भारत ने दी स्विट्ज़रलैंड को बैंकों में जमा काले धन पर धमकी

  • 27 मार्च 2014
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भारत सरकार ने स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा भारतीयों के पैसे की जानकारी लेने के लिए दबाव बढ़ा दिया है.

वित्त पी चिदंबरम ने स्विट्ज़रलैंड को चेतावनी दी है कि जानकारी साझा करने के आग्रह लगातार ठुकराने के लिए भारत स्विट्ज़रलैंड को जी-20 जैसे बहुराष्ट्रीय मंचों पर ले जा सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार चिदंबरम ने अपनी स्विस प्रतिपक्षी एवेलीन विडमर श्लुम्प्फ़ को लिखे एक रूखे पत्र में कहा है कि जी 20 देशों द्वारा स्वीकार किया गया अप्रैल 2009 का बयान साफ़ कहता है कि 'बैंक गोपनीयता का समय ख़त्म हो गया है.'

कड़े शब्दों में लिखे गए पत्र में भारतीय वित्त मंत्री ने कहा है कि अगर असहयोग जारी रहता है तो भारत स्विट्ज़रलैंड को असहयोगी क्षेत्राधिकार घोषित करने जैसे कदम उठा सकता है.

'नए वक्त के साथ नहीं'

चिदंबरम ने कहा कि स्विट्ज़रलैंड ने दोनों देशों के बीच डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (डीटीएए) का सम्मान नहीं किया है, जिसके तहत कर अधिकारियों ने स्विस बैंकों में पैसा जमा करने वाले भारतीयों के बारे में जानकारी मांगी थी.

13 मार्च को लिखे गए पत्र में उन्होंने कहा, "स्विट्ज़रलैंड भारत और अन्य देशों को इस आधार पर जानकारी देने से इनकार कर रहा है कि जो जानकारी मांगी गई है वह 'चुराए गए आंकड़ों' पर आधारित है. इससे साफ़ होता है कि वह अब भी बैंकों की गोपनीयता पर विश्वास करता है और इसलिए नए वक्त के साथ नहीं है."

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Image caption चिदंबरम के मुताबिक़ बैंकों की गोपनीयता का वक्त ख़त्म हो गया है.

उन्होंने अपने सार्वजनिक वित्त की रक्षा के लिए प्रतिबंध लगाने के जी20 के फ़ैसले (stand) को याद करते हुए कहा, "अगर डीटीएसी (डबल टैक्सेसन अवॉयडेंस कवेंशन) के तहत भारत को जानकारी दिए जाने से मना किया जाता रहा तो भारत सरकार वैश्विक मंचों पर मामला उठाने को बाध्य होगा."

उन्होंने कहा भारत वैश्विक मंचों पर यह बात उठाने से नहीं हिचकेगा कि स्विट्ज़रलैंड पारदर्शिता के मानदंडों पर खरा नहीं उतर रहा है और कानून और नियमन का ढांचा स्विट्ज़रलैंड में अब भी तैयार नहीं है.

उन्होंने कहा, "इसके बाद भारत सरकार को यह मामला अन्य जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर उठाना पड़ेगा."

ख़ास बात यह है कि संघ परिवार और बाबा रामदेव स्विस बैंकों में जमा भारतीयों काले धन को भारत वापस लाने को चुनावी मुद्दा बनाने पर ज़ोर देते रहे हैं. बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बाबा रामदेव को इस मांग पर सहमति दे भी चुके हैं.

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