पनडुब्बियों को आधुनिक बनाने की ज़रूरत?

भारतीय पनडु्ब्बी इमेज कॉपीरइट INDIAN NAVY

मुंबई बंदरगाह के नज़दीक भारतीय पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरत्न के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद नैतिकता के आधार पर हमारे नौसेना अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

लेकिन यह दुर्घटना एक तरह से भारतीय नौसेना की मौजूदा स्थिति की संपूर्ण निगरानी किए जाने की ज़रूरत की ओर ध्यान दिलाती है. पिछले साल अगस्त में सिंधुरक्षक हादसा और अब सिंधुरत्न का दुर्घटनाग्रस्त होना निश्चित तौर पर भारतीय पनडुब्बियों की स्थिति को लेकर चिंता पैदा करता है.

इस प्रकार की जब कोई भी दुर्घटना होती है, तो हर बार उसकी जांच कराई जाती है. बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी बिठाई जाती है. इस लिहाज से भारतीय नौसेना के अंदर ट्रेनिंग प्रोसेस, रखरखाव और सबमरीन के मैटिरियल स्टेट्स जैसे पहलुओं पर निगरानी की ज़रूरत है.

बंदरगाह में किसी पनडुब्बी के अंदर दुर्घटना होना एक बड़ी बात मानी जाती है. लेकिन ऐसे हादसों के बाद यह कहना सही नहीं है कि भारतीय पनडुब्बियां कलंकित हो गईं हैं या भारतीय नौसेना का पनडुब्बियों पर भरोसा कम हो गया.

क्योंकि पनडुब्बी का पानी में उतरना हमेशा हाई रिस्क वाली घटना होती है. हालांकि इस हादसे के बाद तारीफ़ करनी होगी सबमरीन के क्रू मेंबरों की जिन्होंने बेहद तेज़ी से काम किया और घायल हुए सैनिकों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया.

आधुनिक बनाने की ज़रूरत

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption पिछले साल सिंधुरक्षक में हुए हादसे की पूरी जांच सामने नहीं आ पाई है.

पिछले साल सिंधुरक्षक में हुए हादसे की पूरी जांच सामने नहीं आ पाई है, वह सबमरीन जिस इलाक़े में फंसी हुई है, उसे भी हम लोकेट नहीं कर पाए हैं. वहां उसकी जांच पूरी हो पाएगी, इसमें भी संदेह बना हुआ है. लेकिन सिंधुरक्षक का मामला अपनी तरह में अकेला मामला है.

अब जबकि दूसरा हादसा हुआ है तो भारतीय नौसेना को अपने सबमरीन को लेकर काफ़ी निगरानी करने की ज़रूरत है. यह पता लगाना ज़रूरी है कि सबमरीन में आग किस वजह से लगी है. इसके अलावा सिंधुघोष क्लास की सबमरीन के मैटीरियल को भी आंका जाना चाहिए क्योंकि ये सबमरीन 26 से 30 साल पुरानी हैं. इनको आधुनिक रूप दिया जाना ज़रूरी है.

हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की अपनी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है. इसे चीन सहित दूसरे देश भी स्वीकार करते हैं. लेकिन हमें यहां से आगे देखने की ज़रूरत है.

हम अभी तक अपने यहां पनडुब्बी बनाने में सफल नहीं हुए हैं. आईएनएस अरिहंत हमारा यहां बनी पहली पनडुब्बी ज़रूर है लेकिन इस दिशा में अभी काफ़ी प्रगति करने की ज़रूरत है.

भारत को इस हादसे को बड़े परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए. हमें यह देखना होगा कि हम कितना बजट ख़र्च कर सकते हैं और अपनी सेना को किस तरह आधुनिक बना सकते हैं. तभी जाकर ऐसे हादसों को कम किया जा सकेगा.

(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार