'बेरोज़गारी भत्ता नहीं मिडिल ऐज पेंशन'

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उत्तर प्रदेश में साल 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने वादा किया था कि वो अगर सत्ता में आई तो 35 साल से ज़्यादा उम्र वाले बेरोज़गार युवाओं को बेरोज़गारी भत्ता देगी.

मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव की सरकार ने बेरोज़गारी भत्ता बांटने में कई शर्तें लगा दी, जिससे कई युवा बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन करने से वंचित हो गए हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश में आदेश में साफ़ कहा गया है कि 31 अगस्त 2012 तक प्रदेश के सेवायोजन कार्यालयों में पंजीकृत बेरोज़गार युवक ही भत्ते के लिए आवेदन कर सकते हैं.

इसके साथ ही उनके पूरे परिवार की सालाना आमदनी 36 हजार से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए. कम से कम 10वीं पास युवाओं को ही बेरोज़गारी भत्ता मिलेगा और उस बेरोज़गार युवा की उम्र 25 से 40 साल के बीच होनी चाहिए.

इन शर्तों से कई युवाओं को काफी निराशा हुई है.

35 साल के पंकज कहते हैं, "मुझे बहुत उम्मीद थी कि बेरोज़गारी भत्ता मिलेगा जिससे सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन कर पाता, फॉर्म ख़रीदने में आसानी हो जाती.

लेकिन जब भत्ता देने की बारी आई तो सरकार ने शर्त लगाकर हमारे जैसे लाखों युवाओं को बेरोज़गारी भत्ता पाने के हक़ से वंचित कर दिया."

'सरकार की वादाख़िलाफ़ी'

पंकज की तरह ही कई और युवा हैं जो बेरोज़गारी भत्ता पाने से चूक गए. इन लोगों का आरोप है कि अखिलेश यादव ने इन लोगों से वादा ख़िलाफ़ी की है.

कमलेश विकलांग हैं. अपनी मुश्किल बताते हुए कमलेश कहते हैं, "मैंने अपने आय प्रमाण पत्र के साथ सेवायोजन कार्यालय जाकर जब बेरोज़गारी भत्ते के लिए फॉर्म मांगा तो वहां के कर्मचारियों का कहना था कि आप देरी से आए है, लिहाज़ा आवेदन नहीं लिया जा सकता. आवेदन की समय सीमा 31 अगस्त 2012 तक थी."

बेरोज़गारी भत्ता बांटने की शुरुआत साल 2012 के सितंबर महीने से की गई थी

सेवायोजन विभाग के उपनिदेशक सीबी भारती के अनुसार कुल 12,53,577 लोगों को बेरोज़गारी भत्ता दिया जा रहा है. उनका कहना है कि 31 अगस्त 2012 के बाद से सेवायोजना विभाग में पंजीकृत हुए बेरोज़गार लोगों को भत्ता देने के संबंध में राज्य सरकार की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है.

वहीं सरकार का बचाव करते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि अखिलेश यादव सरकार पूरे प्रदेश के बेरोज़गार नौजवानों को बेरोज़गारी भत्ता देने के साथ ही उन्हें रोज़गार मुहैया कराने की कोशिश कर रही है.

'मिडिल ऐज पेंशन'

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लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान बेरोज़गारी भत्ता देने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि अखिलेश यादव की सरकार ने बिना किसी तैयारी के भत्ता बांटने की घोषणा कर दी, इससे कई दिनों तक भ्रम की स्थिति बनी रही.

शरद प्रधान कहते हैं, "25 से 40 साल की उम्र के बेरोज़गार युवाओं को 1000 रुपए का भत्ता देना मिडिल ऐज पेंशन देने जैसा है. सरकार को जब ये एहसास हुआ कि इससे आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाएगा तब सरकार ने इसमें ऐसी शर्तें लगा दी जिससे बहुत कम लोग आवेदन कर सकें."

वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने युवाओं को गुमराह किया है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं, "अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव में ये वादा किया था कि वो प्रदेश के बेरोज़गार युवाओं को भत्ता देंगे. लेकिन सरकार बनते ही उन्होंने वादे से पलटते हुए इसमें कई शर्तें लगा दी."

वो आगे कहते हैं, "36,000 सालाना आय की शर्त कभी तर्क संगत नहीं हो सकती. सरकार की सभी योजनाओं में कंपनियों जैसी शर्तें लागू हैं जो व्यावहारिक नहीं है."

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