समझौता एक्सप्रेस से 11 पिस्तौल बरामद, छह गिरफ्तार

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पाकिस्तान से आई समझौता एक्सप्रेस पर सवार छह यात्रियों के पास से 11 पिस्तौल और 22 कारतूस बरामद किए गए हैं. इन सभी यात्रियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

जम्मू से पत्रकार बीनू जोशी ने पंजाब पुलिस के हवाले से बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोग भारतीय नागरिक हैं और वे सभी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर के रहने वाले हैं.

उन छह लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं.

ये लोग गत 13 फ़रवरी को अपने रिश्तेदारों से मिलने लाहौर गए थे.

पंजाब पुलिस ने बताया कि पाकिस्तान में बनी इन पिस्तौलों और कारतूस को जूसर मशीनों में छिपाकर रखा गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कस्टम विभाग के उपायुक्त गुरदेव सिंह ने कहा, "इन मशीनों को जब एक्स-रे से गुज़ारा गया तो कुछ संदेह पैदा हुआ. उसके बाद जब इन मशीनों को काटा गया तो उनमें से पिस्तौल निकले. कुल 11 मशीनों में से 11 पिस्तौल बरामद की गई. इस बारे में जाँच जारी है."

अटारी रेलवे स्टेशन

सूत्रों के अनुसार ख़ुफ़िया विभाग को जानकारी मिली थी कि मुज़फ़्फ़रनगर के कुछ लोगों का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी के लिए किया जा सकता है. मुज़फ़्फ़रनगर में पिछले साल सितंबर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे.

इन छह लोगों को गुरुवार दोपहर 1.30 बजे तब गिरफ़्तार किया गया जब समझौता एक्सप्रेस अटारी रेलवे स्टेशन पर खड़ी थी. समझौता एक्सप्रेस दिल्ली से अटारी और फिर वाघा से लाहौर जाती है. यह ट्रेन हफ़्ते में दो बार चलती है.

ख़ुफ़िया ब्यूरो के अधिकारियों ने सभी छह लोगों से देर रात तक पूछताछ की.

उन्हें शुक्रवार को अमृतसर की अदालत में पेश किया जाएगा.

अटारी पाकिस्तान की सीमा से तीन किमी और अमृतसर से 25 किमी दूर स्थित है.

समझौता एक्सप्रेस

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अधिकारियों ने बताया है कि गिरफ़्तार किए गए सभी छह लोगों की योजना बस से दिल्ली जाने की थी और फिर उन्हें वहां से उत्तर प्रदेश जाना था.

पिछले साल सितंबर में मुज़फ़्फ़रनगर में दंगा हुआ था. इन दंगों के दौरान राज्य सरकार के अनुसार कुल 68 लोग मारे गए थे तथा हज़ारों लोगों को वहां से अपना घर छोड़ कर जाना पड़ा था.

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अक्तूबर में दावा किया था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने मुज़फ़्फ़रनगर के दंगा पीड़ित युवाओं से संपर्क साधने की कोशिश की थी. हालांकि अधिकारियों ने इस तरह की कोई सूचना होने से इंकार किया था.

समझौता एक्सप्रेस भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते के बाद जून, 1976 में शुरू की गई थी.

साल 2001 में संसद पर हमले के बाद यह ट्रेन सेवा रोक दी गई थी लेकिन 2004 में इसे फिर शुरू किया गया.

समझौता एक्सप्रेस में 18 फ़रवरी 2007 को विस्फोट हुआ था जिसमें 68 लोग मारे गए थे.

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