घर में घुसा तेंदुआ, घरवाले हुए बाहर

मुंबई में तेंदुए को पकड़ी पुलिस इमेज कॉपीरइट Anagha Sakhare.

मुंबई में ठाणे इलाक़े के वसई स्थित फादरवाड़ी चाल में बुधवार सुबह क़रीब छह बजे एक तेंदुआ एक घर में घुस गया जिसके बाद मानो पूरे इलाक़े में खलबली मच गई.

घर में तेंदुए के घुसने की ख़बर पाते ही दमकल विभाग और वन विभाग के अधिकारी तुरंत अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और तेंदुए को पकड़ने की योजना बनाने लगे.

यह ख़बर जब मुझे मिली तो मैं भी फादरवाड़ी चाल में पहुंची. मैंने वहां देखा कि हज़ार से भी ज़्यादा लोग भीड़ लगा कर खड़े हैं.

इन लोगों में बच्चे, बड़े, बूढ़े और औरतें सभी शामिल थीं. जैसे मानो कोई सर्कस चल रहा हो. बच्चों से लेकर बड़े तक सभी अपने हाथों में मोबाइल लिए खड़े थे. अपने-अपने तरीक़े से इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरे में क़ैद करना चाहते थे.

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लोग ख़ुशी से यह पूरा तमाशा सात घंटों से देख रहे थे. इस तेंदुए को देखने के चलते इस इलाक़े के कई बच्चे तो स्कूल ही नहीं गए.

लोगों का जमावड़ा

वक़्त बीतने के साथ लोगों का जमावड़ा बढ़ता गया. मैंने देखा कि किस तरह से वन विभाग के अधिकारी और वसई विरार महानगर पालिका के दमकल कर्मचारी तेंदुए को पकड़ने के लिए ज़रूरी क़दम उठा रहे थे.

लेकिन घनी आबादी वाला इलाक़ा होने के कारण अधिकारी बड़ी सावधानी से हर क़दम उठा रहे थे. लोगों के मुताबिक़ सुबह छह से सात बजे के क़रीब उन्होंने तेंदुए को फादरवाड़ी इलाक़े में घूमते देखा. इसके बाद ये बात आग की तरह पूरे इलाक़े में फैल गई. हर तरफ भय का माहौल बन गया.

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मगर इसी बीच लोगों को पता चला कि तेंदुआ सड़क के किनारे रहने वाले विजय भरकुंड के घर में घुस गया है. विजय के घर वालों ने समझदारी दिखाते हुए घर का दरवाजा बंद कर दिया और तुरंत अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दी.

इस दौरान किसी भी व्यक्ति के ज़ख्मी होने की कोई खबर नहीं आयी. वन अधिकारी तेंदुए को पकड़ने में लगे हुए थे.

मैंने देखा कि लोग किस तरह पेड़ों पर चढ़कर या दूसरों के घरों की छतों पर चढ़कर यह पूरा दृश्य देख रहे थे.

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पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी लोग पीछे नहीं हट रहे थे. इस कारण पुलिस वालों ने लाठियां भांज कर उन्हें धमकाया.

वन विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुए पर दूर से फेंक कर नशीला इंजेक्शन दिया. इसके बाद तेंदुआ बेहोश हो गया.

पुलिस की कमी

जब मैंने वन विभाग के निरीक्षक मनोहर आहिरे से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बेहोश करना बहुत ज़रूरी था क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि तेंदुआ किसी भी तरह यहाँ के स्थानीय लोगों को परेशान करे.

उन्होंने बताया, "हमें ऐसा करने में आठ घंटे लगे. इतना वक़्त इसलिए लगा क्योंकि यहां लोग बहुत ज़्यादा थे, जबकि जितनी पुलिस होनी चाहिए उतनी नहीं मिली."

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जल्द ही मुंबई में राहुल गांधी की रैली होने वाली है और उसके बंदोबस्त में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी लगे हुए हैं.

मैंने अपने आसपास नज़र डाली तो पाया कि यहां गिने चुने तीन या चार ही पुलिसकर्मी मौजूद थे.

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विजय भरकुंड और उसका परिवार दूर खड़े होकर सब देख रहा था. उन्हें तेंदुए से ज़्यादा अपने घर की चिंता हो रही थी.

खैर... इसके बाद तेंदुए को बाहर निकालकर वन विभाग की गाड़ी में बेहोशी की हालत में डाल दिया गया.

गाड़ी के जाते ही एक मिनट के भीतर भीड़ गायब हो गई. लोग ऐसे चले गए कि मानो यहां कुछ हुआ ही नहीं हो.

घरवालों की पीड़ा

पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने एक बार भी उस गरीब परिवार से इतना तक नहीं कहा कि अब चिंता की कोई बात नहीं है. तेंदुआ निकाल लिया गया है.

विजय भरकुंड इस परिवार के सबसे बड़े सदस्य और कमाने वाले अकेले व्यक्ति है. उन्होंने मुझे बताया कि वो सुबह छह बजे मज़दूरी के लिए गए थे. तेंदुए को सबसे पहले उनकी पत्नी ने देखा और वो अपनी चार साल की बेटी को लेकर घर से बाहर आ गईं और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया.

विजय की पत्नी कविता ने कहा, "वन विभाग और दूसरे कर्मचारियों ने हमारे घर का सामान इधर-उधर कर दिया. घर के सभी बर्तन और सामान बिखरा हुआ था. ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि कितना नुकसान हुआ."

विजय कहते हैं, "हमारा जितना नुकसान तेंदुए ने नहीं किया उससे ज़यादा नुकसान तो लोगों ने किया. घर की छत तोड़ दी.

वो आगे कहते हैं, "चलो जो हुआ सब ठीक है. बस यही कहना चाहेंगे कि आज हमारे साथ जैसा हुआ, वैसा किसी के साथ न हो. मैडम, सरकार को कुछ ठोस क़दम उठाने चाहिए. हम बस इतना ही कहेंगे. और लोगो से हाथ जोड़ कर विनती करते है कि यहाँ से चले जाए. हम लोग सुबह से बिना खाये पिए है. बच्चे भूखे हैं. हमें आराम करने दें."

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