'मीडिया को कुचलने' के बयान से मुकरे शिंदे

  • 25 फरवरी 2014
सुशील कुमार शिंदे इमेज कॉपीरइट AFP

सोमवार को कथित तौर पर 'मीडिया को कुचलने' की धमकी देने वाले केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने मंगलवार सुबह स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि दरअसल वह सोशल मीडिया की बात कर रहे थे पत्रकारिता की नहीं.

महाराष्ट्र के शोलापुर में सोमवार को आयोजित युवक कांग्रेस के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा था कि इलेक्ट्रानिक मीडिया का एक धड़ा पिछले चार महीने से दुष्प्रचार कर रहा है. हम इसे 'कुचल' देंगे.

उन्होंने कहा था कि वह खुफ़िया शाखा के प्रभारी भी हैं, इसलिए वह जानते हैं कि यह कहाँ से हो रहा है और इसके पीछे किसका हाथ है. उन्होंने कहा, "हम ऐसे तत्वों पर चुपचाप नज़र रखे हुए हैं."

इस कार्यक्रम में शिंदे ने कहा था कि मीडिया को सकारात्मक ख़बरों पर ध्यान लगाना चाहिए, जिसका देश की जनता स्वागत करेगी.

उन्होंने कहा कि देश की जनता समाज को अशांत करके देश में विभाजन कराने के प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करेगी.

पत्रकारिता नहीं सोशल मीडिया

अपने इस बयान पर सफाई देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने मंगलवार सुबह कहा, ''मैं सोशल मीडिया की ओर से फैलाए जा रहे नफरत की बात कर रहा था, पत्रकारिता की नहीं.''

शिंदे का यह बयान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया में आए चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के बाद आया है, जिनमें इस साल मई में प्रस्तावित आम चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन की भविष्यवाणी की गई है.

इसके पहले आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने भी मीडिया की आलोचना की थी.

अरविंद केजरीवाल ने मीडिया पर मुकेश अंबानी के हाथों खेलने का आरोप लगाया था. वहीं पूर्व सेना अध्यक्ष ने मीडिया को 'प्रेस्टीट्यूट्स' यानी ख़बरफ़रोश बताया था.

केजरीवाल और जनरल सिंह के बयानों को गंभीरता से लेते हुए एडिटर्स गिल्ड आफ़ इंडिया ने उस पर चिंता जताई थी. गिल्ड ने सोमवार को कहा था कि राजनीति और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को तथ्यों से परे जाकर आरोप लगाने से बचना चाहिए.

गिल्ड ने अपील की थी कि मीडिया की आलोचना करते समय, उस पर सवाल उठाते समय और ख़बरों का खंडन करते समय तथ्यहीन आरोप न लगाए जाएं. इसके साथ गिल्ड ने लोगों से सार्वजनिक बहस को शालीन और तार्किक बनाए रखने की भी अपील की थी.

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