ये हीरा खान से निकला है या लैब में बना?

  • 27 फरवरी 2014
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कहते है हीरे की असली परख सिर्फ़ बादशाह को होती है या फिर जोहरी को. पर कुछ हीरे न तो जौहरी परख सकता है ना ही आप. यह हीरे भारत के डायमंड कारोबार की सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं.

क्योंकि ये कोई खान से नहीं बल्कि चीन या यूरोप में स्थित किसी प्रयोगशाला में बनाए गए हीरे हैं. हालांकि कृत्रिम हीरे कोई नया आविष्कार नहीं हैं पर असली हीरे की चमक के बीच छुपाकर भारत के कई शहरो में बेचा जा रहा है. वही रूप, वही रंग, वही चमक, लेकिन इन कृत्रिम हीरे की क़ीमत असली से कई गुना कम होती है लेकिन क्या आप के आभूषणों को चमक देने वाले वाले हीरे असली है या फिर नक़ली?

(अरबों के हीरे लेकर रफूचक्कर?)

भारत हर साल $29 अरब से ज़्यादा के हीरे निर्यात करता है. भारत में अनगढ़ हीरे दक्षिण अफ़्रीक़ा, साइबेरिया और पूर्वी कनाडा की खदानों से पॉलिश के लिए आते है. शंका यह जताई जा रही है कि भारत में स्थित कुछ पॉलिशिंग इकाईयों में असली हीरों के साथ कृत्रिम हीरे मिला दिए जाते हैं. इन कृत्रिम हीरों को छूकर देख परख पाना मुश्किल है.

जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन कॉउंसिल के वाइस-चेयरमैन पंकज पारेख कहते हैं, "कृत्रिम हीरे एक बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं. पिछले कुछ महीनो में ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं कि असली हीरों के साथ इन्हें बेचा जा रहा है. भारत में हीरा असली है या कृत्रिम यह परख कर पाने की क्षमता केवल दो प्रयोगशालाओं में ही है."

निर्यात में इज़ाफ़ा

काउंसिल ने पिछले महीने भारत से हीरे और गहने निर्यात करने वाले अपने पाँच हज़ार से अधिक सदस्यों को बिल और चालान पर हीरे असली हैं या कृत्रिम, इसका ज़िक्र करने के लिए कहा था. काउंसिल ने अपने सदस्यों को ये सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि असली और नक़ली हीरे एक साथ न मिल जाएँ. इंडियन कस्टम्स डिपॉर्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले कुछ वर्षो में कृत्रिम हीरों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

(चार सौ साल पुराना हीरा)

साल 2013 में भारत ने सौ मिलियन डॉलर से भी अधिक कृत्रिम हीरे निर्यात किए थे. हालांकि ये हीरे कई औद्योगिक अनुप्रयोगों में काम आते हैं लेकिन उनकी इतनी भारी मात्र में निर्यात ने हीरा व्यापारियों को सकते में डाल दिया है. पारेख कहते हैं कि इन कृत्रिम हीरों की क़ीमत असली के मुक़ाबले 40 से 50 फ़ीसदी कम होती है.

काउंसिल ने ग्लोबल कंसल्टिंग फ़र्म 'एटी कियर्नी और बोनास एंड कंपनी' को कृत्रिम हीरों के व्यापार को लेकर दिशा निर्देश बनाने के लिए मदद करने को कहा है. समस्या का सामना करने के लिए भारत डायमंड बोउर्से, आल इंडिया जेम्स एंड जेवेलरी ट्रेड फ़ेडरेशन और मुम्बई डायमंड मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मिल कर एक 'नैचुरल डायमंड मॉनिटरिंग समिति' भी बनाई है.

क्या कहती है जांच

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भारत में पॉलिश के लिए आने वाले 10 में से सात हीरे सूरत में पॉलिश किए जाते हैं. हीरे के व्यापारी मानते हैं कि सूरत के आसपास के इलाक़ों में स्थित कुछ छोटी इकाईयों में कृत्रिम हीरे असली के साथ मिलाये जाते हैं. हालांकि इस बारे में पुष्टि अब तक नहीं हुई है. पिछले साल सूरत में करीब 90 मिलियन डॉलर के कृत्रिम हीरे निर्यात किए गए थे.

(दुर्लभ गुलाबी हीरे की नीलामी)

जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पंकज पारेख ने कहा, "ये कहा नहीं जा सकता कि असली हीरो में कृत्रिम हीरे कहां मिलाये जाते हैं. हमने इस मामले में सभी ज़रूरी क़दम उठाए हैं और आने वाले दिनों में इसे लड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं."

कार्बन के साथ मिलाकर हीरे के टुकड़े को एक ग्रोथ चैंबर में डाला जाता है. फिर इन्हें एक रिएक्टर में लाया जाता है. इस रिएक्टर का तापमान और दबाव बिलकुल पृथ्वी के गर्भ जैसा होता है. 3,000 डिग्री सेल्सियस और 50,000 एट्मोस्फियर के दबाव में ग्रेफ़ाइट हीरा बनने लगता है. ऐसे सिंथेटिक या कृत्रिम हिरा बनाने में 92 घंटे लगते हैं. जानकर कहते हैं कि असली हीरे के अंदर की बनावट ऊबड़ खाबड़ होती है.

असली के नाम पर

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लेकिन कृत्रिम हीरा अंदर से सामान्य दिखता है. पारेख कहते हैं, "कृत्रिम हीरे पिछले कई सालो से बन रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ सालो में इनके बनने की प्रक्रिया में तकनीकी उन्नति के कारण आज बाजार में मिलने वाले कृत्रिम हीरे असली के बेहद नज़दीक आ गए हैं."

(ब्रितानी राजघराने के जेवरात)

मुम्बई डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत शाह कहते हैं, "हम पिछले एक साल से इस मुद्दे पर सरकार, व्यापारी मंडल और कंसल्टेंट्स से चर्चा कर रहे है. यह कहना मुश्किल है की भारत में बिकने वाले हीरो में कितने प्रतिशत हीरे कृत्रिम है. लेकिन यह बात सही है कि कृत्रिम हीरे असली के नाम पर भारी मात्रा में बेचे जा रहे है."

शाह कहते है कि ऐसे कृत्रिम हीरो को असली बता कर एक्सपोर्ट करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन वहीं कि सुनार के यहाँ बेचना आसान है. सुनार ख़ुद नहीं कह सकता कि हीरा असली है या कृत्रिम. यह फ़र्क़ सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रयोगशाला में सुनिशित किया जा सकता है. हमारे पास ऐसी कई शिकायतें आ रही हैं जब गहने बनाने वाली कंपनियो या पॉलिशिंग इकाइयों को कृत्रिम डायमंड बेचे गए है.

शाह कहते है कि उनके एसोसिएशन और मंडलो के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं कि भारत में अधिक से अधिक प्रयोगशाला बने जहां कृत्रिम हीरो की परख हो सके.

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