यूपीः डॉक्टरों की हड़ताल पर सरकार को नोटिस

  • 5 मार्च 2014
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कानपुर में डॉक्टरों की हड़ताल ने व्यापक रूप ले लिया है जिसके कारण मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई है.

मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने के कारण अब तक कई मरीज़ों की मौत हो चुकी है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ने उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ठप हो गई चिकित्सा व्यवस्था पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए सरकार को नोटिस भेजा है और चार हफ़्तों के भीतर जवाब मांगा है.

कानपुर में यह हड़ताल 28 फ़रवरी को शुरू हुई थी. वाहन टक्कर की एक मामूली घटना के बाद कानपुर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टरों और एक सपा विधायक इरफ़ान सोलंकी के बंदूक़धारियों और समर्थकों के बीच हुई टकराव के बाद डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे.

रोहित घोष, कानपुर

कानपुर में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं. पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे 24 छात्रों को जेल भेज दिया है.

अस्पताल के कर्मचारी वीरेंद्र सिंह का कहना है, "ग्रामीण इलाक़ों से आने वाले मरीज़ों को निराश लौटना पड़ रहा है. अस्पताल में कामकाज ठप है. मरीज़ बिलकुल नज़र नहीं आ रहे."

बीते शुक्रवार को सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के युवा विधायक इरफ़ान सोलंकी और जूनियर डाक्टरों के बीच कहा-सुनी के बाद मेडिकल छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई हुई.

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इस कार्रवाई के विरोध में कानपुर के सभी सरकारी और ग़ैर-सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों को बंद कर दिया गया.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का दावा है कि सभी सरकारी व ग़ैर-सरकारी अस्पताल के साथ-साथ दवाख़ाने भी बंद हैं. इस हड़ताल में सेना के डॉक्टर भी शामिल हो गए हैं.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ देवेन्द्र लालचंदानी ने बीबीसी को बताया, "सभी सरकारी और निजी अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर हैं. निजी क्लिनिक में भी मरीज़ों को देखा नहीं जा रहा है. सेना के डॉक्टरों ने भी काम बंद कर दिया है. हड़ताल देशव्यापी हो चुकी है."

वहीं ज़िला मजिस्ट्रेट डॉ.रोशन जैकब का कहना है, "डॉक्टरों को ज़मानत दे दी गई है, पर वह जेल के बाहर नहीं आ रहे हैं. डॉक्टर अगर काम पर न लौटे तो कड़ी कारर्वाई की जाएगी."

विधायक इरफ़ान सोलंकी कहते हैं, "दो जूनियर डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के पास एक बुज़ुर्ग को मार रहे थे तो मैंने उनका विरोध किया. क्या यह ग़लत था?"

मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र दिनेश गोस्वामी ने कहा, "एक पेट्रोल पंप में विधायक ने अपनी कार का दरवाज़ा ऐसे खोला कि दो जूनियर डॉक्टर उससे टकराने जा रहे थे. इसी बात पर कहा-सुनी हो गई. इरफ़ान सोलंकी के आदमियों ने छात्रों को पीट दिया."

"फिर थोड़ी देर बाद इरफ़ान सोलंकी अपने आदमियों और पुलिस के साथ मेडिकल कॉलेज के कैंपस में घुसे और डॉक्टरों और प्रोफ़ेसरों को मारना शुरू कर दिया."

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डॉ लालचंदानी कहते हैं, ''पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में घुस कर बर्बरता से लड़कों को मारा. दो अपंग हो चुके हैं. कुछ के 40 जगह हड्डियां टूटी हैं. 50-60 लड़के गम्भीर रूप से घायल हैं. नर्सों और महिला छात्रों के साथ अभद्रता की गई है."

कानपुर के कमिश्नर मुहम्मद इफ़्तिख़ारुद्दीन ने कहा, "हम लोग डॉक्टरों से बात कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं. सरकारी डॉक्टर काम पर हैं. सरकारी अस्पताल में लोगों का इलाज चल रहा है."

डॉ लालचंदानी ने इस बात का खंडन करते हुए कहा, "एक भी डॉक्टर, चाहे सरकारी नौकरी करता हो या निजी सेवा देता हो, कोई काम नहीं कर रहा है."

सोमवार शाम प्रशासन ने सभी गिरफ़्तार हुए 24 जूनियर डॉक्टरों की ज़मानत करवा दी. ज़िला अधिकारी ने स्वयं अदालत में पेश हो करके ज़मानत करवाई. पर जूनियर डॉक्टरों ने जेल से ज़मानत पर निकलने से मना कर दिया.

कुमार हर्ष, गोरखपुर

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गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते सन्नाटा पसरा है. गोरखपुर के हृदयस्थल माने जाने वाले गोलघर में अनेक नर्सिंग होमों से भरी गांधी गली में भी शांति छाई हुई है.

यहाँ हमेशा जाम लगा रहता था पर आज बस्ती से अपनी पत्नी को दिखाने आये समर्थ चौधरी को वापस बस स्टेशन जाने के लिए रिक्शा नहीं मिल रहा.

वहां से बमुश्किल सौ मीटर की दूरी पर इंदिरा गांधी की प्रतिमा के नीचे डॉक्टर धरने पर बैठे हुए हैं. वहां बैठे चिकित्सक और नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल कहते हैं, ''अफ़सोस की बात है कि सरकार को मरीज़ों की दुर्दशा मंज़ूर है, मगर अपने विधायक और उनके लोगों की गुंडागर्दी पर कार्रवाई मंज़ूर नहीं है.''

डॉक्टरों की हड़ताल के चौथे दिन निजी चिकित्सक और नर्सिंग होम के साथ पैथोलोजी सेंटर भी साथ आ गए हैं.

हड़ताली डॉक्टरों के आह्वान का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ा है जहाँ ओपीडी प्रभावित हैं.

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हड़ताल के स्वरूप को लगातार विस्तार देने में जुटे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की गोरखपुर इकाई के सचिव डॉ सुधीर कुमार कहते हैं, ''हमारी मांग है कि विधायक इरफ़ान सोलंकी को गिरफ़्तार किया जाए और कानपुर के एसएसपी को निलंबित किया जाए जिन्होंने विधायक के इशारे पर जूनियर डाक्टरों की बर्बर पिटाई की."

डॉ कुमार का कहना है कि गोरखपुर आईएमए के 550 सदस्यों के अलावा इंडियन डेंटल एसोसिएशन के 150 से ज़्यादा सदस्य भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं.

हालांकि सोमवार देर रात और मंगलवार को दिन भर हड़ताल ख़त्म करने की कोशिशें जारी रहीं पर गतिरोध टूटता नहीं दिख रहा.

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