दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म: दो दोषियों की मौत की सज़ा पर रोक

  • 16 मार्च 2014
फ़ाइल फ़ोटो
Image caption दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे

दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के चार में से दोषियों की मौत की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक के लिए रोक लगा दी है.

इससे पहले, निचली अदालत ने इन दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई थी जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने बरक़रार रखा था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अवकाश के दिन मामले पर आपात सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने शनिवार को कहा, ''हम मुकेश और पवन की मौत की सज़ा पर 31 मार्च 2014 तक के लिए रोक लगाते हैं.''

मौत की सज़ा पर रोक लगाने की याचिका वक़ील एमएल शर्मा ने दायर की थी. पीठ ने जब शर्मा से यह जानना चाहा कि क्या वे सभी चारों दोषियों की ओर से याचिका दायर कर रहे हैं, शर्मा ने कहा कि वह केवल मुकेश और पवन की पैरवी कर रहे हैं.

मुकेश (27) और पवन (20) के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्षय ठाकुर (29) और विनय शर्मा (21) की मौत की सज़ा को क़ायम रखा था.

तब हाईकोर्ट ने उनकी अपील ख़ारिज़ करते हुए सामूहिक बलात्कार और पीड़िता की हत्या के जुर्म को अपने क़िस्म का दुर्लभ मामला बताया था.

दिल्ली में बलात्कार और हत्या की यह घटना 16 दिसम्बर 2012 की है. पीड़ित लड़की पैरामेडिकल की छात्रा थी जिसके साथ छह लोगों ने चलती बस में दुष्कर्म किया और उसके साथ बर्बरता से पेश आये थे.

पीड़ित लड़की ने 29 दिसम्बर को इलाज के दौरान सिंगापुर में दम तोड़ दिया था. इस मामले के एक प्रमुख अभियुक्त राम सिंह को बीते साल मार्च में दिल्ली की तिहाड़ जेल में मृत पाया गया था.

छठा अभियुक्त एक किशोर था जिसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अधिकतम तीन वर्ष की सज़ा सुनाई है.

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