दिल की बात ज़ुबां से नहीं, सिर से कहने की अदा

हेडशेक वीडियो यूट्यूब इमेज कॉपीरइट Meen Fried Chicken Curry

बीते दिनों भारत में राजनीतिक कमेंट करने वाले कई वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए. अब ऐसा वीडिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जो बताता है कि भारत के लोग किस तरह अलग-अलग अंदाज़ में सिर हिलाकर अपने दिल की बात कहते हैं.

इसके निर्माण से जुड़े पॉल मैथ्यू बताते हैं, "कई लोगों को ये अजीब लग सकता है. अगर आप भारत में पैदा हुए हैं और यहीं आपकी परवरिश हुई है तो यह आपकी आदतों में शामिल होगा. आपके व्यक्तित्व का हिस्सा होगा. आप अलग अलग तरीक़ों से अपना सिर हिलाकर अपनी बात कह सकते हैं."

पॉल मैथ्यू मूल रूप से दक्षिण भारत के रहने वाले हैं, लेकिन फिलहाल मुंबई में फिल्म उद्योग में काम कर रहे हैं.

यूट्यूब में अपलोड किए गए इस वीडियो का नाम 'इंडियन हेडशेक– वाट डू दे मीन?' है. मैथ्यू इस फिल्म के लेखक और निर्देशक हैं.

इस वीडियो को अभी तक 13 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं.

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उम्मीद से बढ़कर

मैथ्यू बताते हैं, "अगर हमें पहले पता होता कि इस वीडियो को इतने अधिक लोग देखने वाले हैं तो हमने इसे और बेहतर ढंग से बनाया होता."

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फ़िल्म में बताया गया है कि भारतीय किस तरह सिर हिलाकर "हां", "नहीं", "हो सकता है", "क्या है?", "जारी रखो" या "सम्मान देने" जैसे भाव आसानी से प्रकट करते हैं.

मैथ्यू मानते हैं कि इस वीडियो को मज़ाकिया बनाने के लिए कुछ बातें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गईं हैं, लेकिन उन्होंने माना कि ये राष्ट्रीय विशेषता की सही तस्वीर पेश करता है.

वीडियो को सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रिया मौटे तौर पर सकारात्मक है. यूट्यूब पर एक कमेंट है, "ओह सच में! प्यारा है."

कुछ दूसरे कमेंट्स में दुविधा दिखाई देती है. कुछ लोग कहते हैं कि सिर हिलाकर अपनी बात कहने का प्रचलन दक्षिण में अधिक है.

बढ़ती जागरूकता

बीबीसी मॉनीटरिंग के विकास पाण्डेय कहते हैं कि ज़्यादातर भारतीय अनजाने में अपना सिर हिलाते हैं, और कई लोगों के इसका अहसास तब होता है जब कोई विदेशी उनसे पूछता है कि उनके कहने का मतलब "हां" है या "नहीं."

उनका मानना है कि भारत में इस वीडियो की लोकप्रियता का मतलब है कि इस देश में अंतरराष्ट्रीय भावना बढ़ रही है और भारतीय ख़ुद को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं.

लेकिन विदेशों में रह रहे भारतीयों के लिए ये चुटकुला थोड़ा पुराना हो चुका है.

फिलहाल वाशिंगटन पोस्ट में काम कर रहे नीरज चोक्शी कहते हैं, "इस वीडियो को लेकर मुझे कोई शिकायत नहीं- बस यह थोड़ा और बेहतर हो सकता था."

वो कहते हैं, "मैं सोचता हूं कि कई नस्लीय मज़ाक मददगार होते हैं क्योंकि ये उन सांस्कृतिक मानदंडों की व्याख्या करते हैं और नया रूप देते हैं, जिनके बारे में आमतौर पर लोग बात करने से कतराते हैं."

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