सोनी सोरी: 'माओवादियों की साथी', अब माओवादियों का बहिष्कार

सोनी सोरी
Image caption सोनी सोरी को माओवादियाों की मदद के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

माओवादियों ने बस्तर लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार सोनी सोरी पर चुनाव लड़कर सरकार को फ़ायदा पहुँचाने और टाटा एवं एस्सार समूह की कथित लूट में सहयोग देने का आरोप लगाया है.

माओवादियों ने प्रेस को जारी एक बयान में जनता से सोनी सोरी का और चुनाव का बहिष्कार करने की भी अपील की है.

इस बयान में लोकसभा चुनाव में खड़े हुए अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों के भी बहिष्कार करने की बात भी कही गई है.

इस मामले में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुनील कुजूर का कहना है, "हमारे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. जब कोई जानकारी सामने आएगी, तभी हम इस मामले में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में कुछ कह सकते हैं."

सांठगांठ के आरोप

ग़ौरतलब है कि सोनी सोरी पर माओवादियों से कथित सांठगांठ और एस्सार समूह से 'सुरक्षा के बदले पैसे वसूलने' के आरोप हैं. उन्हें कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम ज़मानत दी है.

तीन दिन पहले ही सोनी सोरी ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार की हैसियत से बस्तर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया है.

अब माओवादियों की दक्षिण रीज़नल कमेटी के सचिव गणेश उईके ने एक बयान जारी कर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और सोनी सोरी के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए हैं.

इस बयान में माओवादी नेता ने कहा है, "सोनी सोरी माओवादियों की मदद देने के नाम पर पुलिस प्रशासन के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार होकर लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनकर सरकार की दमनकारी नीति, अत्याचार, टाटा और एस्सार की लूट में सहयोग दे रही है. साथ ही सोनी सोरी लोकसभा प्रत्याशी बन कर सरकार को फ़ायदा पहुंचाने का काम कर रही है, जिसे जनता को कोई लाभ नहीं है."

केजरीवाल पर आरोप

Image caption मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी के अनुसार सोनी सोरी के साथ पुलिस हिरासत में यौन हिंसा हुई थी.

अपने बयान में माओवादी नेता ने आम आदमी पार्टी पर विदेशी साम्राज्यवादियों की कथित मदद करने और विदेशों से कथित फंडिंग का आरोप लगाते हुए केजरीवाल पर भ्रष्टाचार और महंगाई के ख़िलाफ़ लड़ाई का ढोंग रचने और निजीकरण में शामिल होने की बात कही है.

माओवादियों ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 'नोटा' में वोट देने से कोई लाभ नहीं होने का उल्लेख करते हुये अपने बयान में कहा है, "सही लोकतंत्र के लिए और जनाधिकार के लिए चुनाव के बजाए जनहित पर आगे बढ़ना होगा."

इस बयान में चुनाव के दौरान सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाईयों की चेतावनी देते हुए अपनी पूरी तैयारी की बात भी कही गई है.

नक्सल प्रभावित बस्तर के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका, सोनी सोरी को पांच अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था.

सोनी सोरी के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था और उनके ख़िलाफ़ आठ अलग-अलग मुक़दमे दर्ज किए गए थे.

हिरासत के दौरान शोषण

Image caption सोरी पर दर्ज आठ मामलों में से पाँच में वो निर्दोष क़रार हो चुकी हैं.

इनमें से पांच मामलों में सोनी सोरी को पहले ही निर्दोष क़रार दे दिया गया है. इसके अलावा एक मामला बंद हो चुका है और दो मामलों में उन्हें ज़मानत मिल चुकी है.

सोनी सोरी का मामला तब चर्चा में आया, जब अक्तूबर 2011 में कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सर्वोच्च अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सोरी के शरीर में कुछ बाहरी चीज़ें पाई गईं. लेकिन टीम यह नहीं तय कर पाई कि ये चीज़ें कैसे उनके जननांगों में पहुँचीं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत इकाई ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को एक ख़त लिखकर सोनी सोरी के उन आरोपों की जांच की मांग की थी, जिनमें उन्होंने हिरासत के दौरान यौन शोषण और हिंसा का शिकार होने का आरोप लगाया था.

एमनेस्टी के अनुसार आठ और नौ अक्टूबर, 2011 को पुलिस हिरासत में सोनी सोरी को पीटा गया, उनसे यौन हिंसा की गई और बिजली के झटके दिए गए.

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