चुनाव में किसानों के मुद्दे क्यों नहीं?

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महाराष्ट्र में हाल ही में जो ओले पड़े उसका असर राज्य के 35 में से 28 ज़िलों में पर पड़ा है.

सरकार की तरफ से राहत कार्य में लगे अधिकारियों का कहना है कि रबी की फ़सल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. ख़रीफ की भी थोड़ी फसल पर ओलों के गिरने का असर हुआ है.

विदर्भ से शुरू होकर ये प्राकृतिक आपदा मराठवाडा, उत्तर और पश्चिम महाराष्ट्र में फैल गई. इसका असर हज़ारों परिवारों पर पड़ा है.

मराठवाडा के इलाक़े में पिछले दो सालों से सूखे का प्रकोप जारी है.

सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की है. निर्वाचन आयोग ने इसे मंजूर किया है

सवाल ये है कि चुनाव में किसानों की समस्याएं मुद्दा क्यों नहीं बनतीं.

राजनीतिक दल किसानों की आत्महत्या या फिर किसानों की बेहतरी के लिए किसी ठोस नीति की बात क्यों नहीं करते.

क्यों राजनीति में किसान हाशिए पर हैं?

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