तरुण तेजपाल की ज़मानत याचिका ख़ारिज

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यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ़्तार किए गए तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल फ़िलहाल जेल से रिहा नहीं हो पाएंगे. उनकी ज़मानत याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने ख़ारिज कर दिया है. तेजपाल बीते नवंबर से जेल में हैं.

इस मामले में गोवा पुलिस उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल कर चुकी है. तरुण तेजपाल पर अपने ही संस्थान की एक महिला पत्रकार से दुष्कर्म का आरोप है.

तरुण तेजपाल ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हैं, इसलिए उन्हें ज़मानत दे दी जाए. कोर्ट ने उन्हें ज़मानत तो नहीं दी, लेकिन बीमार मां से मिलने की इजाज़त दे दी है.

तेजपाल की मां पणजी के अस्पताल में भर्ती हैं. तेजपाल ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी मां शकुंतला तेजपाल को ब्रेन ट्यूमर है और वो अपने जीवन की अंतिम अवस्था में हैं.

इस पर अदालत ने जेल अधीक्षक से कहा कि वो तेजपाल को ले जाकर उनकी मां से मिलवाएं.

गंभीर आरोप

तरुण तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ़्तार किया गया था. उन पर आईपीसी की धारा 341 (ग़लत तरीक़े से नियंत्रण), धारा 342 (ग़लत तरीक़े से बंधक बनाना), धारा 354-ए (किसी महिला के साथ यौन दुर्व्यवहार और शीलभंग की कोशिश), धारा 376 (बलात्कार) लगाई गई है.

तेजपाल पर आपराधिक क़ानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 की धारा 376 (2)(के) के तहत भी आरोप लगाया गया है, जिसका मतलब है कि एक ऐसे व्यक्ति के द्वारा बलात्कार की कोशिश जो महिला पर दबाव बनाने में सक्षम हो.

उन पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उन्होंने एक ऐसी महिला के साथ बलात्कार को कोशिश की जो उन्हें अपना संरक्षक मानती थी.

अगर तेजपाल इन आरोपों में दोषी पाए जाते हैं तो तेजपाल को सात वर्ष से अधिक की सज़ा हो सकती है.

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