रिलायंस मामले पर मोइली ने पीएम को लिखा पत्र

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पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर गैस के दाम बढ़ाने को जायज़ बताया है.

मोइली ने कहा है कि केजी और कावेरी बेसिन में 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू (मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) की दर से गैस निकालना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मोइली ने यह भी कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के केजी-डी6 बेसिन में क्षमता से कम गैस निकालने के मामले में रिलायंस का अनुबंध रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह मामला ट्राइब्यूनल में लंबित है.

गैस निकालने वाली कंपनी के कोई गड़बड़ी करने पर अनुबंध रद्द किए जाने का प्रावधान है और एस जयपाल रेड्डी के पेट्रोलियम मंत्री रहते पेट्रोलियम मंत्रालय ने मई 2012 में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पर प्राकृतिक गैस उत्पादन का पूर्व निर्धारित लक्ष्य हासिल न कर पाने पर 1.005 अरब डॉलर (करीब 62.11 अरब रुपये) का जुर्माना लगा दिया था.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने इसका विरोध किया और मामले को ट्राइब्यूनल में ले गई.

'अनुबंध रद्द नहीं हो सकता'

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मोइली ने कहा, "प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (पीएससी) की शर्तों के अनुसार सरकार उत्पादन में कमी के कारण अनुबंध को रद्द नहीं कर सकती क्योंकि यह मामला पंचाट में सुनवाई के लिए लंबित है."

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मोइली की चिट्ठी आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के आरोपों के बाद सामने आई है. केजरीवाल ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वो एक अप्रैल, 2014 से गैस के दाम दोगुने कर के रिलायंस को फ़ायदा पहुंचा रही है.

प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (पीएससी) में अनियमितता के लिए जुर्माने को लेकर साफ़-साफ़ कोई प्रावधान नहीं है. किसी कॉन्ट्रैक्ट को कोई अनियमितता होने पर सिर्फ़ रद्द किया जा सकता है.

अप्रैल से गैस के दाम में बढ़ोतरी को जायज़ ठहराते हुए मोइली ने कहा कि रिलायंस और सरकारी कंपनी ओएनजीसी के कई गैस क्षेत्र ऐसे हैं जहां से 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू की मौजूदा दर पर गैस का उत्पादन आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है.

मोइली ने पत्र में लिखा है, "गैस के दाम तय करते हुए यह सोचना बहुत अच्छा लगता है कि दाम कम रखने से हम उपभोक्ताओं को कम दाम पर उतनी ही गैस की आपूर्ति का भरोसा दे रहे हैं. तथ्य यह है कि दाम तय करने के फॉर्मूले से वो निवेश प्रभावित होता है जो गैस की खोज और उत्पादन में लगता है और अंत में गैस का कुल संभावित उत्पादन भी."

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