पंजाब में कहां चूके नरेंद्र मोदी

नरेन्द्र मोदी इमेज कॉपीरइट Reuters

भाजपा की तरफ़ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने अपनी लुधियाना रैली में ख़ासकर पंजाब से जुड़े कुछ मुद्दों का जिक्र किया लेकिन कई मुद्दे ऐसे थे जिनका ज़िक्र तक उन्होंने नहीं किया.

उन्होंने कृषि की बात करते हुए कहा कि पैदावार बढ़ाने के लिए नई तकनीक और नई सोच की ज़रूरत है. साथ में उन्होंने इंडस्ट्री की बात की कि कैसे इसे आगे ले जाना चाहिए.

पंजाब में लंबे समय से केन्द्र सरकार द्वारा दूसरे राज्यों को दिए जाने वाले औद्योगिक पैकेज चर्चा का विषय रहे हैं लेकिन मोदी ने अपने भाषणों में इसकी कोई चर्चा नहीं की.

पंजाब की यही शिकायत रही है कि केन्द्र सरकार का राज्य में उद्योगों के प्रति उदासीन रवैया रहा है और यही वजह है कि पंजाब में उद्योग फलफूल नहीं रहे हैं.

मोदी ने ये तो कहा कि पंजाब के लोग ग्लोबेलाइज्ड हैं लेकिन वो इस बात को आगे बढ़ाना भूल गए कि पंजाब की अर्थव्यवस्था ग्लोबेलाइज्ड नहीं हो पाई. यहां तक कि पंजाब की इंडस्ट्री खुद को राष्ट्रीय स्तर पर भी आत्मसात नहीं कर पाई.

मोदी ने इन तथ्यों पर ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया. एक अहम बात जिसका रैली में जिक्र तो हुआ लेकिन ज़्यादा चर्चा नहीं हुई वह है समावेशी विकास.

दलित आबादी

इमेज कॉपीरइट Reuters

प्रतिशत के आधार पर देश की सबसे बड़ी दलित आबादी पंजाब में है लेकिन उनके विकास के लिए मोदी ने इस रैली में कोई बात नहीं की.

पंजाब की ख़ासियत यह है कि यहां बसपा की ज़्यादा मौजूदगी नहीं है और दलित हर पार्टी में हैं. इस समय ज़्यादा दलित विधायक अकाली दल में हैं.

लेकिन दलितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कोई बात नहीं होती. पंजाब में सबसे ज़्यादा ग़रीबी दलितों में है.

पंजाब एक सीमांत प्रांत है और यहां सीमा पार व्यापार और पड़ोसी देश के साथ शांति एक अहम मसला है. अगर पाकिस्तान के साथ व्यापार शुरू होता है तो उससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरेंगे.

इसलिए मोदी का पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में आकर पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर बात नहीं करना भी लोगों के लिए निराशा की बात हो सकती है.

तरक़्क़ी की बात

इमेज कॉपीरइट AP

अच्छी बात यह रही कि मोदी ने 1984 के दंगों की बात नहीं की. पिछले कुछ दिनों से इस विषय पर देश की राजनीति में काफ़ी चर्चा हो रही थी. मोदी ने इस मसले पर कुछ नहीं कहा, जो मेरी नज़र में सकारात्मक नहीं है.

मोदी ने विकास की बात करके लोगों के दिलों को छू लिया. पंजाब का युवा आज नशीले पदार्थों का शिकार है और राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ उसका जुड़ाव कम है. उन्होंने ड्रग्स का मुद्दा तो उठाया लेकिन यह नहीं बताया कि इससे निपटने के लिए उनके पास क्या योजना है.

मोदी आमतौर पर युवाओं के कौशल विकास के साथ उन्हें सर्विस सेक्टर के साथ जोड़ने की बात करते हैं लेकिन इस रैली में उन्होंने इस मुद्दे को नहीं छुआ. हो सकता है कि इससे युवाओं को भी निराशा हुई होगी.

पंजाब की राजनीति में कई बड़े मुद्दे हैं. सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि पंजाब में कृषि के क्षेत्र में ठहराव आया हुआ है. इसे आगे ले जाने के लिए नई तकनीक, नए शोध से उत्पादन बढ़ाने की ज़रूरत है.

युवाओं का अहम मुद्दा

दूसरा बड़ा मुद्दा यह है कि पंजाब के युवाओं को किस तरह से अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए. इसमें नॉलेज एजुकेशन और शिक्षा की गुणवत्ता पर ज़ोर होना चाहिए.

पंजाब में न तो भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) है और न ही कोई विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग कॉलेज. यह युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा मुद्दा है.

तीसरा बड़ा मुद्दा है अर्बन गवर्नेंस. शहरों में सफाई, पानी की व्यवस्था आम शहरी लोगों के लिए अहम है. रैली में बिजली की बात तो की गई लेकिन सफाई और पानी पर कोई बात नहीं हुई थी.

चौथा मुद्दा गवर्नेंस का है. इस बारे में मौजूदा सरकार ने कुछ पहल की है लेकिन यह एक बड़ा मुद्दा है. भ्रष्टाचार पूरे देश की तरह पंजाब में भी एक मुद्दा है.

पंजाब के पास अपनी राजधानी नहीं है लेकिन राजनीतिक दल इस मुद्दे को नज़रअंदाज कर रहे हैं. सबसे ज़्यादा राजस्व चंडीगढ़ से ही आता है लेकिन इसका फ़ायदा पंजाब को नहीं हो रहा है.

(संदीप सोनी के साथ बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार