"भड़काऊ भाषणों पर दिशा-निर्देश बनाए विधि आयोग"

  • 12 मार्च 2014
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सुप्रीम कोर्ट ने आज राजनीतिक पार्टी के नेताओं, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के द्वारा भड़काऊ भाषण देने के मामले में दायर याचिका पर विधि आयोग को दखल देने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने भड़काऊ बयान को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार करने की बात भी कही है. यह आदेश ऐसे वक़्त आया है, जब लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनेताओं में वोटरों को रिझाने की होड़ लगी है.

एक ग़ैरसरकारी संगठन "प्रवासी भलाई संगठन" ने जनहित याचिका दायर की थी. इसकी सुनवाई के दौरान बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिशा-निर्देश तैयार करने को इंकार कर दिया.

और आयोग को इस पर ग़ौर करने और केंद्र सरकार को अपनी सिफ़ारिश देने के लिए कहा.

प्रवासी भलाई संगठन का कहना है कि इस तरह के भड़काऊ भाषण लोकतंत्र का ताना-बाना तोड़ते हैं और संविधान की प्रस्तावनाओं के ख़िलाफ़ है.

इस जनहित याचिका में दो राज्यों महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश को कथित भड़काऊ भाषण की घटनाओं के गवाह के रूप में उत्तरदाताओं के रूप में नामित किया गया था.

भड़काऊ भाषण

याचिका में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के कथित भड़काऊ भाषण का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि इस मामले में उनके ख़िलाफ़ राज्य में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी.

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Image caption राज ठाकरे ने कई बार पर बिहार और उत्तर प्रदेश निवासियों के प्रति विवादास्पद बयान दिए हैं.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने कई बार पर बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासियों के प्रति विवादास्पद बयान दिए हैं.

अपने एक विवादास्पद बयान में राज ठाकरे ने कहा था कि 'सभी बलात्कार-बलात्कार चिल्ला रहे हैं लेकिन सभी बलात्कारी बिहार के हैं, यह कोई नहीं कह रहा है.'

राज ठाकरे ने जनवरी 2012 में उत्तर भारतीयों पर प्रहार करते हुए कहा था कि 13 जुलाई 2011 के मुंबई हमलों के मामले में बिहार के कथित चरमपंथियों का ग़िरफ़्तार किया जाना ये दर्शाता है कि इस हमले का बिहार से संबंध था.

जनहित याचिका के मुताबिक़ आंध्र प्रदेश में, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था और उनके लिए उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद, उन्होंने फिर से महाराष्ट्र के नांदेड़ में भी इसी तरह का भाषण दिया था.

राज्य के चंद्रायनगट्टा इलाके से विधायक रहते हुए अकबरुद्दीन पर राज्य के कई इलाकों में जाकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले भाषण देने के आरोप हैं.

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