एडमिरल जोशी: पन्डुब्बी-विरोधी युद्ध विशेषज्ञ

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मुंबई में नौसेना की एक पनडुब्बी के हादसे के शिकार होने के बाद नौसेनाध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

पिछले साल अगस्त में भी पनडुब्बी, आईएनएस सिंधुरक्षक में हादसा हुआ था.

इस हादसे में दो भारी धमाके हुए थे और फिर आग लगने के बाद वह डूब गई थी. इस हादसे में 18 नौसेना कर्मचारी मारे गए थे.

एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी ने 31 अगस्त, 2012 को भारत के 19वें नौसेना प्रमुख का पद ग्रहण किया था.

पदभार ग्रहण करते समय अपने संबोधन में उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा था, "देश की समृद्धि के लिए नौसेना को समुद्रीय शक्ति बनने का लक्ष्य पूरा करना होगा. यह सुनिश्चित करने के लिए 24X7 सतर्क रहना होगा ताकि हमारी सुरक्षा तैयारियों में किसी तरह की ढील न रह जाए."

'पन्डुब्बी-विरोधी विशेषज्ञ'

उन्होंने आदमी और मशीनों के बेहतर तालमेल पर ज़ोर देते हुए कहा था, "सुरक्षा संबंधी उद्देश्यों को हासिल करने के लिए आदमी और मशीन के बीच तालमेल बहुत महत्वपूर्ण है."

नौसेना की वेबसाइट के अनुसार एडमिरल जोशी पनडुब्बी-विरोधी युद्ध के विशेषज्ञ हैं. अपनी क़रीब 40 साल की सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न तरह की स्टाफ़, कमांड और निर्देशन की ज़िम्मेदारियों को संभाला.

उन्होंने जो मुख्य ज़िम्मेदारियां निभाईं उनमें गाइडेड मिसाइल वाले युद्धपोत आईएनएस कुठार, गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोत रणवीर और विमानवाहक पोत आईएनएस विराट का नियंत्रण शामिल है.

इस दौरान उन्हें नौसेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक और युद्ध सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया.

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इसके बाद उन्होंने पूर्वी बेड़े का नेतृत्व किया जिसके लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) दिया गया.

कार्यकाल

फ्लैग रैंक पर पदोन्नति होने के बाद एडमिरल जोशी ने सभी केंद्रीय शाखाओं के एकीकृत मुख्यालयों में काम किया.

उन्होंने कार्मिक विभाग में बतौर सहायक कार्मिक प्रमुख (मानव संसाधन विकास), युद्धपोत निर्माण और अधिग्रहण में बतौर एयरक्राफ़्ट करियर प्रोग्राम के सहायक नियंत्रक (एसीसीपी), संचालन शाखा में सहायक नौसेना प्रमुख (युद्ध सूचना और संचालन) और बतौर उप नौसेना प्रमुख काम किया.

पश्चिमी नौसेना कमांड में बतौर एफ़ओसी-इन-सी (फ़्लैग ऑफ़िसर कमांडिंग इन इंचार्ज) के रूप में ज़िम्मेदारी संभालने से पहले उन्होंने अंतर-सेवा एकीकरण में भी सहयोग किया था. पहले तो अंडमान और निकोबार कमांड, जो तीनों सेवाओं की एकमात्र एकीकृत कमांड है, के कमांडर-इन-चीफ़ के रूप में. इसके लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) दिया गया. इसके बाद उन्होंने चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कमेटी के चेयरमैन के एकीकृत रक्षा स्टाफ़ (सीआईएससी) के प्रमुख के रूप में कार्य किया.

एडमिरल जोशी नेवल वॉर कॉलेज, अमरीका से स्नातक, कॉलेज ऑफ़ नेवल वारफ़ेयर, मुंबई और दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल डिफ़ेंस कॉलेज से पढ़े हैं.

उन्होंने 1996 से 1999 के बीच सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के रूप में भी काम किया है.

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