'दस मिनट में पैकिंग करो और निकलो यहां से'

 मेरठ के सुभारती विवेकानंद विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्र इमेज कॉपीरइट Reuters

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों पर दर्ज एफ़आईआर से देशद्रोह का केस हटा लिया गया है. लेकिन ये सभी छात्र डरे हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि इन छात्रों को प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत सुभारती विश्वविद्यालय में भर्ती किया गया था. 2010 में घाटी में हुए कई प्रदर्शनों के बाद कश्मीरी युवकों को भारत के कई कॉलेजों में दाख़िला देने की योजना बनाई गई थी. कश्मीर के ये छात्र इसी योजना के तहत मेरठ में पढ़ रहे थे.

इनमें से एक छात्र ने श्रीनगर स्थित बीबीसीसंवाददाता रियाज़ मसरूर से बातचीत के दौरान दावा किया, "हमें दस मिनट दिए गए कि दस मिनट में पैकिंग करो और निकले यहां से. वर्ना हमें ज़ोर ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी."

घाटी पहुंचने पर इन छात्रों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने हिंसा भड़काई, हॉस्टल में तोड़फोड़ की और कैंपस में सांप्रदायिक दंगे करने का प्रयास किया, उनको कोई सज़ा नहीं मिली, लेकिन कश्मीरियों पर देशद्रोह का मुक़दमा, कैंपस से निष्कासन और नक़द जुर्माना कर दिया गया.

इनमें से एक छात्र ने कहा, "अगर हम दहशतगर्द हैं तो फिर हमें कश्मीर से बाहर क्यों भेजा जाता है. हम सरकार से केवल यही अपील करना चाहते हैं कि हमारा करियर बचना चाहिए."

इस छात्रों ने स्थानीय सरकार ने भी मदद की अपील की है.

देशद्रोह का मुक़दमा

इससे पहले मेरठ के ज़िलाधिकारी पंकज यादव ने बीबीसीसंवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली से बातचीत के दौरान कहा कि पुलिस की जांच में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए में छात्रों के ख़िलाफ़ किसी तरह का कोई साक्ष्य नहीं पाया गया है. उनके अनुसार इसीलिए पुलिस ने प्राथिमिकी से ये चार्ज हटाने का फ़ैसला किया.

हालांकि ज़िलाधिकारी का कहना था कि छात्रों के ख़िलाफ़ दूसरे मामलों में मुक़दमे जारी रहेंगे.

इन छात्रों पर पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने और दूसरे मामलों में कुलपति की शिकायत पर थाने में मामला दर्ज किया गया था.

पिछले रविवार को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान विश्वविद्यालय के कुछ कश्मीरी छात्रों को कथित तौर पर पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने और हॉस्टल की संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने के आरोप में निलंबित किया गया था.

इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट किया, "कश्मीरी छात्रों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला एक अस्वीकार्य और कड़ी सज़ा है जो उनका भविष्य ख़त्म कर देगा और उन्हें विमुख कर देगा."

प्रतिक्रिया

उन्होंने एक और ट्वीट कर कहा, "मुझे यक़ीन है कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए विश्वविद्यालय को जो ज़रूरी लगा उसने वह किया लेकिन यूपी सरकार की यह कार्रवाई अवांछित है और इसे वापस लिया जाना चाहिए."

उमर अब्दुल्लाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात करके देशद्रोह का मामला हटाने की मांग की थी. बाद में उन छात्रों पर से देशद्रोह का मुक़दमा हटाए जाने के बाद उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट करके अखिलेश यादव का शुक्रिया अदा किया.

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि छात्रों के निलंबन में प्रशासन और पुलिस की तरफ़ से कोई दबाव और भूमिका नहीं रही है.

विश्वविद्यालय के 67 कश्मीरी छात्रों को निलंबित किए जाने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी थी.

इससे पहले मेरठ के ज़िला अधिकारी पंकज यादव ने बीबीसी को बताया था कि मामले की जाँच अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है जो 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे.

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