइयों के गोद लेने के बारे में कुछ भी कहा नहीं गया था.

कॉलिन ने कहा, "भारत में इस्लाम, ईसाई और पारसी जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के पर्सनल लॉ में गोद लेने का प्रावधान नहीं है."

कॉलिन ने बताया कि 2006 में जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट में कुछ संशोधन किया गया और उसी संशोधन के अनुसार 'सेक्यूलर एडॉप्शन' की शुरुआत हुई. मगर इसके बाद भी देश में स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण गोद लेने के मसले पर शंका बनी हुई थी.

उन्होंने बताया, "आज सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा है कि जुवेनाइल जस्टिस लॉ सभी धर्म और समुदाय के लोगों के लिए है. ये सेक्यूलर लॉ है. इसलिए सभी धर्म के लोग बच्चा गोद ले सकते है. इस कानून के अनुसार अनिवार्य नहीं कि वे बच्चा गोद लें. लेकिन यदि कानून की मदद से वे ऐसा करना चाहते हैं तो यह कानून उन्हें इसका हक देता है."

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रतिक्रिया के बारे में भी बताया.

उन्होंने बताया, "मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि जिस तरह हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस ऐक्ट ने गोद लेने का हक दिया है वैसी व्यवस्था हमारे पर्सनल लॉ में नहीं है."

कॉलिन ने बताया कि बोर्ड ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि धर्म चाहे मुस्लिम हो या ईसाई, यह कानून सबको बच्चा गोद लेने में समर्थ बनाता है.

कॉलिन ने बोर्ड की तरफ से किसी भी तरह के विरोध की आशंका से इनकार किया है.

वे कहते हैं, "देश में सेक्यूलर मैरिज लॉ भी है. आपका धर्म चाहे जो हो, आप सेक्यूलर मैरिज कर सकते हैं."

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसल पर वे खुशी जाहिर करते हुए कहते हैं, "मामला ये है कि देश में कई लाख अनाथ बच्चे हैं. लेकिन लोग उन्हें गोद लेने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि 'हिन्दू एडॉप्शन एंड मेनटेनेंस ऐक्ट' पहले केवल हिंदुओं के लिए था. अब दरवाजा थोड़ा खुल गया है. अब कोई भी गोद ले सकता है."

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