बनारस में केजरीवाल की ज़मानत ज़ब्त होगीः रामदेव

बाबा रामदेव इमेज कॉपीरइट AFP

बाबा रामदेव ने उन ख़बरों का खंडन किया है जिनमें उनके हवाले से कहा गया था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए उतावले हो गए हैं.

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज पाशा ने नागपुर में मौजूद बाबा रामदेव से होली के दिन बात की और देश के मौजूदा राजनीतिक पर उनके विचार जानने की कोशिश की.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

क्या भ्रष्ट उम्मीदवारों को टिकट देने पर आपको ठेस पहुँची हैं?

मैं पहले भी यह कहता रहा हूँ, आज भी कह रहा हूँ और हमेशा कहूँगा कि भ्रष्ट उम्मीदवारों को टिकट नहीं देना चाहिए. लेकिन इस बहाने से आज मेरे और मोदी के संबंधों में दूरियों के बारे में बकवास ख़बरें चलाई गई हैं. मैं उन सबका खंडन करता हूँ. मैंने यह कहा था कि भारत जिस राजनीतिक अराजकता के दौर से गुज़र रहा है उसमें मोदी ही एकमात्र विकल्प है लेकिन ख़बर ये चला दी गई कि मोदी पीएम बनने के लिए उतावले हैं. यह झूठी बात है.

आप भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हैं या बीजेपी के साथ हैं आँख मूँद के?

मैं सबसे पहले मोदी के साथ हूँ. फिर बीजेपी, शिवसेना और एनडीए के साथ हूँ. लेकिन मेरा साथ शर्त और मुद्दों पर आधारित है. मेरा समर्थन बिना शर्त नहीं है. राजनीति में उनकी बहुत मजबूरियाँ हो सकती हैं लेकिन मेरी कोई मजबूरी नहीं हैं. लेकिन मैं यह चाहता हूँ कि एनडीए को कोई नुक़सान न हो. यदि उसमें कुछ उन्नीस-बीस होता है तो मैं उसे राष्ट्रहित में अनदेखा करना चाहता हूँ. और मुझे अनदेखा करना भी पड़ सकता है क्योंकि यदि मोदी 300 सांसदों के साथ नहीं पहुँचते हैं तो कालेधन, भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन के लिए हम जिन नीतियों की बात कर रहे हैं वह कैसे आएंगी.

क्या भ्रष्टाचार का समर्थन आदर्शवाद से समझौता नहीं हैं?

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

आदर्शवाद को मैंने सिर्फ़ कहा नहीं है जिया है. राजनीति का शुरू से इतिहास रहा है कि उसमें सबकुछ शुभ नहीं होता हैं उसमें ये अपेक्षा करना कि सबकुछ सौ प्रतिशत शुद्ध होगा यह वैचारिक और सैद्धांतिक तौर पर सही है. मैं राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं इसलिए आदर्शवाद को नहीं छोड़ूंगा लेकिन राष्ट्रहित में जो भी ज़रूरी होगा मैं वह करूंगा.

आप कह रहे हैं कि आदर्शवाद को नहीं छोड़ेंगे ऐसे में येदियुरप्पा या श्रीरामुलू का समर्थन धर्मसंकट नहीं है?

मेरे लिए सबसे बड़ी बात इस समय कांग्रेस के कुशासन से देश को मुक्ति दिलाना और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना है. यदि कोई भ्रष्ट व्यक्ति एनडीए या बीजेपी की ओर से संसद में चला गया तो उस पर भी कार्रवाई होगी. जिन मुद्दों की मैं बात कर रहा हूँ उनके पूरा होने पर कोई भी भ्रष्ट व्यक्ति क़ानून के शिकंज़े से बच नहीं पाएगा.

क्या बनारस जाकर मोदी का प्रचार करेंगे?

इमेज कॉपीरइट AP

मैं भी जा सकता हूँ. बनारस में केजरीवाल की ज़मानत ज़ब्त होगी. उनको समाजवादी पार्टी, जिसे वह भ्रष्ट बताते थे, कांग्रेस जो दुनिया की सबसे भ्रष्ट पार्टी है, उन दोनों के समर्थन के बाद भी उनकी ज़मानत ज़ब्त होने वाली है. यदि केजरीवाल भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक योद्धा के रूप में लड़ना चाहते थे उनको सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी, पवन बंसल, कपिल सिब्बल, ए राजा या कनिमोई के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ना चाहिए था.

यदि बीजेपी की ओर से भ्रष्ट नेता संसद पहुँचे तो भी क्या भ्रष्टाचार का विरोध करेंगे?

ऐसा नहीं होगा लेकिन यदि कोई अनहोनी हो गई तो फिर देखा जाएगा.

आज की राजनीति पर क्या कहेंगे?

राजनीति नीतियों के लिए होनी चाहिए. दुर्भाग्य से पिछले 67 सालों में राजनीति नीतियों के बजाए अपनी जेब भरने के लिए, ख़ुद को बनाने के लिए, अपनी पार्टी को बनाने के लिए हो रही है और मोदी के आने के बाद देश की नीतियाँ बदलेंगी, नेतृत्व बदलेगा, नीयत बदलेगी. मोदी के आने से भारत की फ़िज़ा बदल सकेगी. इसलिए देश के लोगों को एक मौक़ा मोदी को भी देना चाहिए. हमने इतने प्रयोग किए हैं पिछले 67 सालों में तो यह भी एक प्रयोग करना चाहिए. मोदी एक साहसी व्यक्ति है. मुझे मोदी का सबसे प्रिय स्वभाव यह लगा है कि लोग कहते हैं कि मोदी किसी की नहीं सुनते तो मैं कहता हूँ कि सबकी सुनने वाले तो मनमोहन हैं हीं. मोदी हिम्मतवाला काम करते है.

येदियुरप्पा और श्रीरामुलू को टिकट देना क्या साबित नहीं करता कि हिम्मतवाला कमज़ोर है?

सवाल सुषमा जी ने भी उठाए हैं. राजनीतिक लोगों के सामने मजबूरियां हो सकती हैं लेकिन हमारे सामने कोई मजबूरी नहीं हैं. हम अपने मुद्दों के सामने किसी मजबूरी को नहीं आने देंगे. यदि कोई भ्रष्ट है तो जैसी नीतियों को बनवाने के लिए हम बीजेपी से शपथपत्र ले रहे हैं उनके बनने के बाद कोई भ्रष्ट व्यक्ति बच नहीं सकेगा. चाहे वो किसी भी पार्टी का हो. यदि बीजेपी से भी कोई भ्रष्ट व्यक्ति चुनकर आ जाता है तो वह बच नहीं सकेगा.

राजनीतिक मजबूरियों को लेकर आप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मज़ाक बनाते रहे हैं. लेकिन आप मोदी को भी इस राजनीति के सामने मजबूर बता रहे हैं?

मैं नरेंद्र मोदी की बात नहीं कर रहा हूँ. बीजेपी घरेलू पार्टी नहीं हैं. यहाँ पच्चीस नेता हैं. मोदी अकेले नेता नहीं हैं वह सिर्फ़ पीएम पद के उम्मीदवार हैं. ये पार्टी पंचायती है इसलिए इस मजबूरी को सिर्फ़ मोदी पर नहीं डाला जा सकता.

क्या रामदेव अपने आदर्शवाद से समझौता कर रहे हैं?

हमने आदर्शवाद से समझौता नहीं किया है. राष्ट्रहित सर्वोपरि है, इसलिए युगधर्म के अनुसार हमने अपने सिद्धांतों को तिलांजलि दिए बिना एक नसीहत, जो ज़रूरी थी, वो दे दी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार