'सपने तो चांद पर जाने के, बाकी ख़ुदा मालिक'

इलेक्ट्रानिक सारंगी बजाने वाले सुहैल यूसुफ खान

इलेक्ट्रॉनिक सारंगी पर जुगलबंदी करने वाले भारत के सुहैल और आदित्य आज एक कामयाब संगीतकार हैं. उनके चाहने वालों को लंबे समय से उनके म्यूज़िक एलबम का इंतजार था और इस साल अप्रैल में ये इंतज़ार खत्म होने वाला है.

आदि और सुहैल भारत ने हाल में एमटीवी के कार्यक्रम 'कोक स्टूडियो' में प्रदर्शन किया और उसके बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. सोशल मीडिया पर भी उनका संगीत काफी पसंद किया जा रहा है.

जाने माने सारंगी वादक उस्ताद कमाल साबरी के भतीजे सुहैल यूसुफ खान अपने खानदान में 18वीं पीढ़ी के सारंगी वादक हैं.

उनके दादा बड़े उस्ताद साबरी खान वायलिन वादक येहुदी मेनुहिन और बीटल्स के साथ काम कर चुके हैं.

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जुगलबंदी

बीबीसी के साथ एक खास बातचीत में सुहैल ने आदित्य के साथ अपनी जुगलबंदी के बारे में बताया, "हम लोग बहुत सालों से साथ में काम कर रहे हैं. हम लोगों को साथ में काम करते हुए तकरीबन दस साल हो गए हैं."

"अगर मेरे पास कोई कंपोज़िशन होती है तो मैं आदि के साथ शेयर करता हूं. आदि के पास कोई आइडिया होता है तो वह मुझे भेजते हैं."

उन्होंने बताया, "इस बार आदि ने ट्रिप हॉप टाइप आइडिया बनाया और उन्होंने उसे मुझे भेजा और मुझे वह बहुत पसंद आया. हमने उस पर काम किया और आखिरकार यह बोल और यह धुन मेरे अंदर से निकली. हम आशा करते हैं कि आप लोगों को भी यह बहुत पसंद आएगा."

भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "वैसे सपने तो हमने चांद पर जाने के देख रखे हैं, बाकी ख़ुदा ही मालिक है."

सुहैल ने अपने लोकप्रिय गीत जोगिया के बारे में बताया कि ये एक प्रेम गीत है. जोगिया शब्द यह बताता है कि जब आपको जीवन में प्यार होता है तो कैसे आपको सब कुछ अधूरा लगने लगता है और आपको बहुत ज़रूरत होती है उस प्यार की.

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अलग अंदाज

उन्होंने बताया, "मुझे प्रयोग करना पसंद है. मुझे अलग-अलग संस्कृतियों और संगीत को जानने का मौका मिला. मैं उनसे बहुत प्रेरित हुआ. चूंकि ऐसे संगीत को सुनना मुझे बेहद पसंद है, इसलिए मेरा मन करता है कि मैं बजाऊं भी."

सुहैल कहते हैं, "यह सब कुछ इतने स्वाभाविक तरीके से हुआ कि मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया. यही वजह है कि मैं इतने प्रयोग कर पाता हूं."

उन्होंने बताया, "मेरा संबंध एक बहुत ही सम्मानित क्लासिकल घराने से है. लेकिन मैं इतने प्रयोग इसलिए करना चाहता हूं क्योंकि बचपन से ही पश्चिमी संस्कृति से मेरा बहुत अधिक जुड़ाव रहा है. मैं अलग-अलग संस्कृतियों से बहुत अधिक प्रेरित होता हूं."

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं कि, "मैं सिर्फ इसलिए प्रयोग करना नहीं चाह रहा हूं क्योंकि इस समय वो फैशन में हैं. मेरी दिली तमन्ना रहती है कि मैं अलग-अलग चीजें पर काम करूं और कुछ सीख कर जाऊं."

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