केजरीवाल संग डिनर, पर मिला क्या ?

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आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने चुनावी चंदा जुटाने के लिए अब तक दो डिनर पार्टियों को संबोधित किया है. बंगलौर में हुए दूसरे डिनर में उन्हें नागपुर में हुए पहले डिनर से ज़्यादा फंड मिला. लेकिन इस दूसरे डिनर में उन्हें कुछ मुश्किल सवालों का भी सामना करना पड़ा.

केजरीवाल ने पहला डिनर नागपुर में संबोधित किया था. डिनर में शिरकत करने वाले आमंत्रितों ने एक डिनर के लिए 20,000 रुपये चुकाए हैं जबकि इसकी क़ीमत आम आदमी पार्टी के शुभचिंतकों और डिनर के आयोजकों को महज 650 रुपये पड़ी है.

आम आदमी पार्टी के 'वेल विशर ऑफ आप' के मुख्य आयोजनकर्ता डॉ. राधाकृष्णा ने रविवार की सुबह बीबीसी हिंदी से कहा, "लगभग 200 लोग डिनर में शामिल हुए हैं. हमने 50 लाख से ज़्यादा रुपये जुटाए हैं क्योंकि कुछ लोगों ने 20,000 रुपये से ज़्यादा की रक़म चुकाई है."

राधाकृष्णा को अभी और पैसे चंदे के रूप में मिलने की उम्मीद है.

वे कहते हैं, "कुछ ऐसे लोग भी हैं जो डिनर में नहीँ आ पाए. उन्होंने चंदा देने का वादा किया है. हमें उम्मीद है कि यह रक़म 55 लाख रुपये तक हो जाएगी."

केजरीवाल ने शनिवार को बंगलौर और पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोईली के निर्वाचन क्षेत्र चिकबालापुर में दो दिनों का रोड शो शुरू किया है.

उनके मुंबई के अनुभव के विपरीत यहां पर रोड शो बिना किसी परेशानी के रहा लेकिन उनका फंड जुटाने वाला डिनर उतना आसान नहीं रहा.

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एडुस्पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक सौमील मजमुदार ने कहा, " सब महसूस कर रहे है कि वह अच्छा कर रहे थे लेकिन उनको अपना तरीका बदलना पड़ेगा, कुछ व्यावहारिकता ज़रूरी है."

मजमुदार ने कहा, " हमारे सवाल उन्हें क्या करना चाहिए के बारे में थे. उन्हें बताया गया था कि कैसे बात करना है. अपने जवाब में, कभी कभी महसूस होता था कि वह अपने आप को सही ठहरा रहे हैं. "

स्थाई सरकार

मजमुदार अपने मन के कुछ संदेह स्पष्ट करने के लिए डिनर पर आए थे. डिनर के बाद उनका कहना था, " केजरीवाल लंबे समय तक टिकने वाले हैं कम से कम, वह अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहे हैं. "

एक बैंकर मुकेश सिन्हा ने कहते हैं, "डिनर का माहौल अच्छा था लेकिन ज़्यादातर सवाल इससे जुड़े थे कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा क्यों दिया. उन्होंने इसके कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि लोकपाल बिल पास हुए बिना उनके मुख्यमंत्री पद पर बना रहना संभव नहीं था क्योंकि उनकी पार्टी का मुख्य उद्धेश्य भ्रष्टाचार का विरोध है."

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Image caption डिनर में शिरकत करने वाले आमंत्रितों ने एक डिनर के लिए 20,000 रूपए चुकाए हैं

कुछ सवाल बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ केजरीवाल के अभियान से भी जुड़े थे.

केजरीवाल के पार्टी की आर्थिक नीति क्या होगी इसपर भी सवाल खड़े किए गए. सिन्हा और मजमुदार दोनों ने कहा कि केजरीवाल ने अपनी पार्टी की आर्थिक नीतियों पर बात नहीं किया.

सिन्हा और मजमुदार ने कहा, केजरीवाल ने अपने पार्टी के आर्थिक नीतियों के बारे में चर्चा नहीं की.

लेकिन इस डिनर से ठीक पहले केजरीवाल ने एक 7-स्टार होटल में विभिन्न कंपनियों के सीईओ और अध्यक्षों के संगठन यंग प्रेसिडेंट ऑर्गेनाइजेशन(वाईपीओ) के साथ डिनर किया. इस डिनर में उन्होंने इस आर्थिक मसले पर चर्चा की.

वाईपीओ के साथ डिनर में स्थाई सरकार से संबंधित एक आलोचनात्मक सवाल पर केजरीवाल सहमत नहीं दिखे.

उन्होंने कहा, "हमारे पास 10 सालों से एक स्थाई सरकार है. इस सरकार को संसद में भी पर्याप्त समर्थन प्राप्त था. मैं सहमत हूं कि हम स्थाई सरकार नहीं दे सकते लेकिन हमारा उद्देश्य एक ईमानदार सरकार देना है. हम इसपर समझौता नहीं कर सकते."

वाईपीओ के डिनर में भाग लेने वाले वाईपीओ की नीति के अनुसार अपना नाम जाहिर करने को तैयार नहीं थे. लेकिन, नाम न छापने की शर्त पर बात करते हुए उनमें से कुछ लोगों ने केजरीवाल के दिए गए बयान की पुष्टि की.

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