अंसल बंधुओं की सज़ा की अवधि पर 'मतभेद'

सुप्रीम कोर्ट इमेज कॉपीरइट AFP

साल 1997 में दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोपाल अंसल और सुशील अंसल को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया है.

हालांकि अंसल बंधुओं को दी जाने वाली सजा की अवधि पर दो न्यायाधीशों की खंडपीठ की राय अलग-अलग थी.

दोनों न्यायाधीशों की राय में अंतर होने के कारण सजा की अवधि का मसला तीन जजों की खंडपीठ को सौंप दिया गया है.

दिल्ली की एक अदालत ने नवंबर 2007 में सुशील अंसल और गोपाल अंसल को दो-दो साल की सजा सुनाई थी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2008 में इसे घटाकर एक-एक साल कर दिया था.

अंसल बंधु दोषमुक्त किए जाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट गए थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें सिनेमा देखने आने वालों की सुरक्षा से ज्यादा पैसों की चिंता थी.

अदालत ने कहा, "उपहार सिनेमाघर के मालिकों द्वारा कानून की अनदेखी के कारण ही लोगों की जानें गईं."

हादसा

तेरह जून, 1997 को दक्षिणी दिल्ली के पॉश इलाके ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमाघर में जेपी दत्ता की मल्टीस्टारर फिल्म 'बॉर्डर' देखने के लिए भारी भीड़ जुटी थी.

एकाएक सिनेमाघर से काला धुंआ और आग की लपटें उठने लगीं. इससे पहले कि लोग कुछ सोच पाते, आग ने उन्हें घेर लिया.

इस हादसे में 59 लोग मारे गए थे जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे. हादसे में 100 से अधिक लोग बुरी तरह घायल हो गए थे.

मारे गए लोगों के परिजनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद दिल्ली सरकार, अंसल बंधु, सिनेमाघर के मालिक के ख़िलाफ़ मामले दर्ज हुए थे.

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