चुनाव से पहले बंगलौर की रातें हुईं जवान

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इसमें कोई शक नहीं कि हालात के हिसाब से सोच बदलती है. इस बात को लेकर ठीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि पिछले नौ सालों के दौरान राजनीतिक दलों के बारे में युवाओं की सोच कितनी बदली है.

लेकिन इतना तो तय है कि युवा मतदाताओं की चुनाव में हिस्सेदारी में हुई भारी बढ़ोत्तरी के चलते सत्ताधारी पार्टी की सोच बदली है.

इसे आम चुनाव में फ़ायदा उठाने को लेकर उठाया गया क़दम माना जा सकता है.

बंगलौर को भारत में पबों का शहर भी कहा जाता है. यहां ड्रिंक या खाने के पहले या दूसरे ऑर्डर के बाद ही पब और बार और यहां तक कि रेस्तराँ भी बंद करना पड़ता था. हालांकि इस सप्ताहांत शहर की तस्वीर बदली हुई थी.

शहर में रेस्तराँ रात एक बजे तक खोलने की इज़ाजत मिल गई है, जबकि पहले उन्हें रात 11 बजे तक बंद करना पड़ता था.

इसी तरह शुक्रवार और शनिवार को पब और बार भी रात में एक बजे तक खुल सकेंगे.

पिछले आदेश पुलिसकर्मियों की कमी के चलते दिए गए थे, लेकिन नए नियम बता रहे हैं कि अब हालात बदल चुके हैं.

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'राजनीतिक कदम'

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एक ब्रांड सलाहकार हरीश बिजूर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "साफ़ तौर पर यह चुनाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया राजनीतिक क़दम है. हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की मांग आईटी क्षेत्र और दूसरे उद्योगों से अलग नहीं है. पुलिस हमेशा कहती थी कि उसके पास स्टाफ़ की कमी है."

बिजूर एक सीधा सा तर्क देते है. उनके मुताबिक़, "भारत की आबादी का 54 प्रतिशत हिस्सा 25 साल से कम उम्र का है. लेकिन बंगलौर अलग है. यहां युवा आबादी की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है. इस तरह ये भारत का सबसे युवा शहर है."

युवाओं ने प्रशासन के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. एक मल्टी-नेशनल कंपनी में विज्ञापन अधिकारी अनिर्बाण मुखर्जी ने बताया, "ये बहुत ही बढ़िया फ़ैसला है. पिछले कुछ सालों के दौरान हम शहर में पब का मतलब भी भूल गए थे. अब उनके देर रात तक खुले रहने से उस लोगों की आवक बढ़ेगी जो देर रात तक काम करते हैं और उसके बाद थकान उतारना चाहते हैं."

तो क्या अब पब, बार और रेस्तराँ के मालिक भी झूम उठे हैं?

बार और रेस्टोरेंट एसोसिएशन के आशीष कोठारे बताते हैं, "मैं नहीं सोचता हूं कि इससे सिर्फ हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र को ही फ़ायदा मिलेगा. इससे बंगलौर शहर को भी फ़ायदा मिलेगा. इस फ़ैसले के बाद कमाई कम से कम 15 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी. ये आंकड़ा 20-25 प्रतिशत तक भी जा सकता है."

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बदलाव

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कोठारे ने बताया, "हमने इंतजार करने की नीति को अपनाया था. मांग बढ़ने के साथ ही कई चीजों में बदलाव आएगा. जैसे कर्मचारियों के लिए तीसरी शिफ्ट या सुरक्षा कर्मचारियों की ज़रूरत. इस बारे में निर्णय लेने में हमें दो से तीन सप्ताह लगेंगे."

लेकिन इस फ़ैसले का असर केवल निजी क्षेत्र पर ही नहीं होगा. पुलिस इसके लिए 2,000 जवानों की भर्ती करेगी और उसे पेट्रोलिंग वाहन ख़रीदने के लिए पांच करोड़ रुपए दिए गए हैं.

बंगलौर के पुलिस आयुक्त राघवेंद्र औरधकर ने बताया, "रात में काम करने वाले पुलिसकर्मियों को दो घंटे अतिरिक्त काम करना पड़ेगा. शुक्रवार और शनिवार को पेट्रोलिंग के लिए हमने नई योजना बनाई है, जब पब और बार रात में एक बजे तक खुलेंगे."

एक सवाल ये भी है कि क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने वालो के साथ ट्रैफिक पुलिस कुछ उदारता बरतेगी?

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पुलिस की सख्ती

औरधकर इस बारे में साफ़ तौर से बताते हैं, "शराब पीकर गाड़ी चलाने से जान जोखिम में पड़ती है. इसको लेकर हम सख्त हैं और आगे भी सख्त रहेंगे. इस बारे में कोई उदारता नहीं दिखाई जाएगी."

तो क्या ऐसे में मजा कुछ किरकिरा नहीं हो जाएगा?

इस पर वो कहते हैं, "हम मौज मस्ती को कम नहीं कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि किसी की जान न जाए."

राज्य सरकार ने नए नियमों की अनुमति प्रयोग के तौर पर केवल तीन महीनों के लिए दी है.

कोठारे संभावना जताते हैं कि ऐसे में टैक्सी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों के साथ पब और बार का गठजोड़ बढ़ेगा. वह कहते हैं, "हमारे कई लोगों ने टैक्सी-ऑन-कॉल के साथ समझौता किया है. हमने उनसे कहा है कि हमें प्राथमिकता के आधार पर टैक्सी मुहैया करानी चाहिए."

बिजूर इस चेतावनी से सहमत हैं. वह कहते हैं, "यह ज़रूरी है कि युवा ज़िम्मेदार हों. रात की जीवनशैली ज़िम्मेदारी के साथ आती है. सरकार चाहे तो इस फ़ैसले को रातोंरात वापस ले सकती है, उसे कोई दिक़्क़त नहीं होगी."

कोठारे बिजूर से सहमत हैं. वह कहते हैं, "जब कारोबार बढ़ेगा तो ज़ाहिर है हमारी मौज होगी, वर्ना नुकसान हमारा ही होगा."

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